7 साल के लंबे कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार निर्भया के गुनाहगारों को 20 मार्च शुक्रवार सुबह 5:30 तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया…

चारों गुनाहगार पवन, मुकेश, अक्षय, और विनय को फांसी के तख्ते से झुलाने वाले उसके आखरी अंजाम तक पहुंचाने वाले जल्लाद का नाम है पवन जल्लाद

पवन जल्लाद देश के पहले ऐसे जल्लाद बन गए हैं जिन्होंने एक साथ चार दोषियों को फांसी के फंदे से लटकाया… इससे पहले पवन के दादा कल्लू जल्लाद और पिता मामू जल्लाद के नाम ही दो दो आरोपियों को फांसी पर लटकाने का रिकॉर्ड था.

फांसी पर लटकाने के बाद पवन जल्लाद ने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताया, जानते हैं आखिरकार पवन जल्लाद ने क्या बताया

पवन जल्लाद ने बताया …. जिस वक्त यह मैं कार्य करने जा रहा था, मेरे मन में चल रहा था आज मैं अपने मकसद में कामयाब हो जाऊंगा.. उन दरिंदों को ऐसी जगह पहुंचा दूंगा जहां उन्हें पहुंचना चाहिए था क्योंकि उन्होंने निर्भया के साथ ऐसी घिनौनी हरकत की है कि किसी का भी दिल दहल जाए और मैंने यह सोचा इन दरिंदो को उनके अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लूंगा .

पवन जल्लाद ने देशवासियों को चेताया और एक संदेश भी दे डाला

पवन जल्लाद बोला…. 130 करोड़ों भारतवर्षीय जो भी ऐसा कांड करेंगे पहले सोचेंगे सौ बार सोचेंगे जो भी ऐसी दरिंदगी करेगा वह एक बार सोचेगा ऐसी दरिंदगी की सजा फांसी है. नारी का सम्मान कीजिए, बहन बेटियों का सम्मान कीजिए

17, 18, 19 तीन दिनों तक जेल में ही रहे पवन वन जल्लाद

किसी भी गलती की गुंजाइश को खत्म करने के लिए पवन जल्लाद तिहाड़ जेल में 3 दिनों तक ड्रिल करते रहे तीन बार फांसी का ट्रायल किया और फिर वही रस्सी से चारों दोषियों को फांसी से लटका दीया.

तिहाड़ तैयार थी, रस्सी तैयार थी और तख्ती भी, समय 3:30

पवन जल्लाद ने बताया 3 बजकर 30 मिनट पर वह फांसी घर पहुंच गया, फिर वहां रस्सी, तख्ती और लीवर चेक किया. 4:30 पर रस्सी और फंदा लगा दिया, अधिकारी भी आने लगे.

समय 5:10, चारों गुनाहगारों को लाया गया… 5:10 से 5:30 जल्लाद की जुबानी; लड़खड़ाते कदम और कांपते शरीर….

पवन जल्लाद ने बताया… अब सुबह के 5 बज कर 10 मिनट हुए थे, दो दो गुनाहगारों को अलग अलग लाया गया… मौत को इतने करीब देखकर दोषियों के पैर लड़खड़ा रहे थे, शरीर कांप रहा था… फांसी के लिए 2 तख्ते तैयार किए गए थे पहले तख्ते पर दो दूसरे पर दो. पुलिस जवान, अधिकारी, डॉक्टर और मजिस्ट्रेट मौजूद थे, संख्या 20, 25 के आसपास थी, दोषियों को तख्ते पर खड़ा किया पैर बांधे, गले में फंदा लगाया समय 5 बजकर 25 मिनट हो चुके थे… 5 मिनट बचे थे, कोई बात नहीं कर रहा था. दोनों लीवर को चेक किया.

आखरी के 1 मिनट

1 मिनट बचे थे, जेलर का इशारा मिलते ही लीवर खींच लिया. 20 सेकंड के अंतराल पर दोनों लीवर खींच दिया . चारों आरोपी अब फांसी के फंदे से झूल रहे थे. ठीक 5 बजकर 30 मिनट ना 1 सेकंड इधर ना 1 सेकंड उधर. चारों लटक रहे थे 5 मिनट के अंदर चारों शांत हो गया ठंडे पड़ गए.

ये बाते पवन जल्लाद ने एक चैनल पर बताइ..

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