झारखंड में अपनी मांगों को लेकर सतत संघर्षशील व आंदोलनरत पारा शिक्षकों के प्रति शिक्षा मंत्री और सरकार के ताजा आश्वासन से पारा शिक्षकों में जगी नई आशा उम्मीद व विश्वास भरोसे की किरण मिली संजीवन बूटी ..

पारा शिक्षक समुदाय शिक्षा मंत्री और सरकार के प्रति अलापने लगे फिल्मी राग इन्हें और क्या दें हम दिल के सिवा , इनको हमारी उमर लग जाए

रघुवर दास को भारी पड़ी थी पारा शिक्षकों की नाराजगी

यह कोई लुकी छिपी बात नही रह गई है कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत पारा शिक्षकों के प्रति झारखंड के तत्कालीन भाजपा ( एनडीए सरकार ) के मुखिया रघुवर दास की उपेक्षापूर्ण कठोर व्यवहार व रवैया केवल रघुवर दास के लिए ही नही भाजपा के लिए भी 2019 विधानसभा चुनाव में काफी नुकसानदेय साबित हुआ था .इसका भारी खामियाजा भी भुगतना पड़ा था .सत्ता हाथ से खिसक गई थी.

महागठबन की सहानभूति चुनाव में लाई थी रंग

अपनी मांगों को लेकर संघर्षरत व आंदोलनरत पारा शिक्षकों का महागठबंधन का नैतिक समर्थन और सरकार बनने पर मांगो को पूरा करने का वादा रंग लाई और सरकार बनाने के जरूरी संख्या बल जुटाने में पारा शिक्षकों और इनके परिवारों व सगे संबंधियों के वोटों का निर्णायक योगदान रहा था.महागठबंधन की सरकार भी बनी.

अब महागठबंधन सरकार की बारी का है इंतजार

विदित तौर पर अपनी मांगों को लेकर पारा शिक्षक समुदाय को महागठबंधन सरकार से विशेष उम्मीद रखना व पालना लाजमी व स्वभाविक ठहरता है , क्योंकि चुनाव में उसने ततसम्बंधी वादा जो किया था.

शुरू से ही पारा शिक्षकों की मांगों के प्रति सम्बेदनशील दिखी महागठबंधन सरकार

महागठबंधन की सरकार बनने के बाद सरकार विशेष रुप से शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री पारा शिक्षकों की मांग के प्रति संवेदनशील दिखे. शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो विशेष रूप से ध्यानस्थ व लगनशील बने दिखे. मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन भी सकारात्मक भूमिका निभाते दिखे ,पहल की शुरुआत भी जल्द कर दी गई. उच्च स्तरीय कमिटी की बैठक बुलाकर पारा शिक्षकों की मांग पर व्यापक चर्चा और रायशुमारी हुई. उच्च स्तरीय कमिटी को मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया गया.कमिटी ने टेट उतीर्ण ,प्रशिक्षित पारा शिक्षकों और गैरटेट उत्तीर्ण और अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों के लिए नीति निर्धारण का मसौदा तैयार कर सरकार को सुपुर्द कर दिया. सरकार के निर्णय का पहिया गति पकड़ा.पारा शिक्षकों का अपनी मांगों के जमीनी रूप लेने के प्रति उम्मीदें भी बढ़ी. सरकार व शिक्षा मंत्री की तत्सम्बन्धी घोषणा अखबारों की हेडलाइन भी बनी.

शिक्षा मंत्री के कोरोना ग्रषित होने से सुस्त पड़ गई थी रफ्तार ..

शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो के कोरोना ग्रसित और लंबी अवधि तक गहन इलाज में बने रहने के कारण पारा शिक्षकों का मुद्दा सुस्त पड़ गया था. इस पर चर्चा भी करीब-करीब ठप पड़ गई थी. पारा शिक्षक समुदाय का महागठबंधन सरकार के प्रति विश्वास भरोसा में सेंध लगने लगा था. सरकार की चुप्पी से पारा शिक्षक समुदाय अपनी मांगों को लेकर सरकार मेरा बड़ा वादा पूरा करो के तहत 10 फरवरी को मुख्यमंत्री आवास घेराव की तैयारी किए हुए थे. इसी बीच शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो लंबी अवधि से चेन्नई में इलाजरत गंभीर स्वास्थ्य अवस्था से सामान्य हो रहे थे. शिक्षा मंत्री ने अभी हाल में ही आश्वस्त किया कि सरकार पारा शिक्षकों की मांग के प्रति आज भी पूरी तरह संवेदनशील है. टेट उतीर्ण पारा शिक्षकों को वेतनमान और प्रशिक्षित पारा शिक्षकों का मानदेय बढ़ाया जाएगा. शेष पारा शिक्षकों के लिए भो बेहतर व्यवस्था होगी. शिक्षा मंत्री ने आग्रह किया कि बजट सत्र तक वादा पूरा करो की मांग के तहत 10 फरवरी को निर्धारित मुख्यमंत्री आवास का घेराव कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित रखा जाए .पारा शिक्षक मोर्चा ने शिक्षा मंत्री के आश्वासन पर तत्काल बजट सत्र तक मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम स्थगित कर दिया . शिक्षा मंत्री के आश्वासन से पारा शिक्षकों में प्रसन्नता स्वभाविक ठहरता है. साथ ही इन्हें और क्या दे हम कृतज्ञता के सिवाय शिक्षा मंत्री और महागठबंधन सरकार को हमारी उमर लग जाए का राग अलापना लाज़मी ठहरता है. सार्वजनिक गलियारे में चल रही चर्चा के मुताबिक महागठबंधन सरकार अपने वादे पूरा करने में सफल रही तो पारा शिक्षकों इनके परिवार और नाते रिश्तेदार का वोट बैंक तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री जगरनाथ मिश्रा के शिक्षक वोट बैंक की तरह सुरक्षित बन जायेगा ,अन्यथा पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और एनडीए सरकार की तरह ही महागठबंधन सरकार को भी पारा शिक्षक समुदाय ,उनके परिवार और नाते रिश्तेदारों की नाराजगी व कोपभाजन भी बनना तय है. फिलहाल तो पारा शिक्षक समुदाय को उक्त फिल्मी राग इन्हें और क्या दें हम दिल के सिवा , इनको हमारी उमर लग जाए अलापने में बुराई ही क्या है ?

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