नारी प्रधान देश भारत में रेप महामारी , वर्ष 2010 से 2019 के बीच 3,13 ,289 बलात्कार के मामले दर्ज हुए , बलात्कार का खतरा 44 फ़ीसदी तक बढ़ा , हर दिन 88 महिलाओं के साथ होता है बलात्कार , बृहद चौकाउ और डरावना है एनसीआरबी का रेप इवेंट्स रिपोर्ट , जानिए क्या हो रहा है नारी शक्ति प्रभात देश भारत में और क्या है एनसीआरबी का महिलाओं के साथ रेप का रिपोर्ट ?

प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत में रही शक्ति की प्रधानता

आधुनिक व वर्तमान भारत में महिलाओं पर बड़ी बर्बरता क्रूरता

भारत में लगातार पांव पसार रहा महामारी रेप

जिम्मेदार कौन और कैसे ?..

सत्ता और तंत्र का गठजोड़ व राजनीतिक रोटी सेकाई छिड़क रहा जख्मों पर नमक

बलात्कारियों को भी दे रहा खाद था पानी

बिगड़ रहा सामाजिक समरसता व सरोकार

नारी शक्ति के अस्तित्व और अस्मिता की प्रधानता का स्वर्णिम युग रहा है प्राचीन और मध्यकालीन भारत

भारत का प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास गवाह है कि भारत में नारी शक्ति के अस्तित्व अस्मिता की प्रधानता बनी रही. आर्य समाज के लिए यंत्र नारएसतु पूज्यंते तत्र रमन्ते देवताः की मान्यता रही व मूल मंत्र बना रहा. प्राचीन काल त्रेता और द्वापर में नारी की अस्मिता को लेकर दो बड़े महायुद्ध राम बनाम रावण के बीच रामायण और पांडव बनाम कौरव के बीच महाभारत हुए ,जिसमें जीत नारी शक्ति की ही हुई. नारी शक्ति को अमर्यादित व अपमानित करने का दुःसाहस करने वाले रावण और कुरुवंश का समूल विनाश हो गया. आज भी इन महायुद्वयों पर रचित महाग्रंथ रामायण और महाभारत हिंदुओं के घरों में पूजनीय ग्रंथ के रूप में धरोहर बना हुआ है.
दूसरी तरफ मध्यकालीन भारत में भी नारी के अस्तित्व और अस्मिता की प्रधानता अक्षुण्ण बनी रही. नारी की अस्मिता को लेकर कई छोटे-बड़े युद्ध हुए गुलामी के दौर में भी मुगलिया सल्तनत की भी भारतीय नारी शक्ति की मर्यादा और अस्मिता पर कभी आंख उठाने की हिम्मत नहीं हुई कभी जबरन कोशिश का प्रयास भी किया तो इसका भयंकर दुष्परिणाम भुगतना पड़ा कुल मिलाकर भारत के प्राचीन और मध्यकाल नारी शक्ति की प्रधानता का स्वर्णिम युग बना रहा . आर्य समाज की मजबूत किलाबंदी में नारी समाज का अस्तित्व और अस्मिता पूरी तरह महफूज बना रहा यह कोई किंबदंती व लोकोक्ति पर आधारित न होकर पुष्ट प्रमाणों पर आधारित है .

