कांग्रेस नेत्री प्रियंका का प्रयागराज में आस्था की डुबकी और जगतगुरु शंकराचार्य का चरण स्पर्श बनेगा हिंदुत्व कार्ड कट्टर हिंदुत्ववादी भाजपा और योगी का बनेगा काट ? क्या हिंदुत्व के इस चप्पू से पार लगेगी कांग्रेस की नैया ?

हिंदुत्व विरोधी छवि से कांग्रेस को भी होते नुकसान का हुआ एहसास

हिंदुत्व विरोधी छवि से विशेष रूप से हिंदी भाषी राज्यों में कांग्रेस को हो रहा भारी नुकसान.

सोची समझी रणनीति के तहत इसके काट के लिए प्रियंका को उतारा गया है मैदान में

भाजपा द्वारा सेक्यूलर हिमायती कांग्रेस को हिंदुत्व विरोधी होने का प्रचार प्रसार का मुहिम जारी है . विशेष रुप से हिंदी भाषी राज्यों में भाजपा इस पर अपना तीक्ष्ण व सटीक निशाना भी साध रही है दृष्टिगोचर व निर्विवाद रूप से इसका प्रभाव व असर हिंदी भाषी राज्यों के चुनावी परिणामों व सत्ता के गलियारे में दिख रहा ,कांग्रेस धीरे-धीरे चुनाव परिणामों में सीमटती जा रही है. सत्ता की कुर्सी भी हाथ से लगातार दूर सरकती जा रही है. दशकों तक देश पर एकछत्र शासन किए राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस को अपने वजूद और मान सम्मान बचाने के लिए छोटी व क्षेत्रीय पार्टियों से मजबूरन समझौता व गठबंधन करना पड़ रहा है. हिंदी भाषी राज्यों में हाथ लगी सत्ता भी हिंदुत्व के गठजोड़ में छूट रहा है.

कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को भी है इसका कड़वा एहसास

हिंदुत्व विरोधी छवि के प्रचार प्रसार से कांग्रेस को हो रहे राजनीतिक चुनावी व सामरिक नुकसान का एहसास पार्टी के शीर्ष कमेटी व नेताओं को भी है. साथ ही यह मसला कांग्रेस कमेटी और शीर्ष नेताओं को शूल की तरह चुभने लगा है और इसकी काट को जरूरी मानते हुए सोची समझी रणनीति के तहत भाजपा की हिंदूवादी छवि की काट में कांग्रेस व देश की आयरन लेडी इंदिरा गांधी से मिलते जुलते चेहरे व तेवर वाली कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी को हिंदुत्व के मैदान में उतारा है .

प्रियंका गांधी ने आस्था की डुबकी के साथ शुरू कर दी हिंदुत्व कार्ड

कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने अपने हिंदुत्व छवि व कार्ड की बुनियाद मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में आस्था की डुबकी और जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का चरण स्पर्श और आशीर्वाद ग्रहण कर डाल दी . इसके एक दिन पूर्व सहारनपुर मे माता शकुंभरी के दर्शन एवं मत्था टेक आशीर्वाद ग्रहण कर चुकी थी ..मौके पर कई अखाड़ों के संत भी मौजूद थे.


हाथरस कांड के समय प्रियंका गांधी दिल्ली के बाल्मीकि मंदिर में जाकर रामधुन भी गा चुकी है . कुंभ मेला में देश के लाखों प्रमुख पीठाधीश्वर आचार्य व संत महात्माओं का दर्शन कर सानिध्य व आशीर्वाद ग्रहण की है ,प्रियंका गांधी ने इस हिंदू कार्ड को ध्यान में रखकर बहुत सावधानी से अपना कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है . कांग्रेस प्रियंका गांधी की हिंदुत्व छवि को धार देने में लगातार कोशिश में जुटी हुई है .असली हिंदू छवि निखारने के लिए कांग्रेस और इसके कार्यकर्ता कार्यकर्ताओं में यह संदेश बिखेरना शुरू कर दिए हैं कि प्रियंका गांधी उतने ही हिंदू हैं ,जितने भाजपा वाले या कोई और . इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के ब्राह्मणों को कांग्रेस से फिर से जोड़ने के लिए अभी से ही उत्तर प्रदेश में ब्राम्हण मुख्यमंत्री का नारा बुलंद किया जाने लगा है .

