समय रहते झारखंड में पांव पसारता ड्रग्स के कारोबार पर नहीं लगा लगाम ,तो मच सकता है तबाही का तूफान , झारखंड कर रहा पुकार जल्द जागे सरकार शासन प्रशासन ,नही तो कहीं देर ना हो जाए , जानिए झारखंड में बढ़ते ड्रग्स कारोबार का भयावह मंजर

झारखंड में लगातार पांव पसार रहे ड्रग्स व शराब माफिया

झारखंड के वनभूमि पर हो रही अफीम के लिए पोस्ते की अवैध खेती

रफ्तार पकड़ रहा शराब का अवैध निर्यात और ड्रग्स का आयात

बरामद होते ड्रग्स दे रहा तबाही का खौफनाक संकेत

भारत के अन्य प्रांतों में झारखंड की हो रही भारी बदनामी और बिगड़ रहा सामाजिक हालात

परिवार समाज की बात दूर प्रदेश व देश को खोखला करने के लिए काफी है ड्रग्स कारोबार

वक्त और हालात गवाह है कि सुरा और सुंदरी ने कई साम्राज्य को खंडहर में तब्दील करवा दिया इसके पीछे एक मात्र कारण राजा का राज्य और प्रजा की चिंता ध्यान का त्याग , सुरा और सुंदरी के आगोश में डूब जाना रहा. ड्रग्स की चाहत में कई को देशद्रोही बना दिया और नशा की चाहत की दीवानगी ने उन्हें राष्ट्र विरोधी कार्य करने पर मजबूर कर दिया. जिस परिवार व समाज में ड्रग्स ने अपना ठिकाना बना लिया वह परिवार और समाज हाशिए पर चला गया. कर्ज के बोझ के नीचे दबकर पीस गया. यह सर्वविदित और प्रमाणिक है कि ड्रग्स का इस्तेमाल व कारोबार हमेशा नकारात्मक व विध्वंसक प्रभावोत्पादक साबित होता रहा है.

प्रकृति और धरती पुत्रो का राज्य झारखंड राज्य में लगातार पांव पसार रहा ड्रग्स का कारोबार

कल तक कोयला आदि खनिज पदार्थ व वन संपदा के अवैध कारोबार से झारखंड अभी उबर भी नहीं पाया है और ड्रग्स कारोबार ने झारखंड में अपना सनसनीख़ेज़ आहट दे दिया है और लगातार अपना पाव भी पसारने लगा है . ड्रग्स का कारोबार और इस्तेमाल कितना विनाशकारी है इसका ताजातरीन उदाहरण मुंबई की माया नगरी बॉलीवुड सामने है. प्रकृति और धरती पुत्रों का प्रदेश झारखंड में मानवीय खतरा ड्रग्स का इस्तेमाल और कारोबार का संभावित भयावह दुष्परिणाम का एहसास मात्र ही घबराहट उत्पन्न कर देती है ,रूह कपा देती है . गौरतलब है कि मानवीय जीवन के लिए नासूर ड्रग्स मुंबई के धन कुबेर माया नगरी बॉलीवुड की जड़े हिला सकती है तो झारखंड की बात ही क्या करनी है ? गरीब गुरबों मेहनतकश की धरती ..

दशकों से झारखंड के वन क्षेत्र में हो रही अफीम की खेती

ऐसे भी झारखंड में दशकों से अफीम तस्कर सक्रिय हैं और बड़े पैमाने पर अफीम की तस्करी झारखंड क्षेत्र के अलावे अन्य राज्यों में करते जा रहे हैं. चतरा , पलामू एवं वन आच्छादित जिलों के वन क्षेत्र मे हजारों हेक्टेयर वन भूमि पर अफीम के लिए पोस्ते की खेती हर साल लहलहाती है. उसका शक व रस निकाल कर करोड़ों का अफीम का कच्चा माल तैयार कर अंतर प्रांतों के तस्करों को भेजा जा रहा है . नशीला पदार्थ पोस्ता के डोडा की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है . युवा पीढ़ी को नशेड़ी बनाया जा रहा है , उनका अपराधीकरण किया जा रहा है बाहरी तस्करों और अपराधियों कि झारखंड में सक्रियता बढ़ रही है ,इससे क्षेत्र में अपराध का ग्राफ तेजी से ऊंचाई पकड़ रहा है अफीम के लती अफीम के लिए अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा उड़ा दे रहे हैं अपराध कर रहे हैं , इससे क्षेत्रीय शांति व विधि व्यवस्था और सामाजिक माहौल प्रभावित हो रहा है .

देसी और अंग्रेजी शराब की तस्करी का हब बना हुआ है झारखंड

झारखंड से देसी अंग्रेजी शराब और टैक्स फ्री महुआ फल की तस्करी दशाको से पांव जमाए हुई हैं. टैक्स फ्री महुआ फल बाहरी राज्यों से आयात कर ऊंचे मुनाफे पर तस्करी बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित बिहार राज्य में की जा रही है. झारखंड की छवि बिहार राज्य में धूमिल हो रही है बड़ी बदनामी भी फैल रही है. झारखंड की स्थिति खेत खाए गधा और मार खाय जोरहा की बनी हुई है. बिहार के शराब माफिया अपराधी भी झारखंड का रुख किए हुए हैं और स्थानीय कारोबारियों वह अपराधियों के सांठगांठ में इस काले धंधे को अंजाम दे रहे हैं .जब से बिहार राज्य में शराबबंदी का कानून लागू हुआ है स्थानीय और बाहरी शराब कारोबारियों की बांछे हुई है पौ बारह बना हुआ है.

