शिव भक्त के एन कृष्णा भट्ट, उम्र 86 साल , हर दिन 10 फीट ऊंची शिवलिंग की साफ-सफाई और पूजा अर्चना खुद करते हैं. बताया जाता है कि मंदिर की देखभाल साफ सफाई के लिए साल में उन्हें सिर्फ दो बार पैसे मिलते हैं. मंदिर कर्नाटक के हम्पी में स्थित है. साल 1980 से मंदिर में पूजा अर्चना इन्हीं के द्वारा शुरू की गई. आक्रमणकारियों द्वारा विजयनगर को तबाह कर देने के बाद लगभग 450 सालों तक मंदिर में पूजा-अर्चना नहीं हुई थी.

86 साल के के एन कृष्णा भट्ट अद्भुत हैं; हर दिन उनके लिए वही दिन होता है, यह पुजारी शिवलिंग की पूजा करते है जो दशकों से विश्व प्रसिद्ध हम्पी विरासत स्थल में बदवी लिंग मंदिर के पुजारी हैं. इनकी पूजा थोड़ी अलग है, अविश्वसनीय है, भक्ति से सराबोर है, ना जाने कैसे 10 फुट ऊंची शिवलिंग तक जा पाते हैं, पानी से भरे मंदिर में न मचान है ना कोई साधन शायद भक्ति ही है जो वर्षो शिव की आराधना में लगे पड़े हैं. ऐसा मानना है पानी से भरे मंदिर में आप किसी सीढ़ी मचान या अन्य सहायता का उपयोग नहीं कर सकते


सिक्के फेंकने की है मान्यता

कोई भी भक्त मंदिर में प्रवेश नहीं करता है, जब वे प्रभु का आशीर्वाद चाहते हैं, तो पुजारी मंदिर से पानी उठाता है और उन पर छिड़कता है, मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि अगर शिवलिंग पर फेंके गए सिक्के नीचे के पानी में न गिरकर ढांचे पर आ जाएं, तो भक्त की प्रार्थना का उत्तर मिल जाएगा.

पुजारी के शिवभक्ति के आगे उम्र आड़े नहीं आती

पुजारी के एन कृष्णा भट्ट सुबह से लेकर शाम तक मंदिर में अपना समय बिताते हैं हर दिन की दिनचर्या है उनकी. अधिक उम्र हो जाने की वजह से सुनने में कठिनाई होती है, होठों की गतिविधियों का अवलोकन कर सामने वाले का जवाब देते हैं. कहां जाता है वह 50 साल पहले शहर आए थे, और पिछले तीन-चार दशकों से शिवलिंग की पूजा आराधना कर रहे हैं.


450 सालों तक नहीं हुई कोई पूजा अर्चना..

बदवी लिंग मंदिर

माना जाता है कि मंदिर 15 वीं शताब्दी में एक किसान महिला द्वारा बनाया गया था, हालांकि इसे लेकर लोगों की एक राय नहीं है. मुस्लिम शासकों द्वारा आक्रमण के बाद कम से कम 450 वर्षों के लिए क्षतिग्रस्त मंदिर में कोई पूजा नहीं की गई थी, 1980 के दशक की शुरुआत में मंदिर में पूजा अर्चना शुरू की गई जो वर्तमान समय में मंदिर और पुजारी दोनों भक्तों को आकर्षित करती है.

चित्र/खबर सौ: सोशल मीडिया

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here