झारखंड की राजनीति में हर दिन नए आयाम जुड़ते जा रहे है , विवादों को खूब जगह मिल रही है कयासों को खूब हवा दी जा रही है, पुराने मुर्दे कब्रगाह से निकाले जा रहे हैं. कभी दुबे जी ताल ठोकते नजर आते हैं तो कभी राज्य के मुखिया सोरेन साहब दुबे जी को नसीहत देते दिख जाते हैं. इन सबके बीच जनता भी दो गुटों में बट जाती है. नजारा कुछ बॉक्सिंग मैच के जैसा होता है एक बाउट हमारा दूसरा तुम्हारा. बाकी संसाधन तो है ही लीपापोती करने के लिए समय पड़ने पर कर दी जाएगी बाकी मनोरंजन के साधन उपलब्ध रहेंगे
कोरोना संक्रमण की चपेट में तकरीबन पूरा राज्य है बावजूद आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चरम पर है. हालात बद से बदतर होते आंखों के सामने दिख रहे हैं झारखंड हाई कोर्ट लगाम कसने की हिदायतें  झारखंड सरकार को देती रही है. अब यह तो राजनीति है साहब कब कितना सुनना है कब कितना करना है यह तो अपनी मनमर्जी है सरकार जो हमारी है. हर हालात में नुकसान जनता का ही है, हां उसी जनता का जिसे संज्ञा दी जाती है गरीब, शोषित, पीड़ित, वंचित की. मजाल है इनके हालात टस से मस भी हुए हो. 20 साल से वही टैग लिए घूम रहे हैं . याद दिलवा दें बहुत जल्द इन सब की फिर जरूरत पड़ने वाली है झारखंड में 2 सीटों के लिए उप चुनाव होने वाले हैं , 20 साल से उम्मीद की राह जोट रहे फिर से किसी उम्मीदवार की किस्मत की फैसला करते दिखेंगे,  लेकिन अफसोस इनके भाग्योदय को लेकर राजनीति में कोई लकीर ही नहीं है.
विधानसभा भवन में गिरी हुई सीलिंग
बात भाग्योदय की की है तो सीलिंग का आना जरूरी है, जिसे लेकर तमाम तरह के एहसास दिलवाये जा रहे हैं अब उन्नति और समृद्धि का नया  साम्राज्य होगा 2020 के झारखंड में विकास ही विकास होगा. झारखंड विधानसभा का नया स्वरूप , ताज  ए झारखंड विशालकाय भवन ,नाक के रूप में झारखंड की प्राण प्रतिष्ठा बन जाता है, जहां तकरीबन निर्माण में 475 करोड रुपए खर्च कर दिया जाते हैं . खूबसूरती से कत्लेआम पूरे देश में हो जाते  हैं, पर अफसोस तमाम तकरीरें  खोखली बन जाती  हैं ,आजकल हो हल्ला इसी बात का है 1 साल भी नहीं हुआ खूबसूरत भव्य भवन से सीलिंग  गिर जाती है  . अब चुकी यह भाजपा के कार्यकाल में बना है तो जो घटित हो रहा है  राजनीति की स्वाभाविक प्रक्रिया है, आपाधापी, खींचातानी महा गठबंधन सरकार द्वारा जबरदस्त हल्ला बोल पूर्व की भाजपा सरकार सरकार रघुवर दास पर कर दिया गया है. जनता को हमेशा की तरह एक और बॉक्सिंग मैच का मुशायरा नसीब हो रहा है, ऐसा लग रहा है प्रतिद्वंदी की नब्ज पकड़ी गई हो. लेकिन भूलिए मत सियासत की तो अपनी ही चाल होती हैं , जनता को दिखाने जताने और बताने का प्रयत्न जारी है और जहां तक सवाल कुछ करने की मंशा का है. हमारी और आपकी राय  पूर्वतः बरकरार रहेगी ,ढाक के तीन पात मन बहलाइए गंभीर मुद्रा में मत आइए,  वैसे भी भी संवेदक के पास रखरखाव की 1 साल की अवधि बरकरार है तो गिर कर भी कुछ नहीं होने वाला , वैसे भी गिरकर उठने वाले ही झारखंड की तकदीर बनाएंगे.
अब लोग हैं कहां मानने वाले हैं राज्य की सबसे बड़ी पंचायत की साख पर बट्टा लगा है, सीलिंग टूटी है. गहरी सांसे लीजिए अब थोड़ा यह सोचिए कि वह ठेकेदार कितना आश्वस्त रहा होगा की विधानसभा में भी गुंजाइश निकाल ली. बाकी आप समझदार हैं आपके आसपास हर जगह संभावनाओं की गुंजाइश बरकरार है कहीं कुछ भी गिर सकता है. खैर यह तो सीलिंग ही फॉल्स थी जो गिरी. पिछले 20 वर्षों में वो वादे इरादे, संसाधन जुटाने,  सुविधा बढ़ाने, रोजगार दिलाने के बहाने सत्ता में आने जाने की कहानियां फॉलस नहीं है , समझिए, समझाइए, सोचिए और खूब सोचिए.. डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है  बस एक सीलिंग ही तो गिरी है.

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