आखिर साकार हुआ अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का सपना, 5 अगस्त को पीएम मोदी राम मंदिर निर्माण की आधारशिला के लिए करेंगे भूमि पूजन , जाने क्या है योजना ?

5 अगस्त को पीएम मोदी श्रीराम मंदिर निर्माण की रखेंगे आधारशिला

दशकों की बेइंतहा प्रतिक्षा के बाद आखिरकार अयोध्या में रामलला के अद्भुत ,भव्य व विलक्षण मंदिर निर्माण का सपना साकार होने जा रहा है ,जो राजनीतिक मुद्दा कम ऐतिहासिक ,धार्मिक , सामाजिक ,सांस्कृतिक भावना, श्रद्धा भक्ति और आस्था एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि से अत्यधिक जुड़ा है . अभी तक की आधिकारिक जानकारी में 05 अगस्त को पीएम मोदी तयशुदा कार्यक्रम के तहत अयोध्या पहुच कर पूरे नेम निष्ठा और वैदिक अनुष्ठान के साथ रामलला के विलक्षण मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन और आधारशिला रखेंगे .इसके साथ ही राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया . यह महानिर्माण कार्य भी प्रारंभ हो जाएगा .इसकी विशेष तैयारी भी प्रारंभ कर दिए जाने की सूचना है .

5 अगस्त की तिथि ही क्यों बनी खास ?

दशकों की लंबी प्रतीक्षा के बाद अयोध्या के प्रस्तावित पुण्य स्थल पर होने जा रहा अद्भुतल विलक्षण श्रीराम मंदिर निर्माण हेतु भूमि पूजन एवं आधारशिला की निर्धारित 5 कीं ही तिथि व अंक का चूना जाना आम कौतूहल व जिज्ञासा का विषय होना व बनना स्वभाविक हैं . मालूम हो कि राम मंदिर निर्माण राजनीतिक मुद्दा कम ऐतिहासिक , धार्मिक , सांस्कृतिक व सामाजिक श्रद्धा – भक्ति आदि अन्य पृष्ठभूमि से अधिक जुड़े होने के कारण वैदिक महत्व का है इसे ध्यान में रखते हुए श्रीराम जन्म तीर्थ क्षेत्रं ट्रस्ट की बैठक में विशेष मंथन उपरांत भूमि पूजन व आधारशिला के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग्य वाली तिथि 3 व 5 अगस्त को कि नगरी अयोध्या श्री राम जन्म तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में किया गया है और खास तिथियों में एक पर स्वीकृति प्रदान करने के लिए पत्र पीएमओ को भेजा गया था . पीएमओ ने विचार विमर्श के बाद 5 अगस्त की तिथि पर ही अपनी स्वीकृति की मुहर लगाई है .इसके पीछे 5 अगस्त ,2019 जब कश्मीर से धारा 370 हटाई गई थी , वजह जो लाख विरोध के बाद भी सर्वार्थ सिद्धि योग होने के कारण केंद्र सरकार का ऐतिहासिक प्रयोग सफल होना माना जा रहा है .

भूमि पूजन के लिए क्यों नमो ही बने सबसे बड़ी पसंद ?

त्रेता युग के पुरुषों के आदर्श पुरुषोत्तम श्री राम के मंदिर निर्माण से जुड़े भूमि पूजन आदि वैदिक अनुष्ठान कार्य के अनुष्ठान कर्ता व जजमान के रूप में मोदी सबसे बड़ी पसंद बने , जबकि नामचीन और ख्याति प्राप्त शंकराचार्य व धर्माधिकारियों से भारत की भूमि पटी हुईं है ,फिर भी मोदी ही सबसे बड़ी पसंद क्यों ? ट्रष्ट के कामेश्वर चौपाल के मुताबिक इसके पीछे ट्रस्ट की स्पष्ट मान्यता है कि भगवान राम आस्था का केंद्र ही नहीं राष्ट्र के आदर्श व पुरुषोत्तम पुरुष के रूप में प्रतिष्ठित हैं . उनका मंदिर वस्तुतः राष्ट्र मंदिर है .ऐसे मे इस राष्ट्र मंदिर के निर्माण के लिए भूमि पूजन जैसे वैदिक अनुष्ठानिक कार्य के लिए बता जजमान पीएम नमो सर्व सम्मत सबसे बड़ी पसंद बने .

ट्रष्ट के हाथ होगी मंदिर निमार्ण की कमान

ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और अपार जन आस्था और श्रद्धा भक्ति का केंद्र श्रीराम मंदिर के निर्माण का बागडोर श्री राम जन्म तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट हाथों में रहेगा . ट्रस्ट की निगरानी और सानिध्य में ही श्रीराम मंदिर का निर्माण होगा .

श्रम और अर्थ दान से होगा श्री राम मंदिर का निर्माण

जन आस्था से जुड़े अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण सार्वजनिक श्रम और अर्थ दान से होगा . इसके लिए श्री राम जन्म तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने फिलहाल एक करोड़ देशवासियों से संपर्क साधने की योजना बनाई है . जरूरत के मुताबिक योजना का विस्तार होता रहेगा . श्रम व अर्थ दान से श्री राम मंदिर का निर्माण कराने के पीछे ट्रस्ट का पुनीत मकसद इस जन आस्था से जुड़े इस मंदिर के निर्माण को किसी भी प्रकार की राजनीतिक पकड़ व परछाई से अछूता बनाए रखना है .

1528 से 2019 तक चला राम जन्मभूमि – बाबरी मस्जिद विवाद

अयोध्या विवाद एक राजनीतिक, इतिहासिक ,धार्मिक और सामाजिक विवाद बना ,जो 90 के दशक तक सबसे ज्यादा उभार पर रहा. इस विवाद का मूल मुद्दा राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की स्थिति व अस्तित्व को लेकर बना . विवाद विशेष रूप से इस बात को लेकर रहा कि क्या 1528 में मुगल सल्तनत द्वारा हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद बनाया गया था व मंदिर को ही ध्वस्त कर मस्जिद में तब्दील कर दिया गया था ? सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुना कर विवाद का पटाक्षेप करा दिया, जिसमें 2 .77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन श्रीराम जन्मभूमि न्यास को देने का आदेश दिया .वहीं निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर सुन्नी वक्फ बोर्ड को बाबरी मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में 5 एकड़ की वैकल्पिक जमीन देने का फैसला सुनाकर विवाद का पटाक्षेप करा दिया और बहुप्रतीक्षित भूमि पर प्रस्तावित श्री राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ .

तस्वीरें सांकेतिक हैं

न्यूज़: वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार प्रो0 धीरेंद्र नाथ सिंह, दैनिक खबर

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