कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड 63.57 डॉलर प्रति लीटर के आसपास ,दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 89 रुपए पार

पेट्रोल डीजल की कीमतों में दर्ज हो रही लगातार रिकॉर्ड वृद्धि

पिछले 2 महीने में एलपीजी गैस की कीमत में ₹175 सिलेंडर मे वृद्धि

पेट्रोलियम उत्पाद में बेतहाशा वृद्धि को लेकर सरकार विपक्ष कांग्रेस आमने सामने

भाजपा के वरिष्ठ नेता व थिंक टैंक सुब्रमण्यम स्वामी ने भी कसा तंज ,डीजल पेट्रोल की कीमत में रिकॉर्ड वृद्धि से बिगड़ रहे हालात

भारत में पिछले दिनों से पेट्रोल डीजल की कीमत में रिकार्ड वृद्धि दर्ज हो रही है आज कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड 63 .57 डॉलर प्रति लीटर के आसपास है , देश की राजधानी और सियासत की नगरी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 89 रुपए प्रति लीटर है. यूपीए के दूसरे कार्यकाल 2009 से लेकर 2014 तक क्रूड की कीमत 70 से लेकर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी , तब भी पेट्रोल की कीमत 55 से 80 रुपए प्रति लीटर स्थिर रही क्योंकि उस दौरान टैक्स का बोझ बहुत कम था ,इतना ही नहीं 2 महीने के अंदर आम इस्तेमाल का एलपीजी गैस की कीमत में प्रति सिलेंडर 175 रुपए की वृद्धि हुई . इससे पहले से ही आर्थिक सुस्ती के बोझ के नीचे दबे और आसमान छूती महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को पेट्रोलियम पदार्थ में लगातार हो रहे रिकॉर्ड वृद्धि से और अधिक कठिनाई व मुसीबत से रूबरू होना पड़ रहा है.

रोजमर्रा की जरूरत डीजल पेट्रोल की कीमत में लगातार बढ़ोतरी से सरकार चौतरफा निशाने पर ,फिर भी बेफिक्र आखिर क्यों ?

एनडीए सरकार फिलहाल अपने तीन नए कृषि कानून और पेट्रोल डीजल के दाम में बढ़ोतरी से विपक्ष ,किसान एवं आमजन के निशाने पर बनी हुई है . इसके विरोध में धरना प्रदर्शन रैली का आयोजन रफ्तार पकड़ रहा है. भाजपा के वरिष्ठ दूरदर्शी पारखी स्पष्टवादी राजनेता और थिंक टैंक माने जाने वाले सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट करते हुए इसपर अनोखा तंज कसा है. उन्होंने ट्वीट कर भारत में पेट्रोल रेट की नेपाल और श्रीलंका के पेट्रोल रेट से तुलना की है. उन्‍होंने ट्वीट किया, ‘रावण की लंका में पेट्रोल 51 रुपये प्रति लीटर है सीता जी के नेपाल में पेट्रोल 53 रुपये प्रति लीटर है और श्रीराम के भारत में पेट्रोल 93 रुपये प्रति लीटर है.’ .विपक्ष के कांग्रेस पार्टी ने तीखा वार करते हुए कहा है कि वर्तमान केंद्र सरकार को देश के आमजन के मुश्किलों परेशानियों से कुछ लेना देना नहीं रह गया है और नहीं इनसे सरकार का कोई सरोकार व मतलब ही रह गया है . दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल की कीमत में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर ट्रांसपोर्टर्स ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है . अपील किया है कि इससे इनकी मुश्किलें बढ़ गई है, ऐसे में वाहनों का किराया तेल की कीमतों से लिंक करने या तेल की कीमतों में हो रही रिकार्ड वृद्धि पर अंकुश लगाने की गुहार लगाई है अन्यथा 15 दिनों के अंदर अपने ट्रकों की चाभियाँ जिला कलेक्टरों को सौप देने की बात भी एसोसिएशन ने दोहराई है दूसरी तरफ सरकार बेफिक्र बनी नजर आ रही है , फिलहाल इससे हालात अल्लाह जाने क्या होगा आगे की कहावत चरितार्थ हो रही है .