वर्तमान भारत में पश्चिमी रंग में बदल दीया समाज और नारी समाज का स्वरूप

आजाद भारत में आधुनिकता की बयार एवं वैश्विक भूमंडलीकरण का खासा प्रभाव भारतीय समाज व नारी समाज पर पड़ा इसका असर विशेष रुप से देश के महानगरों ,बड़े शहरों ,कस्बों और कालांतर में इसकी आंच कमोबेश गांवों में भी पहुची भारतीय सभ्यता संस्कृति रस्मो रिवाज पर पश्चिमी सभ्यता संस्कृति रस्मो रिवाज का रंग हावी होने लगा ,भारतीय सभ्यता संस्कृति व रस्मो रिवाज छोटे पड़ने लगे पश्चिमी रंग के आगे भारतीय रंग फीका पड़ता गया ,विशेष रुप से युवा पीढ़ी पश्चिमी रंग में तेजी से रंगते चले गए इसके आगे परिवार समाज की मजबूत किलाबंदी भी छोटी पड़ती चली गई और युवा पीढ़ी आजाद ख्याल के होते चले गए. पश्चिमी देशों की तरह फ्री सेक्स विकृति भी बढ़ती चली गई .युवा पीढ़ी के बदन पर भारतीय परिधान के स्थान पर पश्चिमी परिधान सवार होता गया और बदन पर कपड़े भी लगातार छोटे होते चले गए ,अर्धनग्न अवस्था से कामुकता की झलक बिखरने लगी और कामुकता परवान चढ़ता गया नतीजा सामने है सेक्स उत्तेजना में विशेष रूप से महानगरों नजरों में बलात्कार व बर्बरतापूर्ण सामूहिक बलात्कार की घटनाएं जोर पकड़ती चली गयी और कालांतर में रेप महामारी का शक्ल अख्तियार कर लिया जो यह देश के लिए बड़ा भारी अभिशाप व काला कलंक साबित हो रहा है. वर्तमान में यह महामारी का रूप अख्तियार कर चुका है . सेक्स के मामले में आजाद ख्याल पश्चिमी देश भी भारत में घटित हो रहे रेप व क्रूरतापूर्ण गैंगरेप इवेंट से हैरत व सक्ते में हैं देशवासियों की पीड़ा का तो कोई इंतहां ही नही है .

बेहद चौकाऊ और डरावना है रेप और गैंगरेप इवेंट्स का रिपोर्ट डाटा

भारतीय नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो(एनसीबीआर )के मुताबिक़ भारत में बलात्कार और बर्बरता क्रूरतापूर्ण सामूहिक बलात्कार का रिपोर्ट डाटा न सिर्फ बेहद चौंकाने वाला ,भयावह और डराने वाला है बल्कि घोर चिंता में डालने वाला अवसादग्रस्त है जो हर हिंदुस्तानी के मन मस्तिष्क को झकझोर व हथोड़े बरसाने के लिए भी पर्याप्त है . एनसीआरबी के रिपोर्ट डाटा के मुताबिक 5 साल पहले वर्ष 2015 में रेप के 34651 मामले दर्ज हुए , हर दिन बलात्कार के 88 मामले, हर 15 .2 मिनट में एक महिला के साथ बलात्कार हुआ. हर 3.8 दिन में पुलिस कस्टडी में एक महिला के साथ रेप हुआ. पुलिस कस्टडी में कुल 95 महिलाओं का रेप हुआ ( जिसमें 4 गैंगरेप शामिल ) हर 4 घंटे में एक गैंगरेप की वारदात हुई कुल 2113 गैंगरेप के वारदात हुए ( पुलिस कस्टडी में हुए 4 गैंगरेप के अलावा ) हर 2 घंटे में एक बलात्कार का असफल प्रयास हुआ इस तरह पूरे वर्ष में 4,437 बलात्कार का असफल प्रयास प्हुआ .

भारत में रेप महामारी

वर्ष 2019 में देश में 33 हजार से अधिक महिलाओं का रेप हुआ जिसमें आधे से अधिक मामले पांच राज्यों क्रमशः राजस्थान ,मध्य प्रदेश ,उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र ,केरल से आए. एनसीबीआर के आंकड़ों के मुताबिक बीते 10 वर्ष में रेप की संख्या में 31% बढ़ोतरी हुई पिछले साल हर दिन रेप के 88 मामले सामने आये इस तरह वर्षों में कुल 32 ,035 रेप के मामले दर्ज हुए इसमें यूपी में 3 ,0655 रेप क मामले सामने आए ( इसमें 11 फ़ीसदी पीड़ित दलित समुदाय के ) एनसीबीआर के स्त्रोत के मुताबिक हर दिन 10दलित महिला था रेप होता है . दलित समुदाय के 3500 महिलाओं का रेप हुआ इसमें एक तिहाई मामले राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सामने आए . एनसीबीआर स्त्रोत के मुताबिक 2010 से 2019 के बीच रेप के 3,13 , 289 मामले दर्ज हुए रेप रेट 30 फीसदी और बलात्कार का खतरा 44 फ़ीसदी तक बढ़ गया है .

रेप महामारी के लिए जिम्मेवार कौन ?

