गांधी दर्शन……

अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ महात्मा गांधी की दुर्लभ तस्वीर

आज के भौतिकवादी युग में लोग अंधों की भांति विलासिता के चीजों के पीछे भाग रहे हैं पर विलासिता के समस्त संसाधन भी आंतरिक सुख नहीं दे सकते हैं । समाज में आर्थिक असमानता बढ़ते जा रही है । भूख, निर्धनता, रोग, अपराध और हिंसा समाज को खाए जा रहा है । यदि हम इन भीषण समस्याओं का समाधान चाहें तो हमें गांधीवादी दर्शन की शरण में जाना पड़ेगा । संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी गांधी की प्रासंगिकता को स्वीकार करते हुए सन 2007 से 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है । विश्व के 100 से भी अधिक देशों ने गांधी जी के सम्मान में अपने-अपने देशों में गांधी जी पर डाक टिकट जारी किए हैं । राष्ट्रपति चुनाव के समय ओबामा ने अपने सीनेट कार्यालय में महात्मा गांधी की तस्वीर लगा रखी थी । ओबामा गांधी जी को अपना आदर्श और प्रेरणा स्रोत मानते थे । महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन महात्मा गांधी के सबसे बड़े प्रशंसकों में से एक हैं । इन्होंने अपने कमरे में गांधी जी की तस्वीर लगा रखी थी । इन्होंने कहा था कि – “भविष्य की पीढ़ियों को इस बात पर विश्वास करने में मुश्किल होगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई व्यक्ति(महात्मा गांधी) भी कभी धरती पर आया था।”

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधी जी को ‘महात्मा’ की उपाधि दी


नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रविंद्र नाथ टैगोर, संत विनोबा भावे, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल, पंडित जवाहरलाल नेहरु, महादेवी वर्मा, महाकवि जयशंकर प्रसाद, वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी समेत करोड़ों लोग गांधीजी के प्रशंसक हैं । नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने गांधी जी को “राष्ट्रपिता” कहा वहीं गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधी जी को ‘महात्मा’ की उपाधि दी ।

मै उसके सिवा अन्य ईश्वर को नहीं मानता


आज विश्व में कहीं भी शांति मार्च निकालना हो, अत्याचार और हिंसा का विरोध किया जाना हो या हिंसा का जवाब अहिंसा से देना तो महात्मा गांधी ही स्मरण किए जाते हैं ।
जहां सत्य है वहां असत्य भी है, जहां पुण्य है वहां पाप भी है ठीक वैसे हीं एक और जहां विश्व में गांधीजी के करोड़ों प्रशंसक हैं, गांधीजी एक व्यक्ति ना होकर एक युग थे । गांधीजी सर्वधर्म समभाव की जीती-जागती तस्वीर थे । गांधीजी का धर्म किसी को अलग नहीं करता है बल्कि मानव का मानव से मेल कराता है । गांधीजी के ईश्वर का अर्थ है ‘सत्य’ जिसका आधार है ‘प्रेम और अहिंसा’ । गांधी जी ने कहा है – “लाखों-करोड़ों गुंगों के हृदयों में जो ईश्वर विराजमान है मै उसके सिवा अन्य ईश्वर को नहीं मानता । वे उसकी सत्ता को नहीं जानते, मै जानता हूं । मैं इन लाखों-करोड़ों की सेवा द्वारा उस ईश्वर की पूजा करता हूं जो सत्य है अथवा जो ईश्वर है ।”

गांधी स्वयं श्रीमद्भागवत गीता से प्रेरणा लेते थे


गांधीजी आधुनिकता के विरोधी नहीं थे, बल्कि वे उसकी शोषणकारी प्रवृत्ति के विरोधी थे । गांधीजी का हथियार सत्य और अहिंसा था । इसी के बल पर इन्होंने दक्षिण अफ्रीका और भारत में सफल आंदोलन किये । गांधीजी का अहिंसा डरपोकपन या कायरता नहीं है । अहिंसा व्यक्ति के नैतिक साहस और आंतरिक बल का परिचायक है । अहिंसक सत्याग्रह व्यक्ति के विरोध का एक शक्तिशाली माध्यम है । यह सर्वाधिक साहस की मांग करता है । गांधीजी का मानना था कि जो सत्याग्रही अपना चारित्रिक और नैतिक बल खो देता है उसका प्रतिरोध हिंसक हो जाता है और वह फिर सत्याग्रह के मार्ग से भटक जाता है । अहिंसा से हिंसा पर विजय की सीख देने वाले महात्मा गांधी स्वयं श्रीमद्भागवत गीता से प्रेरणा लेते थे । अनासक्ति का पाठ इन्होंने श्रीमद्भागवत गीता से ही सीखा था । इनका मानना था कि हमारा प्रत्येक आचरण नैतिक रूप से शुद्ध होना चाहिए । गांधीजी साध्य की अपेक्षा साधन की शुद्धता पर विशेष ध्यान देने की बात करते हैं ।

गांधीजी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वो समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के पक्ष में खड़े होते हैं । गांधीजी समाज में ताकत के बल पर बदलाव न करके सत्य और अहिंसा के नैतिक बल के आधार पर बदलाव करना चाहते हैं ।

जितने प्रासंगिक थे उससे कहीं अधिक आज प्रासंगिक हैं


महात्मा गांधी प्रबल राष्ट्रवादी थे किंतु इनका राष्ट्रवाद ऐसा है जो किसी अन्य के राष्ट्रवाद का विरोध नहीं करता है । सभी का सम्मान और सभी का अभ्युदय गांधी जी का मूल मंत्र है ।हमारे लिए गांधीजी के मूल शिक्षा सत्य और अहिंसा है । सत्य और अहिंसा को जाने बिना गांधी जी को नहीं समझा जा सकता है ।स्वयं अनैतिक रहकर गांधीजी के नैतिक विचारों के महत्त्व को नहीं समझा जा सकता है । सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही भारत समेत पूरे विश्व में शांति कायम की जा सकती है । वर्तमान समय में गांधीजी की प्रासंगिकता पर संदेह करना भारी भूल होगी । गांधीजी अपने दौर में जितने प्रासंगिक थे उससे कहीं अधिक आज प्रासंगिक हैं ।

**सारी तस्वीरें सोशल मीडिया से उपलब्ध कराई गई हैं


डॉ.नितेश कुमार
सहायक शिक्षक
रा.सं.+2 उच्च विद्यालय, सिमरिया (चतरा)

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