बिहार में मुठभेड़ में मारा गया माओवादी जोनल कमांडर संतोष यादव उर्फ गुलशन उर्फ रवि जी उर्फ आलोक जी 14 वर्ष की उम्र में ही थाम लिया था माओवादी उग्रवादी संगठन और हथियार का दामन , इसके पीछे हत्या के एक केस में फसा देना और घर में ताला भी जड़ देना बना था अहम कारण , जानिए जोनल कमांडर आलोक का नक्सली इतिहास

मुठभेड़ में झारखंड बिहार पुलिस के साथ ही कोबरा बटालियन एसटीएफ और सीआरपीएफ के जवान भी शामिल थे

कौन था बिहार पुलिस मुठभेड़ में मारा गया माओवादी जोनल कमांडर आलोक ?..

झारखंड के चतरा जिला अंतर्गत सदर (चतरा )थाना के सुदूरवर्ती एवं जंगल पहाड़ से घिरा सिकिद सिनवारी गांव का निवासी था. ऑपरेशन में झारखंड-बिहार पुलिस के साथ कोबरा बटालियन , एसटीएफ और सीआरपीएफ के जवान शामिल थे . सुरक्षाबलों से हुए मुठभेड़ में माओवादी ( एमसीसी ) जोनल कमांडर आलोक ढेर हो गया. वह एक साधारण मेहनतकश परिवार का सदस्य था .

कैसे थामा माओवादी संगठन का दामन और उठाया हथियार ?

सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2002 जून महीने में उसके ही गांव के त्रिलोकी जाधव की हत्या कर दी गई थी. जिसमें 14 वर्षीय संतोष यादव वर्तमान माओवादी जोनल कमांडर आलोक को नामजद मुजरिम बना दिया गया था और उसके गांव स्थित घर में ताला जड़ दिया गया था . सामाजिक प्रताड़ना और जुल्म से आक्रोशित उद्वेलित होकर उसने मुख्यधारा को त्याग उग्रवाद का रास्ता अपना लिया था और तत्कालीन उग्रवादी संगठन एमसीसी की संरक्षण ले ली थी . प्रतिशोध में हथियार उठा लिया था . इस दौर में तत्कालीन एकीकृत बिहार में एमसीसी उग्रवादी संगठन की तूती बोलती थी , संगठन में शामिल होने के बाद समय-समय पर उसका नाम बदल दिया जाता रहा .एक बार उग्रवाद के दलदल में उलझ जाने के बाद संतोष यादव वर्तमान माओवादी जोनल कमांडर आलोक को पीछे मुड़कर देखने का कभी मौका नहीं मिला या कहिए उसने कभी इसके लिए कोई इच्छा जाहिर व यत्न ही नहीं किया , भले ही पुलिस मुठभेड़ में उसे अपनी जान ही क्यों नहीं गवानी पड़ी .कहा जाता है कि जोनल कमांडर आलोक जी ने अपने गांव के समीप और एनएच 99 के किनारे अवस्थित भुइयांडीह में अपना मकान भी बनवाया था ,जिसे टीएसपीसी उग्रवादी संगठन द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था इसके प्रतिशोध में आलोक जी और ज्यादा आक्रामक और प्रतिशोध की ज्वाला में धधक उठा था .

संगठन में मिलती गई तरक्की दर तरक्की

सूत्रों को माने तो अपनी हिम्मत ,साहस ,जुनून जज्बात और रण कौशल के बदौलत संतोष यादव उर्फ आलोक जी संगठन का खास भरोसेमंद विश्वासपात्र व चहेता बन गया , जो भी जिम्मेदारियां संगठन द्वारा उसे सौंपी गई उसने उसको बखूबी पूरा करता गया और संगठन का अहम हिस्सा बन गया . तरक्की का मोहताज नहीं रहा . संगठन में उसका रुतवा लगातार बढ़ता गया और तरक्की दर तरक्की भी मिलती गई . पदोन्नति के साथ उसका नाम भी बदल दिया जाता रहा .कम समय में ही उसकी व्यक्तिगत खूबियों व काबिलियत के कारण संगठन ने उसको अहम पद जोनल कमांडर बना दिया था .

चतरा का कौलेश्वरी जोन माओवादी उग्रवादी संगठन का है रेड गलियारा

एमसीसी उग्रवादी संगठन के प्रादुर्भाव काल से ही चतरा जिला का कौलेश्वरी प्रक्षेत्र संगठन का अपना खास जोन ही नही लाल गलियारा (रेड कार्पेट एरिया ) बना हुआ है . नदी नालों जंगल पहाड़ से आच्छादित यह भाग माओवादी संगठन के सुरक्षित शरण स्थली होने के साथ-साथ आवागमन और हथियारों के खेत लाने के लिए सुरक्षित मार्ग माना जाता है . इधर कुछ दशक से एमसीसी संगठन के कमजोर पड़ने पर टीएसपीसी उग्रवादी संगठन इस पर हावी हो रहा था ,जो माओवादी उग्रवादी संगठन को कतई रास नहीं आ रहा था और सूत्रों अरे मुताबिक संगठन के लिए यह बड़ी चिंता का विषय आज भी बना हुआ है .

जोनल कमांडर आलोक को कौलेश्वरी को सुरक्षित रखने की सौंपी गई थी जिम्मेवारी

सूत्र बताते है कि संगठन ने कुछ समय पूर्व ही कौलेश्वरी जोन पर माओवादी संगठन का आधिपत्य व वर्चस्व बरकरार बनाए रखने की जिम्मेवारी जोनल कमांडर आलोक को भी सौंपी गई थी . माओवादी उग्रवादी संगठन ने कौलेश्वरी जोन क्षेत्र के अंतर्गत झारखंड के चतरा जिला के अलावे बिहार राज्य का भी कुछ भूभाग व क्षेत्र को भी सीमांकित कर रखा है . जोनल कमांडर आलोक इस अभियान में जुटा हुआ था और बिहार के गया और झारखंड के चतरा पुलिस के समक्ष चुनौती पेश कर था . दोनों राज्यों की पुलिस पीछे पड़ी थी . संयुक्त छापामारी तलाशी अभियान भी चला रही थी .चूहा बिल्ली का खेल जारी था. कई बार आमना सामना होते होते बच गया . बिहार के बाराचट्टी थाना क्षेत्र में शनिवार की रात बिहार झारखंड सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम और माओवादी उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हो गयी ,कई माओवादी उग्रवादी मारे . जिसमें जोनल कमांडर संतोष यादव उर्फ गुलशन उर्फ रवि उर्फ आलोक के साथ-साथ जयराम यादव वीरेंद्र यादव के भी मुठभेड़ में मारे जाने की अधिकारिक पुष्टि हुई है . शवों का पोस्टमार्टम बिहार के मगध मेडिकल कॉलेज गया में कराया गया है चतरा एसपी ऋषभ कुमार ने भी अपने ध्यान में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया माओवादी जोनल कमांडर संतोष यादव उर्फ आलोक को चतरा जिला का निवासी होने और चतरा जिला के विभिन्न थानों में एक दर्जन से ऊपर नक्सली मामले दर्ज होने की पुष्टि की है.

न्यूज़:वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार प्रो0 धीरेंद्र नाथ सिंह

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here