नारी शक्ति प्रधान देश भारत में महामारी का शक्ल अख्तियार करता बलात्कार व बर्बरता व क्रूरतापूर्ण सामूहिक बलात्कार ( हिंसक गैंगरेप ) के पीछे जिम्मेवार व जवाबदेह कौन और क्यों ? केवल एक अहम सवाल ही नहीं गंभीर चिंता सोच व आत्ममंथन का विषय भी है . कानूनी तौर पर संगीन सामाजिक अपराधों के प्रति सरकार और शासन प्रशासन को ही जिम्मेवार व जवाबदेह ठहराया गया है व ठहराया भी जा रहा है ., किंतु केवल सरकार और सरकारी तंत्र को ही इसके लिए अकेला जिम्मेवार व जवाबदेह ठहराया जाना व्यावहारिक दृष्टिकोण से उचित व विचारसम्मत प्रतीत नहीं होता इसके लिए परिवार समाज भी कम जिम्मेवार व जवाबदेह नहीं ठहरता , कहा जाए तो समान रूप से ठहरता है . दृष्टिगोचर व परिस्थितिजन्य हालात के आधार पर बलात्कार की बेहिसाब बढ़ती घटनाओं के लिए विशेष रुप से युवा पीढ़ी में परवान चढ़ती विकृत सेक्सुयल ऐपेटाइट की मानसिकता ,अंध कामुकता , राक्षसी हिंसक प्रवृत्ति दरिंदगी व बहशीपन और इसके पीछे सबसे बड़ा कारण हावी पश्चिमी सभ्यता संस्कृति रस्मो रिवाज व आबोहवा का दुष्प्रभाव धनलोलुपता व अधिक से अधिक टीआरपी के चक्कर मे वालीवुड द्वारा फिल्मों में परोसी जा रही नग्नता ,अशिष्टता कामुकता अल्हगपन फुहड़पन , अश्लीलता ओपन सेक्स की ब्लू अपराध फिल्में का गहरे छाप का अमिट प्रभाव. लगातार दरकती व कमजोर पड़ती पारिवारिक सामाजिक अनुशासन , खुद की इच्छा चाहत अनुसार जीवन शैली अपनाने गुजारने की खुली छूट व आजादी युवा पीढ़ी को मनमौजी ,सेक्स मनोरोगी , दुःसाहसी जुनूनी और दुष्चरित्र बना रहा है. प्रशासन पुलिस की इस जघन्य घृणित संगीन सामाजिक अपराध के प्रति उदासीन नजरअंदाज व संवेदना हीन रवैया इस दुष्चलन अपराधवृत्ति को खाद पानी दे रहा है .अपराधियों को मिलते राजनीतिक प्रशासनिक संरक्षण इनके हौसला मनोबल को बढ़ा रहा हैं और गति व जोर पकड़ते संगीन सामाजिक अपराध बलात्कार व क्रूरतापूर्ण गैंगरेप के पीछे बड़ा कारण बना हुआ है .

क्या है बड़ी विडम्बनाएं ?..

