रामगढ राज ब्रिटिश राज मे बिहार की सबसे बड़ी जमींदारी थी , वर्तमान में झारखंड का रामगढ़ ,रियासत के पहले राजा बाघदेव सिंह और अन्तिम शासक महाराजा कामाख्या नारायण सिंह बहादूर और महाराज कुमार बसन्त नारायण सिंह थे. इनको बाद में नारायण वंश के नाम से भी पहचाना गया.नारायण राज वंश भारत का पहला परिवार था जिसने चुनाओ प्रचार में हेलिकॉप्टर का प्रदर्शन किया था. ..

जमीदारी उन्मूलन पश्चात रामगढ़ स्टेट ने सरकार को बंदोबस्ती की गई जमीन का रिटर्न दाखिल नहीं किया

जमींदारी हुकुमनामा और रसीद पर राजस्व पंजी 2 में होती आई जमाबंदी.

रामगढ़ के पूर्व राजा के गैरमजरूआ जमीन पर सबसे अधिक विवाद..

रामगढ़ रियासत के अंतिम राजा महाराजा कामाख्या नारायण सिंह , इनका रसूख कुछ ऐसा था कि आजादी के बाद के ताकतवर कांग्रेस के लगातार इनके विरुद्ध कैंप करने के बावजूद ये चुनाव (बिहार) जीत जाते थे

1947 में देश आजाद हुआ. सन 1950 में भूमि सुधार एवं राजस्व का सबसे बड़ा कानून जमीदारी उन्मूलन 1950 बना. 1952 में जमीदारी प्रथा समाप्त कर दी गई और गैरमजरूआ जमीन की मालिक राज्य सरकारे हो गई. वही गैरमजरूआ खास व आम जमीन की जमाबंदी भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग द्वारा अंचल पंजी 2 में होने लगी और जमींदारी रसीद के एवज में सरकारी राजस्व रसीद निर्गत होने लगी . नियमगत जमाबंदी के लिए मार्च 1957 तक पहली रसीद हल्का कर्मचारी द्वारा निर्गत ,1965 तक अंचल अधिकारी औऱ इसके बाद एसडीओ या मेंकिसी सक्षम न्यायालय का आदेश और बंदोबस्ती पर्चा की जमाबंदी वैधानिक मापदंड निर्धारित हुआ .

जमीदारी उन्मूलन के बाद रामगढ़ स्टेट द्वारा सरकार को दाखिल नहीं किया गया रिटर्न

जमींदारी प्रथा समाप्त होने के बाद रामगढ़ स्टेट द्वारा बंदोबस्ती की गई जमीन का रिटर्न सरकार को दाखिल नहीं किया जा सका. इस कारण गैरमजरूआ जमीन के स्वामित्व का सही ब्यौरा व आंकड़ा सरकार को उपलब्ध नहीं हो पाया. नतीजतन रामगढ़ स्टेट के ही गैरमजरूआ जमीन पर सबसे अधिक विवाद उत्पन्न हुआ. साथ ही सरकारी बन चुकी गैरमजरूआ जमीन की मनमानी जमाबंदी व लूट खसोट का सिलसिला शुरू हो गया. दबंग
भू माफिया और रसूखदार लोग विशेष रुप से गैरमजरूआ खास जमीन पर अवैध कब्जा जमाते रहे और आज भी कुंडली मारे बैठे हैं. दूसरी ओर 1932 के सर्वे
खतियान और पूर्व राजा व इस के तहसीलदार के हुकुमनामा एवं रसीद के आधार पर अंचल के राजस्व पंजी 2 में गैरमजरूआ जमीन की जमाबंदी होती आई. जिसका बेजा फायदा दबंग भू माफिया रसूखदार लोगों के साथ-साथ अधिकारियों और कर्मचारियों ने उठाना शुरू कर दिया और आज भी उठा रहे हैं . सरकारी गैरमजरूआ जमीन की गलत जमाबंदी दबंग भू माफिया रसूखदार द्वारा अपने व अपने परिजनों के नाम बड़े पैमाने पर कराई गई सरकारी गैरमजरूआ जमीन की जमाबंदी ,अवैध दखल कब्जा और खरीद बिक्री के मामले सामने आने लगा और इसका सिलसिला अभी भी बना हुआ है ,गरमजरूआ जमीन के एक ही खाता प्लॉट व रखवा का दोहरे तिहरे नाम से जमाबंदी व राजस्व रसीद निर्गत होने का भी सनसनीखेज ममला सामने आने लगा है. इसके खिलाफ जब कभी भी प्रशासन ने हाथ डाला तो न्यालीय मुहर नहीं लग पाने के कारण वापस लौटना पड़ा ,जबकि न्यालीय मुहर की दरकार रही व है .

