दिव्यांग भी कर सकते हैं चमत्कार बशर्ते उन्हें स्नेह ,प्यार और मौका मिले ,हौसला आफजाई हो

दृष्टिबाधित बोकारो के नव पदस्थापित उपायुक्त राजेश कुमार सिंह पेश कर रहे हैं अनोखी मिसाल

बचपन में ही क्रिकेट खेलने के दौरान 6 वर्ष की आयु में घटी घटना में आंखों की रोशनी को खो चुके थे महज 10 फ़ीसदी आंखों की रोशनी बची है.

तमाम अड़चनों चुनौतियों व उलझनो के बावजूद पटना के धनरूआ निवासी अपने हौसले, हिम्मत व कभी हार ना मानने वाले प्रतिबद्धता की वजह से देश के सबसे प्रतिष्ठित सेवा के लिए 2007 के आईएएस बैच में चयनित हुए एवं भारत के पहले दृष्टिबाधित उपायुक्त भी

जिले की जनता की समस्याओं से रूबरू होते हुए
शारीरिक व्याधियों से जूझ रहे लोगों को डिजेबल्ड न कहकर डिफ्रेंटली एबल्ड कहना ज्यादा ज्यादा युक्तिसंगत व व्यवहारिक ठहरता है .तयशुदा है कि इन्हें इनके आंतरिक शक्ति का अहसास दिलाया जाय और शारीरिक रूप से पूर्ण संतान की तरह इन्हें भी समान स्नेह और मौका दिया जाय व हौसला आफजाई किया जाय ,तो इन्हें आम से खास बनना करीब करीब निश्चित है .ऐसे कई उदाहरण सामने आ भी चुका है और नए उदाहरण लगातार सामने आ रहे हैं . इसके जीवंत उदाहरण में नामचीन वैज्ञानिक व खगोलविद स्टीफन हॉकिंग , भारतीय पारा ओलिम्पियन देवेंद्र झांझारिया , धावक आहुकर पिस्टोरियस , लेखिका हेलेन केलर आदि लंबी फेहरिश्त है ,वर्तमान अनुकरणीय उदाहरण झारखंड के बोकारो जिला के नवपदस्थापित उपायुक्त दिव्यांग आईएएस राजेश सिंह है .इन अजीम शख्सियतों ने दिव्यांगता व विकलांगता को अपनी कमजोरी व अभिशाप के रूप में नहो चुनौती के रूप में स्वीकार किया और इतिहास रचा . आज ये अपने उतकृष्ट कार्यों के लिए याद किये जाते है .

130 करोड़ की आबादी में 2 करोड़ दिव्यांग ( विकलांग)

बड़ी बिडम्बना है कि रूढ़िवादी परिवार शारीरिक व्याधियों से जुड़े दिव्यांगता , विकलांगता को प्राकृतिक अभिशाप व ईश्वरीय देन मान लेते हैं और उसका जीवन मरण ,हित अहित और भविष्य को ईश्वर के भरोसे मान बैठते है रूढ़ीवादी लोग तो यह भी कहने से गुरेज नहीं खाते की शारीरिक व्याधियां पूर्व जन्म की कमाई होती है. जैसी करनी वैसी भरणी सृष्टि का विधान है .इनका जन्म कठिनाइयां सहने के लिए ही हुआ है . नतीजतन शारीरिक व्याधियों से जुड़े लोग उपेक्षा व उपहास का पात्र बन जाते हैं या कहिए बना दिये जाते है और कुंठित भी हो जाते हैं .विरले परिवार ही शारीरिक व्याधिग्रस्त दिव्यांग विकलांग संतान को अपने स्वस्थ संतान के समान स्नेह , प्यार ,सहानुभूति ,स्थान महत्व प्रदान करते हैं और उनके जीवन को तराशने निखारने का हर मौका ही देते हैं व हौसला आफजाई भी भी करते हैं . इसका परिणाम भी नकारात्मक फलदायी व पभावोत्पादक होता व हो रहा है , जिन दिव्यांग व विकलांग को यह सुअवसर व सौभाग्य प्राप्त नहीं होता है . उनका ही जीवन परिवार की बात दूर खुद के लिए बड़ा बोझ बन जाता है .नतीजा है कि ये स्व केंद्रित जीवन शैली अपना लेते है .गुमनामी में चले जाते है .एकाकीपन इनके जीवन का मुख्य हिस्सा बन जाता हैं . आंकड़े के मोताबिक भारत के 130 करोड़ की आवादी में शारीरिक व्याधियों से जूझ रहे लोगों की आबादी दो करोड़ हैं . इसमें अंगुली पर गिनती के लोगों को छोड़ दिव्यांग विकलांग उपेक्षा उपहास की वजह से स्व केंद्रित जीवन शैली अपना लिए है , उपहास उपेक्षा ,हिकारत ने उनमें अरुचिकर भावना पैदा कर दिया है और गुमनाम बने रहने के लिए मजबूर हो व कर दिए गए हैं .

