यह बात सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लगा होगा, लेकिन आंकड़े झूठ नहीं बोलते सच्चाई भी यही है. हेमंत सरकार बनने की कवायद कहीं ना कहीं पुराने पेंशन की मांग से जुड़ी है

नई पेंशन योजना का विरोध और हेमंत सरकार का पुरानी पेंशन आंदोलन से जुड़े लोगों को समर्थन झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में काम आया.

पुरानी पेंशन आंदोलन से जुड़े लोग इस बात का दावा करते हैं कि उनका मत गठबंधन को गया झारखंड के 81 विधानसभा क्षेत्रों में से 65 में पोस्टल बैलट में गठबंधन के प्रत्याशियों को बढ़त मिली.

पिछली सरकार में अपनी मांगों को लेकर पुरानी पेंशन को बहाल करने को लेकर हजारों कर्मियों ने सरकार का विरोध और नारेबाजी भी की थी. सरकारी कर्मी अपनी मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे थे, उनकी मांगों से यह बात स्पष्ट थी जो भी पार्टी उनका समर्थन करता उनका मत उन्हीं को जाता. सरकारी कर्मचारी अपना वोट पोस्टल बैलट के जरिए देते हैं

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता, सरकारी कर्मचारी वर्ग झामुमो के प्रति अपना समर्थन भी पहले कभी नहीं दिखाया था.. लेकिन इस बार के पोस्टल बैलट आंकड़े सरकार की तकदीर बदल देते हैं ..2014 चुनाव में जेएमएम को 19 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी, जहां पोस्टल बैलट में मात्र 10 विधानसभा में ही बढ़त थी, किंतु इस बार 81 विधानसभा में 65 विधानसभा सीटें ऐसी थी जहां झामुमो महागठबंधन पोस्टल बैलट में जीते थे या बढ़त में थे.

पुराने पेंशन आंदोलन से जुड़े लोगों का झुकाव इस बार महागठबंधन की ओर स्वाभाविक थी, झामुमो ने अपने घोषणा पत्र में पुरानी पेंशन बहाली को तरहीज दी वहीं कांग्रेस भी चुनावी सभाओं में इस मुद्दे पर सकारात्मक पहल की बात कही

2004 के बाद सरकारी सेवा में योगदान देने वाले कर्मी सेवानिवृत्ति के उपरांत नई पेंशन योजना के अंतर्गत आएंगे… यहीं पुरानी पेंशन बहाली की मांग उठी

2004 की पेंशन नीति का विरोध राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गया रामलीला हो या मोरहाबादी हर जगह पुरानी पेंशन मांगों को लेकर प्रदर्शन चला. कर्मचारियों का कहना है 2004 में लाई गई न्यू पेंशन स्कीम दरअसल नो पेंशन स्कीम है. पुरानी पेंशन स्कीम में सेवानिवृत्ति के बाद निश्चित पेंशन गारंटी थी, वहीं नई में कुछ भी नहीं.. पेंशन की राशि तय नहीं है जीपीएस की सुविधा भी नदारद है. शेयर बाजार आधारित राशि निश्चित नहीं होगी. पुरानी पेंशन बहाली को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन चलाया गया इसमें हर विभाग के कर्मी शामिल है, संगठन के प्रांतीय महासचिव प्रदीप कुमार मंडल के नेतृत्व में शुरू आंदोलन आज के 24 जिलों में पहुंच चुका है.

चित्र सौजन्य: सोशल मीडिया

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