हजारीबाग की बहू नीलिमा लाल ने कला हुनर एवं सौंदर्य के क्षेत्र में सिर्फ हजारीबाग ही नहीं झारखंड का बढ़ाया मान , मिसेज झारखंड ही नहीं साहित्य रचनाकार और डॉक्यूमेंट्री मूवी के निर्माता उत्पल दत्ता की रचना मंत्र मुग्ध कवर पेज पर बनाई स्थान , उत्पल दत्ता की शॉर्ट फिल्म की भी होगी मुख्य किरदार , आइए जानिए पहचानिए इस विलक्षण प्रतिभा को

नीलिमा को मिला है मिसेज झारखंड एवं क्लासिक ब्यूटी का खिताब

उत्पल दत्ता के उपन्यास मंत्र मुग्ध के कवर पेज पर छपी है बहु नीलमा की तस्वीर

उत्पल दत्त की डॉक्यूमेंट्री फिल्म में भी निभाएगी मुख्य किरदार की भूमिका

बहू नीलिमा का लक्ष्य है मॉडलिंग और अभिनय के क्षेत्र में हजारीबाग ही नहीं झारखंड का नाम रोशन करना

महापुरुषों का मानना है कि मेघा हुनर प्रतिभा सौंदर्य व उपलब्धि किसी का जागीर नहीं होता कीचड़ में भी कमल खिलता है और कोयले में हीरा मिलता है इन लोकोक्तियां को हजारीबाग की एक सामान्य परिवार की बहू और गुदड़ी के लाल नीलिमा लाल ने सिद्ध प्रमाणित व जीवंत कर दिखाई .

होनहार का पांव पालने में ही दिखने लगता है

कहावत है कि होनहार बिरवान के होत चिकने पात की मिसाल है नीलिमा लाल ,ऐसे तो वह हजारीबाग की बहू है. नीलिमा लाल बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि और खोजी प्रवृत्ति की थी कुछ न कुछ नया करते रहना उसकी आदतों में शुमार था लगनशील के साथ-साथ मेहनती भी भी थी .बेटी से बहु बनने के बाद भी मिसेज झारखंड चुनी गई नीलिमा लाल अपने जीवन के इस मूल मंत्र को अपनाए रही और इसी नक्शे कदम पर मुस्तकिल व चलायमान बनी हुई है इसका सार्थक परिणाम भी मिल रहा है एक के बाद एक कामयाबी व सफलता उनके कदम चुम रही है और अब वह किसी के परिचय का मोहताज नहीं रह गई है. जो आज सभी के समक्ष व सामने परिलक्षित व दृष्टिगोचर है साथ ही दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन चुकी है .

जीवन चलने का नाम है नीलिमा लाल का शगल

मनुष्य सृष्टि की सबसे अद्भुत और श्रेष्ठ रचना है जीवन चलने का नाम चलते रहो सुबह ओ शाम सफल मानव जीवन का मूल मंत्र है. हजारीबाग की बहू नीलिमा लाल भी इसका उदाहरण बनी हुई है व इसे अपने जीवन का मूल मंत्र बनाइ हुई है ऐसे भी सर्वमान्य है कि जिसमें किसी भी कार्य को करने के प्रति दृढ़ इच्छाशक्ति कठोर लगन -मेहनत चट्टानी इरादा और अडिग संकल्प होता है कामयाबी खुद ब खुद उसके पास पहुंच जाती है और सफलता कदम चुनती है जो हजारीबाग की बहू नीलिमा लाल के साथ चरितार्थ हुआ और होने वाला भी अनुमानित ,व सम्भावित है .