बन चुकी है राजव्यापी समस्या

झारखंड में सकारी गैरमजरूआ जमीन की गलत जमाबंदी , लूट खसोट व खरीद बिक्री का मामला केवल एक दो जिले तक ही सीमित नहीं है ,यह राज्यव्यापी समस्या बनी हुई है. इस गैरकानूनी कारोबार का इतिहास दशकों पुराना है. नाम नहीं छापने की शर्त पर एक अंचल अधिकारी ने बताया कि रैयती जमीन में कोई हेरफेर करने से अधिकारी कर्मचारी परहेज करते हैं किंतु गैरमजरूआ जमीन का मालिक अपने को मानते हैं. सरकारी आदेश के विपरीत बंदोबस्ती पर्चा की भी दूसरे के नाम जमाबंदी खोलने व रसीद काटने से कुछ अधिकारी और कर्मचारी गुरेज नहीं खाते हैं.

कानूनी पाबंदी के बाद भी नहीं रुका लूट खसोट

झारखंड की पिछली एनडीए सरकार ने अगले आदेश तक गैरमजरूआ खास व आम की जमाबंदी और राजस्व रसीद निर्गत करने व खरीद बिक्री पर विशेष अभियान के तहत रोक लगा दी थी ,इसके बावजूद इस गैरकानूनी कारोबार पर लगाम नहीं लग पाया है अंतर इतना है कि जमाबंदी के स्थान पर ऑनलाइन और बिक्री के लिए इकरारनामा का सहारा लिया जा रहा है. हाल फिलहाल ही हंटरगंज में तथाकथित दबंग भू माफिया व रसूखदार लोगों के नाम सैकड़ों एकड़ का हुआ ऑनलाइन और व बजरिये एकरारनामा हजारों एकड़ गैरमजरूआ जमीन की खरीद बिक्री का सनसनीखेज मामला सामने आया है. डीसी एवं एसी ने इसे गंभीरता से लेते हुए इस पर संज्ञान लिया है. संबंधित फाइलें जिला मुख्यालय ले जाई गई है और जांच प्रारंभ कर दी गई है.

क्या हो रही विडंबनाएं

हंटरगंज में सरकारी गैरमजरूआ जमीन की गैरमुनासिब जमाबंदी ऑनलाइन एवं दखल कब्जा व खरीद बिक्री का नतीजा लगातार रफ्तार पकड़ता दंगा ,फसाद ,मारपीट ही नहीं हिंसक वारदात भी हैं. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक थाना में दर्ज हो रहे ऐसे संगीन मामलों में दो तिहाई से अधिक मामले भू भूमि विवाद से जुड़े सामने आ रहे हैं.

क्या है आम प्रतिक्रिया

सरकारी गैरमजरूआ जमीन की गैरकानूनी जमाबंदी , अवैध दखल कब्जा व खरीद बिक्री की रफ्तार यही बनी रही तो अंचल जिला ही नहीं पूरे झारखंड राज्य के लिए भी इसे बड़ा अभिशाप बनना तय माना जा रहा है. अब देखना है कि आगे आगे होता है क्या ?

न्यूज़ रूम: वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो० धीरेंद्र नाथ सिंह

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