बाबूलाल मरांडी का लैंड म्यूटेशन बिल पर दो टूक नहीं होने देंगे पारित

झारखंड में लैंड म्यूटेशन बिल का मुद्दा गरमाया है , सियासत के गलियारे में गोलबंदी चालू है, मानसून सत्र में  उम्मीद थी हेमंत सोरेन वाली महागठबंधन की सरकार बिल को पारित  करेगी. हालांकि मिल रही खबरों के मुताबिक सरकार बढ़ रहे विरोध के बाद कुछ संशोधन के साथ बिल लाने के मूड में हैं फिलहाल  लैंड म्यूटेशन बिल  की चर्चा सरकार इस सत्र में नहीं करेगी .वहीं दूसरी तरफ  विपक्षी पार्टी  भाजपा ने तल्ख तेवर दिखाए हैं विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी कीमत पर  इस काले कानून को पास नहीं होने देंगे. बंधु तिर्की व वामपंथी इस मुद्दे पर  सरकार का साथ देती नजर नहीं आ रही है ,ऐसे में लैंड म्यूटेशन बिल पर  विपक्ष को गोलबंदी करने का मौका मिल चुका है

क्या कह रहे हैं बाबूलाल मरांडी

लैंड म्यूटेशन बिल वाले मुद्दे पर भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कह दिया है कि भाजपा किसी भी तरह से विधानसभा में इसे पारित नहीं होने देगी. बाबूलाल
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध भी किया है कि इस पर चुप्पी साधने और लंबित रखकर कभी गुप-चुप तरीक़े से जल्दीबाज़ी में पास कराने की मंशा का त्याग कर इसे वापस लेने की घोषणा करें.

सभी जिले में भाजपा कार्यकर्ता बिल की प्रति जलाएंगे

बाबूलाल मरांडी का कहना है कैबिनेट से पारित जन विरोधी काला कानून लैंड म्युटेशन बिल को वापस लेने के बारे में झारखंड सरकार ने अबतक कोई आधिकारिक वक्तव्य नहीं दिया है. इस के विरोध में भाजपा कार्यकर्ता आज रविवार को सभी जिलों में बिल की प्रति जलायेंगे.

क्या है लैंड म्यूटेशन बिल 2020 , क्यों बताया इसे काला कानून

जानकारी को बता दें झारखंड सरकार की कैबिनेट ने पिछले दिनों ‘झारखंड लैंड म्यूटेशन एक्ट-2020’ के लिए तैयार बिल को मंजूरी दे दी. मानसून सत्र में बिल को पेश कर कानूनी रूप देने की तैयारी है जो फिलहाल विरोध के बाद टलता नजर आ रहा है . खबरों के मुताबिक इस बिल के अंतर्गत एक प्रावधान किया गया है जहां इस बात का जिक्र है कि राज्य में अब अंचल अधिकारी (सीओ) समेत राजस्व से जुड़े अन्य किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं हो पाएगी या की जा सकेगी क्योंकि किसी भी तरह की गलती के लिए की उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकेगा. बस विपक्ष तो विपक्ष इस बिल के प्रावधान से सरकार में शामिल मंत्री विधायक भी असंतोष दिखाने लगे विरोध जताने लगे मांडर से से विधायक बंधु तिर्की ने इसे काला कानून तक बता दिया.जैसा की आप सबको पता चल ही गया होगा विपक्ष के साथ अब सरकार में लोग भी इस बिल का खुले दिल से समर्थन करते नजर नहीं आ रहे हैं झारखंड सरकार ने वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने भी कहा है इस बिल पर विचार होना चाहिए ,आखिर किस वजह से पूरे राज्य में इसका विरोध हो रहा है ?वहीं, भाकपा माले के विधायक विनोद सिंह ने कहा, ‘आम आदमी के अधिकार का हनन करने वाले प्रावधान को हटा दिया जाना चाहिए.

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