अनुच्छेद 370 हटने के एक साल में दिखा खासा असर

जाने एक साल में आतंक की कैसे टूटी कमर

आतंकी गतिविधियों में 36 फीसद कि आई कमी

सर्वे भवंतू सुखिनाह सर्वे भवंतु निरामया का माहौल बहाल करने के लिए अग्रिम योजनाएं / एजेंडा तैयार की है

क्या है अनुच्छेद 370 ?

धारा 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद व धारा है यह धारा जम्मू कश्मीर में लागू रहने से इस राज्य को भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार व दर्जा दी गई थी. भारतीय संविधान में
संक्रमणकालीनऔर विशेष उपबंध संबंधी संविधान की धारा 21 का अनुच्छेद 370 भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप में तैयार किया गया था.

संविधान की धारा 21 का अनुच्छेद है 370

उस वक्त कश्मीर के मौजूदा हालात में कश्मीर राज्य को भारत में विलय करने का सही वक्त नहीं था, इसे देखते हुए संघीय संविधान सभा ने गोपाल स्वामी आयंगर ने धारा 306 ए का प्रारूप प्रस्तुत किया था जो बाद में अनुच्छेद 370 बन गई और इसी आधार पर जम्मू कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों में पृथक स्वायत्तता व विशेष अधिकार मिला था .

राजा हरिश्चंद्र ने रखा था कश्मीर के भारत में विलय का प्रस्ताव

देश आजाद होने के बाद छोटी छोटी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल किया गया था जब जम्मू कश्मीर को भारतीय संघ में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई , तभी पाकिस्तान समर्थित कबीलाइयो ने वहां आक्रमण कर दिया कश्मीर के तत्कालीन राजा हरि सिंह ने ही कश्मीर के भारत में विलय का प्रस्ताव रखा था.

धारा 370 हटाने के लिए भारतीय राजनीति में होता रहा विवाद / उठापटक

धारा 370 को जम्मू कश्मीर राज्य से हटाने के लिए आजादी मिलने के बाद से लेकर अब तक जम्मू कश्मीर और विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 हमेशा विवादों अखाड़े में बनी थी. इस बात को लेकर भारतीय राजनीति में उठापटक भी होती रही कई राजनीतिक दल विशेष जम्मू कश्मीर में अलगाववाद के लिए इसे जिम्मेवार ठहराते रहे. वक्त बेवक्त इसे हटाने की मांग की उठते रहे अंत में केंद्र सरकार यानी एनडीए गठबंधन वाली भाजपा सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर में धारा 370 को समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया और जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटा दिया गया यद्यपि सरकार को इस पर काफी विरोध झेलना पड़ा किंतु सरकार अपने फैसले परअडिग अटल बनी रही.

धारा 370 हटने से पहले का कश्मीर

जम्मू कश्मीर में धारा 370 लागू रहने तक कश्मीर उपद्रवियों, अलगाववादियों और आतंकवादियों का केंद्र बना रहा पाकिस्तान की दखलअंदाजी सिर चढ़कर बोलता रहा पाकिस्तान के अलगाववादी आतंकवादी और आईएसआई अपना अघोषित कुशासन चलाते रहे उल्टा पल्टा फ़रमान जारी करते रहे .जम्मू कश्मीर को पाकिस्तान में विलय को लेकर आतंकवादी अलगाववादी व आईएसआई , जम्मू कश्मीर में भय और आतंक का माहौल बनाए रखा ,जंग खूनखराबा रोजमर्रे का विषय बना रहा. गोली ग्रेनेड व बम असलहों के धमाकों से कश्मीर की वादियां व घाटियां गूँजतीं रहीं जिसका निशाना सुरक्षाबलों के जवान और निर्दोष हिंदु मुस्लिम बनते रहें. मुस्लिम युवाओं को जिहाद के नाम पर भटका , गुमराह व भारत विरोधी चिंगारी भरकर पत्थरबाज और आतंकी बनाते रहे, कश्मीर में उथल-पुथल मचाते रहे वजह चाहे जो भी रहा हो राज्य की करीब-करीब सरकारें मूकदर्शक या तमाशबीन बनी रहीं हालात लगातार बद से बदतर होता चला गया पाकिस्तान अपनी कूटनीति व प्रपंच रूपी हथकंडे का इस्तेमाल करता रहा ,भारत को अशांत करता रहा जम्मू कश्मीर और आतंकवाद का मामला कई बार विश्व पटल पर भी छाया , किंतु आतंकवादी अलगाववादी आईएसआई और इन उपद्रवी विध्वंसकारी तत्वों के कदम नहीं थमे इसके पोषक संरक्षक पाकिस्तान और इसकी सेना अपनी हरकतों से बाज नहीं आयी . पाकिस्तानी हुक्मरान और उसकी सेना अपनी थोथी दलीलें बघारती रही, सच तो यह है कि भारत का ह्रदय और अनमोल विरासत जम्मू कश्मीर भारत के लिए ही कांटो का सेज बना रहा क्योंकि पाकिस्तान और इसके घोषित संरक्षित उपद्रवी तत्व कश्मीर में लागू धारा 370 का जमकर बेजा फायदा उठाता रहा

