भाजपा विधायक दल के नेता और सूबे का पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 29 मई को पत्र लिखा है ,जिसने मानवीय संवेदना के आधार पर छोटे बड़े उद्योग /व्यापार के लॉक डाउन की अवधि का बिजली बिल में राहत देने का अनुरोधपूर्ण सलाह दिया है . पत्र में इनके मशविरे व अनुरोध का सम्मान करते हुए टाटा मोटर्स को खुलने देने , टाटा मोटर्स समूह से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े उसकी एंसीलरी 1100 छोटे उद्योग को भी खुलने दिए जाने के सकारात्मक पहल व निर्देश जारी करने के प्रति श्री मरांडी ने मुख्यमंत्री सोरेन को आभार प्रकट व धन्यवाद भी ज्ञापित किया है .

लॉकडाउन अवधी की बिजली बिल मे रियायत दिलाने की सलाह ..

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे अपने पत्र में ध्यान आकृष्ट कराया है कि लॉक डाउन की अवधि ( मार्च महीने की एक तिहाई और पूरे अप्रैल -मई) का बकाया बिजली बिल का भुगतान के बाद ही ये छोटे उद्योग खूल व संचालित हो पाएंगे . पत्र में श्री मरांडी ने स्मरण दिलाया है कि केंद्र सरकार की पहल और कोरोना आपदा की वजह से मानवीय मूल्यों का हवाला देकर व कानूनी प्रावधानों का भय दबाव दिखाकर लघु उद्योगों के मजदूरों के पारिश्रमिक का पूरे बकाया राशि का भुगतान भी करा दिया गया है . साथ ही बैंकों द्वारा लघु उद्योगों पर बकाया किस्त के भुगतान के लिए कोई दबाव व तंग नहीं किया जा रहा है . श्री मरांडी ने पत्र में आगे लिखा है कि कोरोना आपदा संकट को देखते हुए लघु उद्योगों को इससे राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एनर्जी का प्रोडक्शन कंपनी ,जेनरेटिंग कंपनी एवं ट्रांसमिशन कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे राज्य की वितरक कंपनियों के विरुद्ध कोई उत्पीड़क कार्रवाई नहीं करेंगे . साथ ही 90 हजार करोड़ रुपए का पैकेज डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के लिए भी घोषित किया है ,जिसमें कुछ हजार करोड़ रूपया झारखंड की वितरक कंपनियों को भी मिलना तयशुदा है .

झारखंड के सभी छोटे उद्योग व्यापार संघ संगठन कर रहे त्राहिमाम ..

सांकेतिक

श्री बाबूलाल ने अपने पत्र में स्मरण दिलाया है कि स्वाभाविक तौर पर अपेक्षा थी कि बड़ी वितरण कंपनियां केंद्र सरकार के इस बड़ी राहत का लाभ उपभोक्ताओं विशेषत: उद्योग व्यापार तक पहुंचाएगी . राहत देने का प्राथमिक और सर्वाधिक सुलभ तरीका उद्योग व्यापार को बिजली का फिक्स्ड चार्ज में राहत देना ही है अधिकांश राज्यों में उद्योग व्यापार को इस कोरोना आपदा में लॉक डाउन अवधि का बिजली के फिक्स्ड चार्ज से मुक्ति दे दी गई है, किंतु झारखंड में अभी तक इस पर चर्चा तक नहीं है .छोटे उद्योग व्यापार के सभी संगठन त्राहिमाम कर रहे हैं ,लेकिन कोई सुन नहीं रहा है . झारखंड सरकार रोजगार मुहैया कराने की बात कर रही एकिजस्टिंग इंडस्ट्रीज , जो अधिक से अधिक रोजगार मुहैया करा सकती है उसकी त्राहिमाम न तो सरकार सुन रही है और ना अधिकारी सुन रहे हैं ,यही सबसे बड़ी विडंबना है.

जानकारी को बता दें बाबूलाल मरांडी ने इससे पहले भी सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा था जिसमें राज्य में संचालित प्राइवेट स्कूलों के विशेष रुप से गरीब जरूरतमंद बच्चों के लॉक डाउन अवधि के शुल्क में राहत व रियायत दिलवाना सुनिश्चित करवाने का आग्रह किया था .

अपरिहार्य कारण से बिजली के फिक्स्ड चार्ज में राहत देने का है प्रावधान..

श्री मरांडी ने सूबे के मुख्यमंत्री श्री सोरेन को लिखे अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इन्हें जानकारी है कि विद्युत कंपनी और उपभोक्ता के बीच में होने वाले करार क्लाउज 13 में प्रावधान है कि यदि किसी अपरिहार्य कारण से उपभोक्ता व उद्योग व्यापार बिजली नहीं ले पाते हैं , तो उन्हें बिजली के फिक्स्ड चार्ज से मुक्ति मिलेगी . हालांकि इसके लिए करार में कोई प्रक्रिया निश्चित नहीं है , लेकिन परंपरा है कि उन्हें रिफंड के प्रोसेस में जाना पड़ता है .यदि ऐसा कोई प्रक्रिया प्रावधान नहीं भी हो या कोई विवाद हो ,तो भी ऐसे आपातकाल में क्या राज्य सरकार इन्हें इनके हाल पर छोड़ देगी , कोई मदद नहीं करेगी ? श्री मरांडी ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि राज्य सरकार ने 10 लाख घर वापस लौटे श्रमिकों को सरकार ने झारखंड में ही रोजगार देने का वादा किया है .इनमें अधिकांश कुशल औद्योगिक श्रमिक है ,जो अन्य राज्यों में लघु उद्योग व्यापार से जुड़कर ही अपना आजीविका पा रहे थे . कोरोना आपदा के कारण राज्य की औद्योगिक व्यापारिक इकाइयों की आर्थिक कमर टूट गई है .ये मृतप्राय हो चुके हैं .ऐसी विषम परिस्थिति में इन्हें बिजली के फिक्स्ड चार्ज से मुक्ति नहीं मिली ,तो इनके लिए यह ताबूत में आखिरी कील साबित होगी .साथ ही राज्य के लाखों श्रमिकों का रोजगार प्राप्ति का सबसे उपयुक्त और सुलभ मार्ग भी बंद हो जाएगा .

पत्र में बाबूलाल मरांडी ने सूबे के मुख्यमंत्री श्री सोरेन से आग्रह किया है कि राज्य और श्रमिक हित में लघु उद्योग व्यापार को बिजली के फिक्स्ड चार्ज से राहत दिलाने के लिए संबंधित संस्थाओं और पदाधिकारियों को निर्देशित किया जाए .साथ ही मुझे बेहद प्रसन्नता होगी यदि कृत कार्रवाई से मुझे भी अवगत कराया गया .

एक सृजनात्मक लोकतांत्रिक पहल..

अमूमन केंद्र व राज्य में सत्ता और विपक्ष का एक दूसरे के प्रति नकारात्मक सोच विचार व भाव की प्रवृत्ति लगातार जोर पकड़ रही है जो देश व राज्य के हित कल्याण व विकास के लिए के लिए किसी भी दृष्टिकोण से हितकर नहीं कहा जा सकता है . ऐसे विपरीत परिवेश में सत्ता और विपक्ष के प्रधानों में राज्य और जनहित में बेहतर समन्वय एवं एक दूसरे के प्रति समझ बूझ , स्वस्थ विचारों का आदान-प्रदान व राय सहमति को स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा का परिचायक नहीं ,तो और क्या संज्ञा दी जा सकती है .

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