क्या है बड़ा सवाल

बड़ा सवाल है कि क्या प्रियंका गांधी अपने हिंदुत्व के इस चप्पू के सहारे वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में परिस्थिति अनुकूल कट्टर हिंदुत्ववादी की छवि बनाने वाले भाजपा को मजबूत टक्कर दे पाएगी ? क्या भाजपा जिस तरह हिंदुत्व की राजनीति को धार देकर और कांग्रेस को हिंदू विरोधी बताकर हिंदुओं को गोल बंद कर रही है , प्रियंका गांधी इस चक्रव्यूह को भेद पाएगी ? उत्तर प्रदेश का नेतृत्व कर रहे गौरक्षा पीठाधीश्वर और कट्टर हिंदूवादी मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का विकल्प बन पाएगी ? इसका जवाब फिलहाल समय के गर्भ में है . वक्त ही इसका खुलासा करेगा .

क्या है पक्ष विपक्ष की दलील

कांग्रेस व इसका बड़ा चेहरा नेत्री प्रियंका गांधी के इस हिंदुत्व कार्ड पर पक्ष और विपक्ष की अपनी अपनी दलीलें होना स्वाभाविक है हैं . भाजपा प्रियंका की इस हिंदू आस्था व हिंदुत्ववाद को राजनीति से जोड़कर देख रही हैं. वहीं प्रियंका गांधी के प्रमुख सलाहकार और पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णन ने अमर उजाला से अपने साक्षात्कार में इस पर दलील पेश की है कि भाजपा पूरी साजिश के तहत कांग्रेस को जनता के बीच हिंदुत्व विरोधी के तौर पर पेश करती आ रही है . इससे कुछ लोगों के दिमाग में भ्रम पैदा हो गया है .जबकि देश ने देखा है कि कांग्रेस के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ,इंदिरा गांधी, राजीव गांधी सहित कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी हमेशा हिंदू देवी देवताओं का दर्शन और हिन्दू धर्माचार्यो का आशीर्वाद ग्रहण करते आए हैं . प्रियंका गांधी का गंगा स्नान करना उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रश्न है . इसे अन्य तरीके व नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए . मेरा व्यक्तिगत मानना है कि भाजपा के दुष्प्रचार को खत्म करने के लिए प्रियंका को इस तरह जनता के सामने उतरना जरूरी है निश्चित रूप से इससे भाजपा के दुष्प्रचार से निबटने में मदद मिलेगी . पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णन की उक्ति कहां तक सटीक ठहरेंगी इसका अंदाजा आगामी उपचुनावों एवं वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव के परिणाम से हो जाएगा .

और अंत में..

प्रियंका गांधी के हिंदू कार्ड व कांग्रेस का हिंदुत्व के प्रति बढ़ता रुझान को लेकर मुस्लिम के राजनीतिक और मजहबी आला नेताओं में अलग-अलग सोच व अंकेक्षण है. कुछ इसे मुस्लिम परिप्रेक्ष्य में चिंताजनक ठहरा रहे हैं तो कुछ की दलील है कि कांग्रेस यदि मंदिर की तरफदारी करेगी तो मस्जिद की भी जरूर करेगी , वहीं आमजन की टिप्पणी है कि कांग्रेस को यदि हिंदुत्व की याद आई और प्रियंका गांधी ने आस्था की डुबकी लगाई तो किसी का कुछ क्या कहना .

न्यूज़ रूम : वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो० धीरेंद्र नाथ सिंह

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