बेरोजगारों को ₹5000 से ₹7000 वार्षिक बेरोजगारी भत्ता

चुनावी वादा पूरा करने का एक और पहल

वर्तमान सरकार को चुनावी वादाखिलाफी नतीजा का है पूर्ण अनुभव व भान


झारखंड की महागठबंधन सरकार अपने चुनावी वादों को जमीनी रूप दिलाने के लिए लगातार कदम दर कदम उठा रही है . राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार वर्तमान महागठबंधन सरकार पूर्व की एनडीए सरकार द्वारा जन सरोकार से जुड़े वादों के प्रति वादाखिलाफी से एनडीए सरकार को हुए उम्मीद के विपरीत नुकसान का बखूबी भान है . जन समूह व सरोकार से जुड़े वादों को पूरा करने की बात दूर वाजिब तरजीह तवज्जो नहीं दे पाने के कारण ही एनडीए सरकार गठन के लिए खासा जन समर्थन के बाद भी जरूरी सदस्य संख्या भी नहीं जुटा पाई थी .. इसके लिए विशेष रुप से जिम्मेदार ठहराया गए एनडीए सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को अपने विधानसभा चुनाव क्षेत्र से पराजय का मुंह देखना पड़ा था . इस लिहाज व सोच में महागठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य द्वारा किए गए चुनावी वादों के प्रति गंभीर व संवेदनशील होना व फूंक फूंक कर कदम उठाना लाजमी ठहरता है .


बेरोजगारी मिटाना सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण चुनावी वादा


वर्तमान महागठबंधन सरकार के समक्ष जन सरोकार से जुड़े अनेक चुनावी वादे हैं इसमें बेरोजगारी का बोझ कम करना सबसे बड़ा चुनौतीपूर्ण वादा है . सरकार के पास पूर्ण रूप से बेरोजगारी मिटाना फिलहाल संभव प्रतीत नहीं है क्योंकि सरकार के अधीन रोजगार के समुचित स्रोत व उपक्रम उपलब्ध नहीं है . फिर भी झारखंड के बेरोजगारों के दुखती रग पर कमोबेश मरहम लगाने की रणनीति के तहत बेरोजगारी भत्ता एक सराहनीय कदम जरूर माना जा सकता है .


बेरोजगारों को 5000 से 7000 रुपया वार्षिक बेरोजगारी भत्ता


महागठबंधन सरकार के मुखिया हेमंत सोरेन ने बेरोजगारों को सहायता राशि देने की घोषणा की थी जहां स्नातक एवं स्नातकोत्तर बेरोजगार नागरिकों को सरकार द्वारा भत्ता प्रदान किया जाएगा , स्नातक पास युवाओं को ₹5000 तथा स्नातकोत्तर पास नागरिकों को ₹7000 का भत्ता दिया जाएगा. एक नागरिक इस योजना का लाभ केवल 2 वर्ष तक ही उठा सकता है. बेरोजगारी भत्ता देने की योजना पर विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली योजना को प्राधिकृत समिति की मंजूरी मिल गई है . योजना प्राधिकृत समिति की स्वीकृति के उपरांत अब इस पर राज्य परिषद की स्वीकृति ली जाएगी . मंत्रिपरिषद की अगली बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा योजना प्राधिकृत समिति ने श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के जिस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है उसके अनुसार तकनीकी शिक्षा प्राप्त बेरोजगारों को इस योजना का लाभ मिलेगा . इसके पहले जन सरोकार से जुड़े पारा शिक्षकों के साथ किए गए बड़ा वादा को भी अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार और शिक्षा मंत्री ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं . टेट पास पारा शिक्षकों को वेतनमान , प्रशिक्षित पारा शिक्षकों के मानदेय में बढ़ोतरी एवं अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को मौका व बेहतर विकल्प देने की वचनबद्धता दोहराई है और सरकार व शिक्षा मंत्री इसे अमलीजामा पहनाने की तैयारी में जुटे बताए जाते हैं , यह जाहिर करता है कि महागठबंधन सरकार चुनाव के दौरान किए गए वादों के प्रति संवेदनशील है और रफ्ता रफ्ता जमीनी रूप देने के प्रयास में जुटी पाई जा रही है , जो सार्वजनिक सरोकार के गलियारे में सराहनीय कदम करार दिया जा रहा है .


क्या है आम प्रतिक्रिया

आम प्रतिक्रिया है कि किसी सरकार को चुनाव के दौरान किए गए वादों के प्रति संवेदनशील और पूरा करने के प्रति हर संभव कोशिश किया जाना वचनबद्धता है . वहीं वादों के आधार पर चुनाव जीतना और सरकार गठन के बाद अपने वादों से मुकरना व तरजीह तवज्जो नहीं देना ही वादाखिलाफी है . वादा है वादों का क्या ? के दिन लद चुके . मतदाताओं की सोच व मत प्रयोग का ट्रेंड अपेक्षाकृत काफी बदल गया है . जनता चुनावी वादे पूरा करने और नहीं करने वाली सरकार व प्रतिनिधियों से हिसाब व लेखा-जोखा लेना जान गई है .. इसका परिणाम भी दृष्टिगोचर होने लगा है .
न्यूजरूम: वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो० धीरेंद्र नाथ सिंह

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