हजारीबाग के हटवे गांव के रहने वाले सजुल टुडू ने हादसे में गंवाए हाथ-पैर, फिर भी भारत भ्रमण पर निकले साइकिल से

साइकिल नहीं, हौसलों पर सवार है दिव्यांग सजुल टुडू – 11 राज्यों में 7330 किमी की यात्रा कर दिया अनोखा संदेश

हजारीबाग:- कहते हैं मन के हारे हार है और मन के जीते जीत. इसे साकार किया है हजारीबाग जिला के टाटीझरिया प्रखंड के हटवे गांव निवासी 27 वर्षीय सजुल टुडू ने। एक हाथ और एक पैर खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और साइकिल पर भारत भ्रमण शुरू कर दिया।सजुल अब तक 156 दिन में 11 राज्यों में 7330 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। उनकी यात्रा का उद्देश्य केवल दूरी नापना नहीं, बल्कि समाज को यह संदेश देना है कि दिव्यांगता शारीरिक होती है, मानसिक नहीं।

हादसे के बाद भी नहीं टूटा हौसला

साल 2014 में ट्रांसमिशन लाइन पर काम करते वक्त ऊंचाई से गिरने के कारण सजुल ने अपना एक हाथ और एक पैर खो दिया। डॉक्टरों और परिवार से प्रेरणा लेकर उन्होंने जिंदगी को नए सिरे से जीने का निर्णय लिया और 18 मार्च 2025 को हजारीबाग से साइकिल यात्रा की शुरुआत की।

अब तक का सफर

सजुल अपनी विशेष साइकिल से पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा की यात्रा कर चुके हैं। उन्हें जगह-जगह पर लोगों का सम्मान और सहयोग मिला।

समाज के लिए संदेश

सजुल टुडू का कहना है कि “हौसला बुलंद हो तो कोई भी कठिनाई इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।” उनका सपना है कि वे पूरे भारत का भ्रमण कर हर किसी को यह संदेश दें कि जीवन की चुनौतियों से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है – हिम्मत

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