भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान (CIFE), मुंबई के सतत प्रयासों के तहत हजारीबाग जिले के दौडवा कुण्डवा गांव में 70 मत्स्य कृषकों के लिए तीन दिवसीय एकीकृत मल्टी ट्राफिक जलीय कृषि मॉडल पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन बरही अनुमंडल पदाधिकारी, श्री जॉन टुडू द्वारा किया गया, जिन्होंने प्रशिक्षण मैनुअल का भी अनावरण किया।यह उल्लेखनीय है कि CIFE, मुंबई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. प्रेम कुमार पूर्व में भी हजारीबाग में किसानों के साथ विभिन्न उन्नत मत्स्य पालन तकनीकों पर कार्यशालाएं आयोजित कर चुके हैं। पिछली यात्राओं में उन्होंने किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों, जल प्रबंधन और सहायक जल कृषि प्रणालियों पर मार्गदर्शन दिया था, जिसका सकारात्मक प्रभाव आज किसानों की बढ़ती उत्पादन क्षमता में देखा जा सकता है।डॉ. प्रेम कुमार ने इस अवसर पर कहा, “CIFE, मुंबई हजारीबाग के मत्स्य कृषकों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए सदैव तत्पर है। हमारा लक्ष्य किसानों को केवल मछली पालन तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उन्हें मोती पालन और सिंघाड़ा उत्पादन जैसे विकल्पों से जोड़कर उनकी आय के नए द्वार खोलना है।”प्रशिक्षण सत्र में मत्स्य कृषकों को तालाब में एकीकृत रूप से मछली, मोती और पानी फल (सिंघाड़ा) की खेती करने के व्यावहारिक तौर-तरीके सिखाए गए। यह मॉडल किसानों को जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और बहुउद्देश्यीय कृषि के माध्यम से अधिकतम आर्थिक लाभ प्राप्त करने में सहायता करेगा।हजारीबाग जिले में CIFE, मुंबई की सतत उपस्थिति ने किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जिला प्रशासन एवं मत्स्य विभाग के सहयोग से CIFE टीम किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहायता लगातार प्रदान कर रही है।इस अवसर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारी एवं प्रशिक्षु कृषक उपस्थित रहे।
