हेमंत सोरेन सरकार के 45 दिन बीतने के बाद भाजपा सोमवार को अपने विधायक दल के नेता के नाम एलान करने वाली है.

24 फरवरी को रांची में विधायक दल के नेता के चुनाव की बैठक होने वाली है जिसमें राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और पी. मुरलीधर राव हिस्सा लेंगे. संभावनाएं प्रबल हैं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ही नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में होंगे. सूत्रों की माने तो बाबूलाल जी का नाम सबसे आगे है. इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता चाहे विधायक दल का नेता जो भी बने ..झारखंड की राजनीति में भाजपा के संदर्भ में बाबूलाल की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है..

यह तस्वीर आने वाले दिनों में झारखंड में बाबूलाल मरांडी की बनने वाली भूमिका को दर्शाता है..

2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा रणनीतिक प्रयास मे मात खा गए, सत्ता से बेदखल होना पड़ा. झारखंड की राजनीति खासकर भाजपा में कोई बड़े आदिवासी चेहरे की चाह में थी.

’14 साल बाद भाजपा घर वापसी करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी झारखंड की राजनीति में एक मजबूत कड़ी बन सकते हैं, भाजपा तो शायद ऐसा ही सोचती है.

29 दिसंबर 2019 को हेमंत सोरेन की सरकार बनी तब से ही भाजपा ने विधायक दल के नेता का चुनाव नहीं किया था. 17 फरवरी को जैसे ही बाबूलाल मरांडी ने अपने पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का भाजपा में विलय किया.. राष्ट्रीय मुख्यालय से राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव को विधायक दल की बैठक के लिए पर्यवेक्षक बना दिया गया. बने हालात तो इसी बात के संकेत हैं भाजपा ने बाबूलाल मरांडी के इंतजार में विधायक दल के नेता का चुनाव टाल रखा था.

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने आईएएनएस से कहा नेता प्रतिपक्ष के तौर पर बाबूलाल मरांडी के नाम पर मुहर लगने की उम्मीद है. या फिर रणनीति के तहत यह जिम्मेदारी किसी अन्य के पास भी जा सकती है वही बाबूलाल जी प्रदेश अध्यक्ष या फिर राष्ट्रीय टीम में भी शामिल किए जा सकते हैं.

24 फरवरी को दोपहर 12 बजे से रांची प्रदेश कार्यालय पर भाजपा विधायक दल की बैठक होगी जहां भाजपा के सारे विधायक शामिल होंगे विधायक दल के नेता चुनने के बाद प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए दावेदार चेहरों पर भी चर्चा होनी है

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