मूल्य निर्धारण का क्या है तरीका व मापदण्ड और क्या हाल है हकीकत ?

अधिकारिक रूप से पेट्रोल या डीजल की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल से तय होती है यानी जब कच्चे तेल का भाव घटता व बढ़ता है तो पेट्रोल डीजल के दाम को भी सस्ता व महंगा होना चाहिए लेकिन हकीकत में ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है. पिछले एक साल यानी जनवरी 2020 से लेकर अभी तक 2021 के दौरान कच्चे तेल का भाव देखे तो भारत में पेट्रोल डीजल की कीमत में हो रही रिकॉर्ड वृद्धि का हकीकत सामने आ जाएगा . इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 13 फ़ीसदी कम हुई लेकिन घरेलू बाजार में आम लोगों को तेल की कीमत 13 फीसद अधिक देना पड़ा .
कोरोना से पहले यानी जनवरी में एक लीटर कच्चे तेल का भाव करीब 29 रुपए पर टिका रहा . जबकि भारत में आम आदमी को 78 रुपए में पेट्रोल मिल रहा था यानी तकरीबन 3 गुने अधिक दाम पर . जब यह महामारी ज्यादा बढ़ने लगा और लॉकडाउन लग गया तो कच्चे तेल की कीमत घटकर 25 रुपए लीटर हो गई तो घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमत 5 रुपए कम हो गई थी . अप्रैल 2020 में कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट आई और 10 रुपए प्रति लीटर के नजदीक पहुंच गया इसके बावजूद देश में पेट्रोल के दाम कच्चे तेल के मुकाबले 8 गुना अधिक रहा . क्रूड आयल की कीमत इस साल जनवरी में 25 रुपए प्रति लीटर हो गई फिर भी ग्राहकों को पेट्रोल के लिए 87.57 प्रति लीटर की दर से जेब खाली करनी पड़ी . जब क्रूड ऑयल की कीमत 28 .84 रुपए प्रति लीटर से घटकर 14 . 75 प्रति लीटर पर आ गई थी तब सरकार ने पेट्रोल पंप रिकॉर्ड 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपया लीटर के हिसाब से एक्साइज ड्यूटी लगा दी थी. इससे सरकार को 1.6 लाख करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था . इससे साफ जाहिर है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत का सीधा रिश्ता सरकार के टैक्स और कंपनियों एवं रिटेल डीलर्स पे कमीशन से जुड़ा है .

कैसे चलता है पेट्रोलियम उत्पाद का बाजार/ कारोबार

दुनिया भर में 160 किस्म के कच्चे तेल का कारोबार होता है जो उसके घनत्व से लेकर तरलता के स्तर पर निर्भर करता है. कच्चे तेल ब्रेंट क्रूड ओमान क्रूड और दुबई क्रूड से पहचाने जाते हैं भारत अपनी जरूरत का 80 फीसद से अधिक तेल बाहर से आयात करता है. इस आयातित कच्चे तेल ओमान दुबई के भाव से होता है. तेल मार्केटिंग कंपनियां और रिफाईनरीज इस कच्चे तेल को खरीद कर और इसे साफ सुथरा व रिफाइंड करके अलग-अलग पेट्रोलियम पदार्थों पेट्रोल डीजल को देशभर में भेजती है ,.मार्केटिंग कंपनियां 29.71 रुपए के भाव से डीलर को भेजती है इसके बाद केंद्र सरकार हर लीटर पेट्रोल पर 32 .98 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगाती है और एक झटके में पेट्रोल की कीमत पढ़कर ₹70 हो जाती है इसके अलावा हर पेट्रोल पंप डीलर हर लीटर पर 3.69 रुपया का कमीशन जोड़ता है इसके बाद जहां पेट्रोल बेचा जाता है उस राज्य की ओर से 19.95 रुपए बिक्री कर और जुड़ जाता है. इस तरह ग्राहक को कई गुना अधिक दाम पेट्रोल डीजल उपलब्ध हो पाता है , यही है पेट्रोल डीजल की कीमत में लगातार रिकॉर्ड वृद्धि का खेल .

