निर्भया गैंग रेप मामले में 7 साल के लंबे इंतजार के बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने चारों दोषियों का डेट वारंट जारी कर दिया है, चारों दोषियों को 22 जनवरी सुबह 7:00 बजे फांसी पर लटकाया जायेगा.

16 दिसंबर 2012.. 7 साल पहले

आज से 7 साल पहले तारीख थी 16 दिसंबर 2012 दिल्ली का मुनिरका बस स्टॉप..दिन रविवार, आम दिनों से कम भीड़ भाड़, रात का समय निर्भया और उसका दोस्त बस पर चढ़े.. बस का नंबर था DL IPC 0149. बस में पहले से ही 6 लोग हैवान के रूप में मौजूद थे, उनमें एक नाबालिग भी था. उसके बाद बस में निर्भया के साथ जो हाइवानियत और दरिंदगी हुई सुनकर पूरा देश सन्न हो गया. घटना इतनी निर्मम, बर्बर थी पूरे देश को झकझोर दिया.. सभी में आक्रोश और गुस्सा था. निर्भया के दोस्त को निर्ममता से पीटा गया, फिर दोनों को महिपालपुर में सड़क पर फेंक दिया गया.

क्षत-विक्षत घायल अवस्था में निर्भया को सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, देखने वालों ने उस मंजर को इतना हृदय विदारक बताया की दरिंदगी की इंतहा थी मानो दर्द भी सिसक रही थी. गैंगरेप की घटना इतनी घृणित दर्दनाक और भयंकर थी जिसे फिर से बताया नहीं जा सकता. गंभीर हालात में निर्भया को सिंगापुर के एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया जाता है.. 13 दिन के बाद अपनी जिंदगी हार जाती है निर्भया. एक बेटी का दर्दनाक अंत हो जाता है.

इंसाफ की लड़ाई शुरू होती है पूरे देश एक स्वर में दोषियों की फांसी की सजा की मांग करता है लोग सड़कों पर आ जाते हैं

तारीखें.. 7 साल का इंतजार

17 दिसंबर 2012 गैंगरेप का मुख्य आरोपी राम सिंह को हिरासत में लिया जाता है.

19 दिसंबर 2012.. 5 और आरोपी गिरफ्तार होते हैं आरोपितों में से एक नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड 3 साल की अधिकतम सजा के साथ सुधार केंद्र भेज देता है.

3 जनवरी 2013 साकेत कोर्ट में पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर होती है.

11 मार्च 2013 मुख्य आरोपी रामसिंह तिहाड़ में खुदकुशी कर लेता है.

10 दिसंबर 2013 साकेत कोर्ट में 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जाती है.

ऐसे ही 7 साल तक लगातार साल दर साल नई तारीखें आती रहती हैं, इंसाफ की लड़ाई बदस्तूर जारी रहती है. 7 साल बाद 7 जनवरी 2020 पटियाला हाउस कोर्ट चारों आरोपियों का डेथ वारंट जारी करती है, फांसी पर लटकाने का अंतिम फैसला तारीख तय होती है 22 जनवरी सुबह 7:00 बजे

इंसाफ की लंबी लड़ाई मैं निर्भया के माता-पिता इंसाफ के लिए डट के लड़ते हैं.

न्याय में देरी से पूरे देश में उबाल था. जख्म बहुत गहरा था, जो हर दिन आज भी जिंदा होता है.. कभी हैदराबाद बन कर, कभी रांची बन कर.

बरहाल फैसले के बाद तिहाड़ जेल में चारों आरोपियों को फांसी पर लटकाने की तैयारी पूरी की जा रही है. खबरों के मुताबिक अब क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने के बावजूद भी आरोपियों की राहत की सारी गुंजाइश खत्म हो चुकी है.

तिहाड़ तैयार है, रस्सी तैयार है, तख्ती तैयार है.

निर्भया के माता-पिता

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