सामाजिक भेदभाव के भय से अधिक कोरोना संक्रमित मरीज छिपा रहे हैं अपनी पहचान , हालिया सर्वे से हुआ है इसका खुलासा , इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ गुजरात के प्रोफेसर दीपक सक्सेना ने भो इसे मानते हुए इससे संबंधित दिशानिर्देश दिया है .

कोविड-19 वैश्विक कोरोना वायरस महामारी संक्रमण पूरे विश्व के लिए एक विध्वंसकारी जलजला व प्रलय का रूप अख्तियार किए हुए हैं . हर संभव युक्ति व प्रयास के बाद भी इसकी रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रहा है .अनगिनत मौतों का सिलसिला कायम बना हुआ है । कोरोना वायरस के संक्रमण के तांडव से पूरे विश्व में हाहाकार मचा हुआ है. विश्व की महाशक्तिया भी इसके आगे घुटने टेकने पर मजबूर बनी हुई हैं कोरोना वायरस के जनक , वाहक और विस्तार फैलाव पर चर्चाएं लगातार जोर पकड़ती जा रही है . इसके पीछे कई कारण गिनाया जा रहा हैं .

सामाजिक भेदभाव के डर से भी छिपाया जा रहा पहचान ; दक्षिण कोरिया, मलेशिया..

कोरोनावायरस महामारी संक्रमण का लगातार विस्तार व फैलाव के कारणों में एक बड़ा कारण संक्रमित मरीजों द्वारा महामारी से ज्यादा सामाजिक भेदभाव का दिल में घर किए डर सर्वेक्षण में सामने आया है . इसके पीछे भी कई कारण जिम्मेवार माना जा रहा है .

दक्षिण कोरिया में 62 फ़ीसदी लोग ऐसे थे

दक्षिण कोरिया के सियोल नेशनल यूनिवर्सिटीऑफ पब्लिक हेल्थ द्वारा किए गए हालिया सर्वे में यह बात सामने आई है कि लोगों में महामारी से ज्यादा सामाजिक भेदभाव का डर बना हुआ है . इसमें 62 फ़ीसदी ऐसे लोग पाए गए जिन्हें डर था कि पहचान उजागर करने से परिवार को दिक्कत हो जाएगी . इसी भय व चिंता में संक्रमण के लक्षणों के बावजूद अपनी पहचान छिपाए रखें और जांच नहीं कराई .इसमें तमाम लोग ऐसे थे जो बाद में पॉजिटिव पाए गए. दक्षिण कोरियाई अफसरों ने तमाम नाइट क्लब पब और कई ग्रुप से जुड़े लोगों से मुलाकात कर ऐसा डर दूर करने की कोशिश भी की है .

मलेशिया में रह रहे तमाम शरणार्थियों को भी समान रूप से सता रहा है यह भय..

मलेशिया के तमाम शरणार्थियों में यह डर घर किए हुए हैं कि संक्रमित पाए जाने पर या तो उन्हें देश से निकाला जा सकता है या गिरफ्तार किया जा सकता है . हालांकि वहां भी अफसरों ने इससे नहीं डरने की अपील की है .

प्रोफेसर दीपक सक्सेना का मानना है..

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ गुजरात के प्रोफेसर दीपक सक्सेना का भी मानना है कि लोगों को महामारी से ज्यादा सामाजिक भेदभाव डरा रहा है सोशल मीडिया में नाम उछाले जाने से इससे होने वाली बदनामी का भी खतरा दिलों में घर किए हुए हैं .जबकि भारत में सरकार कोरोनावायरस संक्रमित की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रही है इसलिए डरने की जरूरत का सवाल ही नहीं है .
इसमे सहयोग करना ज्यादा जरूरी है .


स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस संबंध में लगातार की है अपील व जारी किए हैं दिशानिर्देश ..

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना संक्रमित पीड़ितों से भेदभाव नहीं करने की लगातार अपील कर रही है . इनके पड़ोसियों करीबियों को कोरोनावायरस संक्रमण से सुरक्षित बने रहने के लिए टिप्स भी जारी कर रही है . स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि संक्रमित लोगों का नाम उजागर नहीं किया जा रहा है . संक्रमित व इलाजरत मरीजों के पड़ोसियों करीबियों से मरीजों एवं इनके परिवार के सदस्यों से भेदभाव व तिरस्कार नहीं करने ,संक्रमण से मुक्त होकर घर लौटने पर लोगों का मनोबल बढ़ाने व दूरी नहीं बनाने ,संक्रमित लोगों का नाम पता सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने , संक्रमण मुक्त होकर घर लौटे लोगों के बारे में सकारात्मक बातें साझा करने , कोरोना के फैलाव के लिए किसी समुदाय या इलाके को जिम्मेवार नहीं ठहराने और जिनका उपचार चल रहा है उन्हें संदिग्ध के रूप में नहीं कोरोना को डराने व मुकाबला करने वाले योद्धा के रूप में देखने व दर्जा देने की अपील आम लोगों से की है .

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