विश्व की अपेक्षा भारत में स्थिति दयनीय

विश्व में कई देशों के अपेक्षाकृत भारतीय दिव्यांगों विकलांगो की स्थिति दयनीय है विश्व में इन के लिए बीमा की व्यवस्था है जिससे इनको जरूरी सुविधाएं मिल जाती हैं. वहीं भारत में महज विकलांगता पेंशन का प्रावधान किया गया है राजधानी दिल्ली में 15 सो रुपए राज्यों में अलग-अलग कही 400 तो किसी राज्य में 500 सौ रुपए पेंशन राशि देय है ,जो औपचारिकता निर्वाहन नहीं तो और क्या संज्ञा दी जा सकती है. स्पष्ठ रूप से यह दिव्यांगों विकलांग के प्रति सरकार की उपेक्षापूर्ण रवैया को दर्शाती है .

झारखंड सरकार ने किया है एक अद्भुत प्रयोग

राजेश कुमार सिंह की बोकारो उपायुक्त के पदभार लेने के दौरान की तस्वीर

झारखंड सरकार ने पहली बार एक दिव्यांग आईएएस को किसी जिले की कमान सॉप कर एक मिसाल प्रस्तुत ही नहीं एक अद्भुत प्रयोग भी किया है . इसके पीछे मुख्य मकसद एक दिव्यांग जिले की कमान को नहीं संभाल सकता जैसे किंबदंती व मिथक को तोड़ना व अव्यावहारिक साबित करना है . स्वभाव से दृढ़ निश्चयी और कृत संकल्पित व दृढ़ इच्छाशक्ति और एकलब्य निश्चय के व्यक्तित्व इस्पात नगरी बोकारो जिला के नव पदस्थापित उपायुक्त राजेश कुमार सिंह ने भी इसे जीवन की सबसे बड़ी व अहम चुनौती के रूप में स्वीकार किया है , उनका तो स्पष्ट मानना ही नहीं दावा भी है कि कर्तव्य दायित्व व जिम्मेदारियों बखूबी निर्वहन व लक्ष्य प्राप्ति के लिए दृष्टि नहीं सटीक दृष्टिकोण की जरूरत होती है. जिसका इनमें अभाव नहीं है इन्हें अपने सटीक दृष्टिकोण और आत्मनिर्भरता पर पूरा भरोसा है देश के बदौलत इन्होंने यह सब हासिल किया है और भविष्य में भी सब कुछ हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध ,कृत संकल्पित है . इनका चेहरा , भाव , भंगिमा ,ओजस्वी स्वर संकेत दे रहा है कि ये खुद भी सूबे की सरकार के विश्वास ,भरोसे व अपेक्षाओं की कसौटी पर खरा उतरने के प्रति पूर्ण रूप से आश्वस्त व उम्मीद से लबरेज हैं .

दैनिक खबर परिवार की ढेर सारी शुभकामनाएं : दिव्यांगता को मात देकर अपने भागीरथ तपस्या और एकलब्यी निश्चय सहित आंतरिक सटीक दृष्टिकोण के बदौलत हासिल किए अमूल्य धरोहर को दैनिक खबर परिवार शत शत नमन करता है और शुभकामनाएं भी देता है . साथ ही ईश्वर से जीवन के हर क्षेत्र में इनकी असीम सफ़लता के लिए मंगलकामना भी करता है.

News@ वरिष्ठ पत्रकार सह स्तंभकार प्रो0 धीरेंद्र नाथ सिंह, न्यूजरूम दैनिक खबर

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