क्या है सरकार की दलील

ग्लोबल मार्केटिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर पेट्रोल डीजल की कीमत में संशोधन करती है ,भारत में कीमतों के इस तरह से तय होने की प्रक्रिया को डायनामिक प्राइसिंग कहते हैं और यह हर रोज तय होती है. सरकार का मूल्य निर्धारण पर कोई नियंत्रण नहीं होता सरकार के मुताबिक पेट्रोल कंपनियां कीमतों को तय करने के लिए स्वतंत्र होती है और सरकार इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करती पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत को तय करने का 118 वां अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है जो दशकों से चली आ रही है. कीमतों को तय करने का तरीका सभी मार्केटिंग कंपनियों ने मिलकर विकसित किया है . कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही पिछले हफ्ते ब्रेंट क्रूड की कीमत ₹360 प्रति बैरल पर पहुंच गया था लॉकडाउन खत्म होते बाजार में उछाल जारी है घरेलू बाजार में पेट्रोल डीजल की कीमत तकरीबन रोज बढ़ रही है . दूसरी तरफ सरकार ने पेट्रोल डीजल पर पहले की तरह फिर से सब्सिडी देने की संभावना से इनकार किया है सरकार का कहना है कि यदि इंधन वाहन के दाम काफी बढ़ जाते हैं और उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ने लगते हैं तो उत्पाद शुल्क में कटौती की जा सकती है.

क्या है अहम सवाल ?


सवाल है कि तेल का भाव बढ़ने से तो चिंता बढ़ जाती है , जब ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़ने से पेट्रोल डीजल की कीमत घरेलू बाजार में बढ़ जाती है तो जब कच्चे तेल की कीमत गिर जाती वह नीचे आ जाती है तो उसका फायदा आम लोगों को पूरा क्यों नहीं मिल पाता है ? दूसरी तरफ पेट्रोल डीजल के प्रति लीटर पर एक्साइज ड्यूटी कंपनी डीलर्स ,पेट्रोल पंप डीलर वैल्यू ऐडेड टैक्स व राज्य बिक्री कर के अनियंत्रित बोझ पेट्रोल डीजल की कीमत में लगातार रिकॉर्ड वृद्धि का बड़ा कारण बना हुआ है . उक्त कमीशन टैक्स में कमी की जाए तो कीमत में कमी आ सकती है व रिकॉर्ड वृद्धि पर नियंत्रण लग सकता है इसका सटीक उदाहरण यूपीए सरकार के कार्यकाल में 2009 से लेकर 2014 तक क्रूड की कीमत 70 से लेकर 110 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी तब भी पेट्रोल की कीमत 55 से लेकर ₹80 के बीच स्थिर बनी रही थी क्योंकि उस वक्त टैक्स बहुत कम था .

क्या है आम प्रतिक्रियाएं ?


रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु डीजल ,पेट्रोल व रसोई गैस लगातार बढ़ती कीमत एक चिंता का विषय है क्योंकि इसके 80 फीसद इस्तेमालकर्ता मध्यम वर्गीय है जिनके आर्थिक स्रोत पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ रहा है. जरूरत की पूर्ति में आर्थिक संकट आड़े आ रहा है लंबी अवधि से बने आर्थिक मंदी व सुस्ती के कारण विशेष कठिनाई हो रही है .. सरकार द्वारा इस पर सहानुभूतिपूर्ण व्यावहारिक स्तर पर जनहित में सकारात्मक विचारण का किया जाना बेहद जरूरी ठहरता है .

न्यूज़ रूम: वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो० धीरेंद्र नाथ सिंह

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