बलात्कारियों की बेइंतहां सेक्स भूख ,अंधी कामुकता, हिंसक कामोत्तेजना और क्रूरता बर्बरता सारी हदें लांघ रहा है. बलात्कार की प्रलयकारी महामारी का संक्रमण सार्वजनिक गलियारे से फैलते फैलते राजनीतिक प्रशासनिक और धार्मिक गलियारों में भी पांव पसार चुका है. इससे कई जानेमाने राजनीतिक , धार्मिक व प्रशासनिक शख्सियत भी संक्रमित हो चुके हैं. इनके दुष्कर्मों से जुड़े कई हैरतअंगेज व सनसनीखेज सेक्स से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं और आना जारी है कई जेल के सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं . रेप मिस्ट्री की भयावहता का आलम है कि दरिंदे सेक्स के मामले में शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह अबोध मासूम बच्चियों को भी नहीं बख्श रहे हैं ,तनिक भी रहम नहीं खा रहे हैं दरिंदे दरिंदगी की सारी हदें लांघते जा रहे हैं. दूसरी तरफ समाज के रहवर साख बचाने की नीति और नियत के तहत सरकार और सरकारी तंत्र में अनैतिक गठजोड़ से सिस्टम पूरी तरह प्रभावित हो रहा है कार्रवाई और इंसाफ पर भी सवालिया निशान लग रहा है सिस्टम भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है वही क्रेडिट बटोरने की रणनीति में राजनीतिक रोटी सेकने के कार्य से पीड़ित परिवार व समुदाय समाज के जख्मों पर मरहम पट्टी लगने के बजाए नमक छिड़कने का कार्य अधिक हो रहा है. दोहरे कार्रवाई से इंसाफ भटक जा रहा है वहीं अपराधियों का हौसला मनोबल आसमान छू रहा है, दूसरी तरफ पीड़ित परिवार ही नहीं आम लोगों का भी सरकार और सरकारी तंत्र एवं राजनेताओं से विश्वास भरोसा लगातार दरकता रहा है , आंदोलन दंगा फसाद से आमजन समाज और राष्ट्र को भी भारी क्षति पहुंच रही है सामाजिक समरसता भ्रातृत्व भी आहत जो रहा है. देशवासियों में सिस्टम के खिलाफ आक्रोश ,उबाल बढ़ रहा है. न्यायालय को स्वत संज्ञान लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है सबसे बड़ी विडंबना है कि नारी शक्ति प्रधान भारत की बदनामी व छवि देश में ही नहीं विदेशी में भी बिगड़ रही है . गैंगरेप के विरुद्ध कड़े कानून बनने और फांसी की सजा का प्रावधान होने के बावजूद यह जघन्य अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा 2012 निर्भया गैंगरेप कांड के अपराधियों को फांसी की सजा के बावजूद रेप की बर्बरता थमता नजर नहीं आ रहा ,आखिर इससे बड़ी भयानक खौफनाक व असहय पीड़ादायक त्रास्दी लोकतांत्रिक भारत के लिए और क्या हो सकती है ..जहां हर 15 मिनट पर एक बलात्कार की घटना होती है.

क्या है आम प्रतिक्रिया ?

प्रलयकारी विनाशकारी महामारी संक्रमण का रूप लेता रेप व हिंसक गैंगरेप पर आम जनों का आक्रोशपूर्व प्रतिक्रिया सामने आई है कि बलात्कारी दरिंदो की बेइंतहा दरिंदगी से नारी समाज में भारी असुरक्षा का भाव उत्पन्न होना स्वाभाविक व लाजमी ठहरता है ,घर से बाहर निकली बहू बेटियां में आशंका बनी रहती है कि वे सुरक्षित घर लौट पाते हैं व नहीं.. परिजन चिंता में डूबे उनके सुरक्षित घर वापसी का बांट जोहोते रहते हैं. देश कहां जा रहा है और समाज और राष्ट्र के पहरु क्या कर रहे हैं , यह यक्ष सवाल आम मन मस्तिष्क पर हथौड़े बरसा रहा है दरिंदो की दरिंदगी के आगे कानून और सिस्टम छोटा पड़ रहा है न् समाज सुधार कर रहा है. नारी समाज खौफनाक चिंता में डूबी हुई है. न्याय की देवी सिसकियों ले रही है और चिंता की बात है कि माननीय न्यायालय को ही इससे बड़ी विधायिका और कार्यपालिका के दायित्व जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है स्वता संज्ञान लेना पड़ रहा है इससे बड़ी चिंता की और दुखद बात और क्या हो सकती है ? समय रहते सरकार ,शासन ,प्रशासन ,समाज के पहरुओं जनप्रतिनिधियों राजनेताओं की कुम्भकर्णी नींद नहीं टूटी ,तो देशवासियों का सब्र का बांध टूट पड़ेगा ,समाज व आम लोगों को नारी अस्मिता की रक्षा के लिए दरिंदों के खिलाफ स्वयं हथियार उठाने व कानून को हाथ में लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. तब शायद कोई रोक भी नहीं पाएगा और इसकी सारी जिम्मेवारी व जवाबदेही सरकार ,शासन प्रशासन, राजनेताओं ,जनप्रतिनिधियों व समाज राष्ट्र की सुरक्षा की ठेकेदारी लिए पहरुओं को ही होगी .

वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो0 धीरेंद्र नाथ सिंह

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here