धारा 370 हटने के बाद का कश्मीर ,आतंकवादी गतिविधि में आई करीब 36 फीसद की कमी

केंद्र के ऐतिहासिक फैसले के तहत 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटा दिया गया इसे हटाए एक वर्ष अवधि भी पूरी हो गई जम्मू कश्मीर में तेजी से हालात बदले शांति व्यवस्था और अमन चैन के लिए बना सबसे बड़ा सिरदर्द आतंकवाद ,अलगाववाद की घटनाओं में करीब 36 फीसद तक की कमी आई कानून व्यवस्था पटरी पर लौटा कश्मीरियों को शांति चैन सुकून मिला कश्मीर में कानून का शासन स्थापित हुआ एक साल में ही जम्मू कश्मीर में आतंक की कमर काफी हद तक टूटी

आंकड़ों के आइने में आज का जम्मू कश्मीर

अनुच्छेद 370 हटाने वाले ऐतिहासिक फैसला को 5 अगस्त 2020 को एक वर्ष हो गया इस एक वर्ष में इसका बेहतर असर दिखने लगा है कश्मीर में सुरक्षा हालात पहले से बेहतर हुआ हैं. 5 अगस्त 2019 के बाद से घाटी में हिंसा में करीब 36 परसेंट की कमी आई है आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कामयाबियाँ मिली है

क्या बताता है गृह मंत्रालय का रिपोर्ट

खूबसूरत कश्मीर की वादियां

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 370 हटने के बाद कश्मीर की वादियों व घाटियों में आतंकवाद की घटनाओं में संतोषजनक गिरावट आई है पिछले साल जनवरी से 15 जुलाई 2019 तक 188 आतंकवाद से जुड़ी घटनाएं हुई थी वहीं इस साल इसी अवधि में 120 आतंकी घटनाएं घटीं 2019 में 126 आतंकी मारे गए थे जबकि इस साल इसी अवधि में 136 आतंकियों का खात्मा हुआ. पिछले साल घाटी में 51ग्रेनेड हमले हुए थे जबकि इस साल 15 जुलाई तक 21 ग्रेनेड हमले हुए रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल कश्मीर में हुए आतंकी हमलो में 23 आम नागरिक मारे गए थे और 75 सुरक्षाबलों के जवान शहीद हुए थे वही इस साल इसी अवधि में 22 नागरिक मारे गए और 35 जवान शहीद हुए. पिछले साल 6 ग्रेनेड हमले हुए थे वहीं इस साल केवल एक ग्रेनेड हमलां हुआ. पिछले साल जुलाई तक 15 IED हमले हुए, इस वर्ष जुलाई तक केवल एक IED हमला हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक मारे गए आतंकियों में 110 स्थानीय आतंकी थे और शेष बाकी पाकिस्तान से थे मारे गए आतंकियों में सबसे अधिक 50 आतंकी हिज्बुल मुजाहिदीन के थे , लश्कर और जैश -ए -मोहम्मद के करीब 20 -20 आतंकी मारे गए ,वहीं आईएसजेके और अंसार गजवात उल हिंद के 14 आतंकी मारे गए. इस तरह जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद आतंकवादियों की खासी कमर टूट गई हालांकि अभी भी पाकिस्तान अपनी फितरत व प्रपंच से बाज नहीं आ रहा है ,किन्तु पहले की तुलना में पाकिस्तान पर भारत व विश्व स्तरीय अधिक तलवारें खिंची है जुबान पर पाबंदी भी लगी है अकड़ भी ढीली पड़ी है ,चुकि भारत ने भी पाकिस्तान का मुंहतोड़ व ईट का जवाब पत्थर से देने के लिए पूरी तरह कमर जो कस ली है.

कश्मीर के कायाकल्प / पुनरोत्थान के लिए भारत सरकार की अग्रिम योजना व एजेंडा : 356 अलगाववादी जेलों से हुए रिहा

जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाने के बाद भारत सरकार कश्मीर में शांति सुरक्षा विधि व कानून व्यवस्था को मुकम्मल करने और सर्वे भवंतू सुखिनाह सर्वे भवंतु निरामया का माहौल बहाल करने के लिए अग्रिम योजनाएं / एजेंडा तैयार की है और इसे विशेष प्राथमिकता देते हुए गंभीरता के साथ अमल में भी लाना शुरू कर दी है. सरकार का बड़ा मकसद राष्ट्रधारा से कटे व भटके युवाओं को राष्ट्रधारा से जोड़ना और उनमें राष्ट्रभक्ति व प्रेम की लौव जलाना है इस दिशा में सकारात्मक पहल भी शुरू कर दिया गया है इसका ताजा उदाहरण विभिन्न जेलों में कानूनी शिकंजे में कैद 350 अलगाववादियों को अच्छे व्यवहार के मुचलके पर रिहा कर देना है. कश्मीर पुलिस के प्रमुख दिलबाग सिंह ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा है कि इन्हें भविष्य में अच्छे व्यवहार के मुचलके पर छोड़ा गया है. रिहा किए गए अलगाववादी व पत्थरबाजों में 140, 18 से 20 वर्ष के युवा हैं इनकी न्यायिक अवधि भी पूरी हो गई थी और अच्छे व्यवहार के मुचलके पर विश्वास भरोसा कर भविष्य संवारने के निमित्त ही इन्हें छोड़ा गया है , जो एक बड़ा संदेश देगा सरकार का यह एक सकारात्मक रचनात्मक पहल व प्रयोग है जेलों में बंद 50, 60 अलगाववादियों को भी छोड़ने की योजना है सरकार की योजना हसीन वादियों और प्राकृतिक घाटियों का राज्य जम्मू कश्मीर को दोबारा भारत का स्वर्ग बनाने की है ..

न्यूज़: वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो0 धीरेंद्र नाथ सिंह, न्यूजरूम दैनिक खबर

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