मिला सहारा अब पीछे मुड़कर देखने को तैयार नहीं नीलिमा

महापुरुषों का मानना है कि सहारा उसे ही नसीब होता है जो सहारा पाने के प्रति उत्सुक व जागरूक होता है वक्त व नसीब उसका ही साथ व मौका देता है जिसमें मौका लेने के प्रति जिज्ञासा व उतेजना होती है व उसके लिए अपेक्षित व ऊर्जावान होता है . कुछ नया कर दिखाने की ललक की धनी हजारीबाग की बहू नीलिमा लाल को अपने पति और ससुराल के परिजनों से लक्ष्य प्राप्ति के लिए भरपूर सहारा मिला और नीलिमा लाल अपने ससुराली परिजनों की उम्मीद के कसौटी पर खरी उतरी पहली सफलता कई मॉडलों की तस्वीरों में नीलिमा लाल की तस्वीर का चयन से मिली जिससे प्रभावित होकर असम निवासी और ऑल इंडिया रेडियो रांची के कर्मी उत्पल दत्ता ने अपने नवीनतम उपन्यास मंत्र मुग्ध के कवर पेज पर हजारीबाग की बहू नीलिमा लाल को स्थान दिया. इतना ही नहीं उत्पल दत्ता की अगली डॉक्यूमेंट्री फिल्म की मुख्य नायिका होने की मुहर भी लगा दी प्रेम कथा पर आधारित यह उपन्यास आमोजन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है. यह अवसर हजारीबाग की बहू नीलिमा लाल के सुनहरे भविष्य के लिए बड़ा सहारा मुकाम व प्लेटफार्म साबित होगा मंत्र मुग्ध उपन्यास एक प्रेम कथा पर आधारित है और इसका मुख्य उद्देश्य झारखंड की प्रतिभा को उजागर करना और बड़ा मंच प्रदान करवाना है दृढ़ इच्छाशक्ति के धनी और वर्तमान में मिसेज झारखंड नीलिमा लाल अब पीछे मुड़कर नहीं देखने के प्रति दृढ़ प्रतिज्ञ भी हैं .

नसीब बनी कामयाबी दर कामयाबी

हजारीबाग की प्रतिभावा बहू नीलिमा लाल का प्रयास रंग लाने लगा है.वक्त और नसीब भी साथ निभा रहा है कामयाबी कदम चूमने लगी हैं जीवन में सफलता दर सफलता मिल रही है पहली सफलता वर्ष 2018 में डेलिउड् ब्यूटी प्रतियोगिता में इन्हें क्लासिक ब्यूटी का अवार्ड से मिली दूसरी कामयाबी वर्ष 2019 में जमशेदपुर में आयोजित झारखंड सौंदर्य प्रतियोगिता में मिसेज झारखंड का ताज व तगमा मिलने से मिली , तीसरी बड़ी सफलता उत्पल दत्ता के उपन्यास मंत्र मुग्ध के कवर पेज पर इनकी तस्वीर होने से मिली और चौथी बड़ी सफलता उत्पल दत्ता के डॉक्यूमेंट्री फिल्म में मुख्य नायिका की भूमिका पर मुहर लगने से मिली. हजारीबाग की बहू नीलिमा लाल अब पीछे मुड़कर देखना नहीं चाहती और कामयाबी व उपलब्धियों का अंबार खड़ा कर केवल हजारीबाग ही नहीं झारखंड का नाम गौरवान्वित व रोशन करना और नई पहचान दिलाना इनके जीवन का मुख्य उद्देश्य बना हुआ है ऐसे भी झारखंड प्रतिभा का मोहताज नहीं है. झारखंड के कई बालाएं तीरंदाजी हॉकी आदि खेल में विश्व में स्थान बना चुकी हैं भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं प्रतिभा को उभारने के लिए और बड़ा से बड़ा मंच मुहैया कराने के लिए इन प्रतिभाओं को हर संभव आवश्यक मदद व सुविधा मुहैया कराना झारखंड सरकार और इसके तंत्र के लिए कर्तव्य और दायित्व बनता है ताकि प्रतिभाएं खिलने से पहले ही मुरझाने के लिए विवश नहीं हों .

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