मानव जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा ड्रग्स भी पांव पसार रहा है

कल तक करीब-करीब ड्रग्स के कारोबार से अछूता झारखंड में राज्य के अमन चैन और मानव सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा ड्रग्स ने भी झारखंड में अपना सनसनीखेज व हैरत में डालने वाली दस्तक दे दिया है. इसका खुलासा भी 25 सितंबर को राजधानी रांची के रातू मोहल्ले के एक घर से बरामद 250 कार्टून में पैक एक करोड़ से ऊपर कीमत का ड्रग्स मिश्रित जानलेवा नशीली दवा पेटोजेसिन की दस हजार बोतलों की बरामदगी और इसमें संलिप्त तस्करों की गिरफ्तारी और कड़ी पुलिसिया पूछताछ में उनके द्वारा उगले बयानों से हो चुका है. गिरफ्तार ड्रग्स तस्करों के बयान और बड़े पैमाने पर बरामद अफीम ड्रग मिश्रित दवा ने न केवल पुलिस नारकोटिक्स कंट्रोल कर्मियों की नींद व चैन उड़ा दिया है बल्कि सरकार और शासन प्रशासन का भी कान खड़ा कर दिया है क्योंकि बरामद दर्द मिश्रित दवा पेंटोजिसेंन का झारखंड में कोई अधिकृत सप्लायर है और ना स्टॉकिस्ट ही साथ ही इसका इस्तेमाल नहीं के बराबर ही होता है .

इसका ओवरडोज जान लेने के लिए है काफी

डॉक्टरों की राय में बरामद अफीम ड्रग मिश्रित पेटोजेसिन एक नशीली दवा होती है इसका इस्तेमाल रेयर केस में होता है .क्रॉनिक दमा आदि बीमारियों में भी रेयर ही इस्तेमाल होता है . इसका डोज निर्धारित होता है लगातार सेवन एडिक्शन बन जाता है और ओवरडोज हमेशा जानलेवा साबित होता व होता आ रहा है . प्रमुख रूप से यह नसे के लिए ही होता है नारकोटिक्स कंट्रोल विशेषज्ञ की भी इससे मिलती जुलती राय है .

लाख बंदिशों के बाद भी तस्करों के नहीं थम रहे कदम

ऐसी भी बात नहीं के ड्रग्स और शराब तस्करों के रोकथाम के मामले में प्रशासन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं , व्यापक स्तर पर छापामारी अभियान संचालित है , लगातार अफीम आदि की बरामदगी और तस्करों की गिरफ्तारी कर पुलिस तस्करों व कारोबारियों को भारी आर्थिक शारीरिक चोट पहुंचा रही है. दर्जनों तस्कर जेल के सलाखों के पीछे कैद हैं न्यायालय भी सख़्ती बरत रही है ,फिर भी इनका कदम थमने का नाम नहीं ले रहा है जो यक्ष प्रश्न बना हुआ है इसके पीछे कारण भी करीब-करीब साफ दृष्टिगोचर है मुख्य कारण भ्रष्ट और धन लोलुप सरकारी कर्मियों ,जनप्रतिनिधियों व सफेपोशों का अप्रत्यक्ष और विशेष रूप से उग्रवादी संगठनों का मिलता प्रत्यक्ष सहयोग समर्थन व संरक्षण बना हुआ है. बड़ी विडंबना है कि वनभूमि पर अफीम हेतु हो रही पोस्ता की खेती के मामले में चाहे कारण जो भी हो वन विभाग की भौतिकी स्थिति निहत्थे योद्धा की बनी हुई है दूसरी बड़ी विडंबना इस गैरकानूनी कारोबार से मुख्यधारा से भटके व उग्रवादियों को मिल रहा बड़ी लेवी बना हुआ है . साथ ही भ्रष्ट एवं धनलोलुप कर्मियों द्वारा तस्कर विरोधी अभियान की समुचित सफलता में अटकाया जा रहा रोड़ा बना हुआ है.

क्या है आम अवधारणा व दावा

आम अवधारणा है कि जब तक इन कानून विरोधी तत्वों पर पूर्ण लगाम नहीं लगेगा झारखंड की धरती को तस्करी मुक्त बनाने की मुहिम में रोड़ा अटकता रहेगा व अराजक तत्वों द्वारा भारी रोड़ा अटकाया जाता रहेगा. अभियान की पूर्ण सफलता के लिए सबसे पहली जरूरत है कानून व इंसानियत की खाल ओढ़े भ्रष्ट एवं धनलोलुप सरकारी और समाज के ढोंगी व कानून व समाज विरोधी सफेदपोशों अराजक जनप्रतिनिधियों व तत्वों पर कड़ी लगाम कसना जरूरी है ,इनके जड़मूल सफाया हो जाने पर इस काले धंधे व धंधेवाजो पर खुद ब खुद पूर्ण विराम लग जायेगा व सफाया हो जाएगा या झारखंड की धरती को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा , साथ साथ आम दावा है कि यह टास्क झारखंड सरकार के ईमानदार कर्तव्य परायण और कानून प्रिय मशीनरी के लिए कोई टेढ़ी खीर भी नहीं है जरूरत है सिर्फ और सिर्फ दृढ़ इच्छाशक्ति निश्चय संकल्प और लगन की.

वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो0 धीरेंद्र नाथ सिंह

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