9 अगस्त को पूरे दिन मनाया जाएगा रक्षाबंधन, राहुकाल छोड़ दिनभर बहनें बांध सकेंगी रक्षा-सूत्र
— ज्योतिषाचार्य संदीप शर्मा, माँ भद्रकाली मंदिर
रांची। भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन इस वर्ष 9 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। माँ भद्रकाली मंदिर के पुजारी ज्योतिषाचार्य संदीप शर्मा के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन विशेष संयोग लेकर आया है। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि के साथ ही श्रवणा नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग और शिव योग बन रहे हैं, जो पर्व को अत्यंत शुभ बनाते हैं।
राहुकाल छोड़ पूरे दिन बांधी जा सकती है राखी
विशेष बात यह है कि इस वर्ष रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। यानी बहनें राहुकाल (सुबह 9:00 से 10:30 बजे तक) को छोड़कर पूरे दिन किसी भी समय अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। यह एक दुर्लभ संयोग है जिसमें समय की कोई विशेष बाध्यता नहीं है।
रक्षा-सूत्र की तीन पवित्र गांठों का अर्थ
राखी या मौली में तीन पारंपरिक गांठें बांधी जाती हैं, जिनका गहरा आध्यात्मिक महत्व है:
- पहली गांठ – धर्म की रक्षा के लिए।
- दूसरी गांठ – आत्मा की रक्षा हेतु, जो नकारात्मकता से सुरक्षा देती है।तीसरी गांठ – तन, मन और परिवार की रक्षा के साथ सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना के लिए बांधी जाती है।
- तीसरी गांठ – तन, मन और परिवार की रक्षा के साथ सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना के लिए बांधी जाती है।
रक्षाबंधन की पौराणिक कथा
–पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार राजा बलि ने अश्वमेघ यज्ञ कराया उस समय भगवान विष्णु ने बौने वामन का रुप धारण किया और राजा बलि तीन पग भूमि दान में मांगी राजा बलि इसके लिए तैयार हो गए और जैसे ही उन्होंने हां कहा, वामन रुपधारी भगवान विष्णु ने धरती और आकाश को अपने दो पगों से नाप दिया इसके बाद उनका विशाल रुप देखकर राजा बलि ने अपने सिर उनके चरणों में रख दिया और भगवान से वरदान मांगा कि जब भी मैं भगवान को देखूं तो आप ही नजर आएं हर पल सोते जागते उठते बैठते आपको देखना चाहता हूं भगवान ने उन्हें वरदान दिया और उनके साथ रहने लगे इसके बाद मां लक्ष्मी परेशान हो गईं और उन्होंने नारद मुनि को सारी बात बताई नारद जी ने कहा कि आप राजा बलि को अपना भाई बनाकर भगवान विष्णु के बारे में पूछिए. इसके बाद माता लक्ष्मी राजा बलि के पास रोते हुए पहुंची तो राजा ने पूछा कि आप क्यों रो रही हैं मुझे बताइए मैं आपका भाई हूं यह सुनकर माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधी और भगवान विष्णु को मुक्त करने का वचन लिया तभी से रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है।