आज कोविड-19 कोरोनावायरस महामारी संक्रमण के गंभीर चपेट में विश्व के करीब करीब देश बने हुए हैं .इसमें भारत समेत विकसित व प्रभुत्व संपन्न अमेरिका रूस इंग्लैंड इटली फ्रांस आदि देश भी शामिल है . कोरोना वायरस की कहर ने शक्तिशाली देशों की भी तस्वीर काफी हद तक बदतर व बदरूप कर दिया है. अर्थव्यवस्था को काफी हद तक डुबो दिया है . जान माल की अपूरणीय क्षति पहुचायी है .अभी भी कोरोना वायरस से उबरना शक्तिशाली एवं प्रभुत्व संपन्न देशों के लिए भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है .

चीन और डब्ल्यूएचओ की भूमिका पर खड़ा हो रहा सवालिया निशान..

विश्व में भारी तबाही व बर्बादी का आलम बना कोविड-19 कोरोना वायरस महामारी की उत्पत्ति व प्रसार को रोक पाने में नाकामी को लेकर चीन और डब्ल्यूएचओ को जिम्मेवार ठहराते हुए इनकी घेराबंदी भी शुरू हो गई है. इसमें यूरोपिय यूनियन, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जापान और रूस समेत 120 देशों ने खतरनाक कोरोनावायरस के स्रोत का पता लगाने और इससे निबटने के लिए डब्ल्यूएचओ की भूमिका की निष्पक्ष और बृहद जांच की मांग की है .डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने संगठन की भूमिका की जांच का वादा किया है . वही चीन ने अपने पक्ष को सही ठहराया है .

जेनेवा में विश्व स्वास्थ सभा में पेश हुआ यह मसौदा प्रस्ताव..

18 मई (सोमवार ) को जेनेवा में डब्ल्यूएचओ के 73 वें विश्व स्वास्थ्य सेवा (डब्ल्यूएचए ) की दो दिवसीय बैठक हुई . जिसमें दुनिया की बर्बादी का कारण कोविड-19 वैश्विक कोरोना वायरस महामारी के संक्रमण का स्रोत का पता लगाने के लिए जांच की जोरदार मांग उठी . डब्ल्यूएचओ की इस बैठक में 27 देशों के संगठन यूरोपीय यूनियन की तरफ से एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया गया है , जो कोरोना वायरस के स्रोत का पता लगाने से संबंधित है , इसका कई देशों ने समर्थन किया है. भारत भी इसमें शामिल है .डब्ल्यूएचए की बैठक में बतौर भारत के प्रतिनिधि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन शामिल हुए थे . बैठक को लेकर डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एधनोम धेब्रेयेसस ने भी ट्वीट कर कहा है है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र से जुड़े विश्व के नेताओं को एकजुट होना चाहिए . मसौदा प्रस्ताव का भारत के अलावा रूस, भूटान, सऊदी अरब, तुर्की, बांग्लादेश, ब्रिटेन यूक्रेन, मलेशिया सहित जापान इंडोनेशिया मेक्सिको और मालदीव ने भी समर्थन किया है .

मसौदा प्रस्ताव में अमेरिका का नाम शामिल नही होना घोर आश्चर्य

कोविड-19 वैश्विक कोरोना वायरस महामारी से बेइंतहा प्रभावित अमेरिका का नाम मसौदा प्रस्ताव में शामिल नहीं होना स्वाभाविक रूप से एक घोर आश्चर्य का विषय है . क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस संक्रमण के स्रोत और प्रसार की जांच की मांग करते थक नहीं रहे हैं. खुले रूप से सीना ठोककर आरोप लगा रहे हैं कि चीन के वुहान शहर में यह वायरस कैसे पैदा हुआ और चीन में इसको रोकने के लिए क्या पहल हुआ ?.. की जांच की मांग बार-बार दोहरा रहे हैं . इसके पक्ष में समर्थन जुटाने की मुहिम भी चला रहे हैं .यहां तक कि कोरोना वायरस को चीन का जैविक हथियार बताते हुए चीन द्वारा अपने उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अधिक से अधिक खपा कर अधिक से अधिक मुनाफा बटोरने का एक कूटनीतिक आर्थिक प्रयास का आरोप भी चीन पर मढ़ रहे हैं . कोरोना वायरस से हुई क्षति का हर्जाना व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अल्फाज व तेवर के मुताबिक जुर्माना भी चीन से ही वसूलने का दावा भी ठोंक रहे है . जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुंह मांगी मुराद को पूरा करने के लिए विश्व के महाशक्तियों समेत 120 देश एकजुट हुए और चीन एवं डब्ल्यूएचओ की भूमिका की जांच का प्रस्ताव मसौदा डब्ल्यूएचए की बैठक में पेश हुआ .ऐसे में अमेरिका की चुप्पी व टीम से बाहर रहना या मसौदा प्रस्ताव में अमेरिका का नाम शामिल नहीं होना खुद-ब-खुद एक सवाल बनता है और घोर आश्चर्य भी पैदा करता है. इस स्थिति में अमेरिका पर सवालिया निशान लगना व इसे घोर आश्चर्य का विषय बनाना निसंदेह स्वाभाविक है .

चित्र सौ:@ सोशल मीडिया

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