लंबित 21 सूत्री मांगों को लेकर झारखंड अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के राज्य कार्यकारिणी की हजारीबाग मुख्यालय में रविवार 31 मई को निर्णायक बैठक , मांग पूरी नहीं होने पर सशक्त आंदोलन की रणनीति तय करने का निर्णय.

21 सूत्री मांगे नहीं पूरी होने की स्थिति में

31 मई को लंबित 21 सूत्री मांगों के समर्थन में झारखंड राज्य कर्मचारी महासंघ के राज्य कार्यकारिणी की बैठक में लिए गए निर्णय के आलोक में राज्य के तमाम अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ साथियों ने कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में हजारीबाग जिला के कर्मचारी साथियों ने एक दिवसीय भूख हड़ताल कर इसका समर्थन किया . जिसमें लंबित 21 सूत्री मांगे पूरी नहीं होने की स्थिति में सर्वसम्मति से आगे का सशक्त आंदोलन की रणनीति व रूपरेखा तैयार करने का निर्णय लिया गया है .

लंबित 21 सूत्री मांगे

झारखंड अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ की लंबित 21 सूत्री मांगों में मुख्य मांगे क्रमशः वर्ष 2004 से बहाल नई पेंशन व्यवस्था को समाप्त कर पुरानी पेंशन व्यवस्था को ही लागू रहने देने , समाहरणालय लिपिकों की भांति क्षेत्रीय लिपिकों को भी 1900 सौ के स्थान पर 2400 सौ रुपए ग्रेड पे करने , वर्ग 4 के योग्य कर्मियों को शत प्रतिशत वर्ग 3 में प्रोन्नति देने ,राज्य के सभी संविदा कर्मियों , जिनकी सेवा 10 वर्ष से ऊपर की हो चुकी है को उनकी सेवा नियमित किये जाने , समान कार्य समान वेतन , पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में कार्यरत श्रमपुस्त कर्मियों को नियमित करने , जल संसाधन विभाग के कर्मियों को संशोधित वेतनमान एसीपी प्रोन्नति दिए जाने , परिवहन भत्ता एजुकेशन भत्ता मेडिकल सुविधा दिए जाने , हजारीबाग जिला के कर्मचारियों को भी नगर निगम क्षेत्र हो जाने एवं धनबाद जमशेदपुर की तरह ही परिवहन भक्ता दिए जाने , महिला प्रसार पदाधिकारियों का हो रहे अब तक प्रताड़ना से निजात दिलाने , नियमित बहाली के बावजूद सेवानिवृत्ति के पश्चात वंचित पेंशन एवं अन्य लाभकारी सुविधाओं का लाभ दिलाने , एकीकृत बिहार काल में किए गए वादा के तहत 332 ई .मैनेजर की सेवा संविदा विस्तार एवं नियमित किए जाने , दुमका ग्रामीण विकास कार्य प्रमंडल में मास्टर राल पर कार्यरत कर्मियों को नियमित किए जाने आदि मुख्य मांगे हैं.

अपनी मांगों को लेकर 5 वर्षों से आंदोलित है अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ

झारखंड अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ अपनी 21 सूत्री मांगों को लेकर 5 वर्षों से आंदोलनरत है लगातार प्रदर्शन धरना हड़ताल के क्रम में राज्यपाल महोदया कार्यालय मुख्यमंत्री सचिवालय कार्मिक प्रशासनिक एवं राजभाषा विभाग से भी अनेकों पिट पत्र / पत्र विभागों को निर्गत किए जाने के बावजूद भी अभी तक कोई सकारात्मक कार्यवाही नहीं की जा सकी है ,जो रोज का कारण बना हुआ है . बैठक में जल्द इनकी मांगों पर सरकार के स्तर से कार्यवाही नहीं की गई तो महासंघ द्वारा उग्र आंदोलन के लिए आगे की रणनीति तय करने का निर्णय लिया गया है . गौरतलब है कि विगत झारखंड विधानसभा चुनाव में राजपत्रित अराजपत्रित कर्मचारियों व कांट्रैक्ट कर्मियों की मांगों की उपेक्षा का खामियाजा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को बुरी तरह भुगतना पड़ा है इसकी तपिश से भाजपा भी झारखंड में अपने साथ नहीं बचा पाई . दूसरी तरफ वर्तमान महागठबंधन की सरकार में शामिल दलों द्वारा उनकी मांग को जायज ठहराते व समर्थन करते हुए हुए इसे पूरा करने की जोरदार वकालत भी कर चुके हैं वर्तमान महागठबंधन की सरकार से आंदोलनरत कर्मियों को अपेक्षा भी है, अब देखना है की महा गठबंधन सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है, फिलहाल तो यह समय के गर्भ में है. मौजूदा हालात में सरकार और तंत्र कोविड-19 वैश्विक कोरोना वायरस के प्रलयंकारी संक्रमण से राज्य और राज्य वासियों को बचाने के लिए एड़ी चोटी के प्रयास में जुटी हुई है .

बैठक में महासंघ से मौजूदगी रही

मांगों को लेकर राज्य कार्यकारिणी की हजारीबाग में हुई निर्णायक बैठक में जिला शाखा हजारीबाग के अध्यक्ष बृज किशोर सिन्हा , जिला मंत्री संतोष कुमार सम्मानित अध्यक्ष ललितेश्वर चौधरी प्रमंडलीय मंत्री विजय कुमार बृज मोहन प्रसाद विनीत कुमार शाही संतोष कुमार सिन्हा राजेश कुमार सिन्हा अनिल रंजन कृष्ण कुमार ओझा गोविंद राम महतो चंद्रकांत लाल दास उपेंद्र कुमार गुलाम हुसैन कृष्णा कुमार राम राघव सिंह राजेश कुमार गुप्ता छोटू कुमार ठाकुर धीरज कुमार वशिष्ठ पांडे भुवनेश्वर राम कन्हैया टुडू आदि महिला कर्मचारियों सहित कई सदस्य शामिल थे .

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here