सड़कों पर उतर आई लाखों की भीड़.. हर किसी की है जिम्मेदारी; मुश्किल हालात कठिन परिस्थितियां….

दिल्ली की सड़कों पर अचानक से लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूरों की भीड़ जुट गई है. भूखे प्यासे पूरे परिवार के साथ किसी को रोजी रोटी की चिंता किसी को बीमारी की किसी को संक्रमण का. ना लोगों के पास पैसे हैं ना कोई रास्ता दिख रहा है. ना दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सुध ली ना केंद्र सरकार ने, लगातार कागजी और हवा हवाई बयानों के बीच लाखों जिंदगियां संक्रमण विस्फोट के तरफ बढ़ती दिख रही हैं. समय रहते इस भीड़ को अगर मुकम्मल जहां नहीं मिलता इनको आशियाना इनका घर नहीं मिलता.. वह सारा प्रयास जो हर भारतीय पिछले 4 दिनों से लॉक डाउन का सम्मान करते कोरोनावायरस के संक्रमण से जीतने की दिशा में संपूर्ण विश्व को प्रेरित करता दिख रहा था एक झटके में देश के तमाम लोगों और सरकार के उम्मीदों पर पानी फेर देगा.

अभी-अभी टेलीविजन चैनलों पर मीडिया हाउसों में बड़े-बड़े मंत्री नेताओं की हवा हवाई बयान सरकार द्वारा दिए गए करोड़ों रुपए के पैकेज और कागजी प्लान बताया जा रहे हैं.. उन्हें जहां है वहीं रुकने की अपील और संदेश दिया जा रहा है. बयान जितना आसान और सीधा दिखता है जिंदगीया उनके लिए उतनी आसान दिखती नहीं है जो रोड पर अपने बच्चे और परिवार के साथ भटक रहे हैं चूक तो हुई है बहुत बड़ी चाहे जहां से भी हुई.

एक त्वरित व प्रभावी सैन्य अभियान चलाकर लाखों लोगों के खाने-पीने की व्यवस्था हो लोगों को दिलासा व भरोसा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील संजीवनी की काम कर सकती है.

साथ ही यह तेरा घर यानी दिल्ली केजरीवाल सरकार जिन्होंने प्रवासी मजदूरों के बारे में शायद सकारात्मक तरीके से कोई सुध नहीं ली या ये मेरा घर यानी नीतीश कुमार, योगी जी या हेमंत सोरेन जिन्होंने अपने लोगों के बारे में उन्हें वापस लाने की कोई ठोस सकारात्मक पहल नहीं की. समय रहते सरकार केंद्र हो या राज्य सरकार मामले पर संज्ञान लेते हुए गंभीर बन रही परिस्थिति पे ठोस नतीजे पर पहुंचे.

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