लॉग डाउन का सबसे ज्यादा प्रभाव प्रवासी श्रमिकों या कहें जीवन की जरूरतों को पूरा करने रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में रह रहे लोगों पर पड़ा है. देश के हर कोने से मदद की गुहार लगा रहे हैं सीमित संसाधनों में जीवन बसर करने वाले लोग. झारखंड की समस्या दूजी नहीं है सरकार के समक्ष दरवाजे पर खड़े हैं प्रवासी मजदूर..
जनता ने सरकार को दिया हर कदम पर साथ ,अब जनता को साथ निभाने की है सरकार की बारी , गरीब जरूरतमंद लाचार असहाय व दुखी जनता अलाप कर रही है , आजा मन घबराए, देर ना हो जाए ,कहीं देर ना हो जाए !

आज करीब करीब समस्त देश कोविड-19 वैश्विक कोरोना वायरस महामारी संक्रमण से जूझ रहा है । मानवता अपने अस्तित्व के लिए इस जानलेवा महामारी से लड़ रही है । देश में संपूर्ण लॉक डाउन है ।लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का नियमवत शत प्रतिशत अनुपालन कानूनी बाध्यता ही नहीं समय व हालात की जरूरत भी बनी हुई है ।इस लक्ष्मण रेखा को लांघना कानूनी अपराध तो है ही साथ-साथ लांघने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और मामले भी दर्ज हो रहे हैं ।

संक्रमण के रोकथाम के उपायों एवं दिशा निर्देशों के अनुपालन में लोग सरकार व लोकतांत्रिक तंत्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं, साथ सहयोग भी कर रहे हैं. यह विश्व मे एक अनुकरणीय मिशाल भो बना है ।

लोगों की कमाई बंद हो तो सब कुछ बंद हो जाता है..

दूसरी ओर यह कोई अनुमानित नहीं सर्वेक्षण व आंकड़ों पर आधारित कटु सत्य है कि लॉकडाउन से सर्वाधिक प्रभावित दिहाड़ी मजदूर , कामगार , गरीब जरूरतमंद , असहाय लाचार व मध्यवर्गीय परिवार ही बना हुआ है इनकी संख्या भी बहुआयत में है , जिनके चूल्हे का जलना व बुझा रहना , छोटी से बड़ी बीमारी का इलाज व अन्य बुनियादी जरूरतों की उपलब्धता इनके पसीने की गाढ़ी कमाई पर आश्रित रहता है । कमाई बंद तो सब कुछ बंद हो जाता है ।जीवन की गाड़ी रुक जाती है ।जिसके अप्रत्याशित परिणाम भी होते हैं । बड़ों की तो हमेशा बड़ी बात रही है ,और रहेगी , किंतु देश समाज के आर्थिक , सामाजिक संरचना की रीढ़ यह तबका हर मुश्किल घड़ी में देश के साथ खड़ा रहता है और रहेगा ।यह ध्रुव सत्य है ।

केंद्र हो या राज्य सरकार प्राथमिकताएं तो एक ही हैं, कहीं वादों व व्यवस्था पर सवालिया निशान तो खड़े नहीं हो रहे..

केंद्र ही नहीं राज्य सरकारें भी विषम घड़ी में विशेष रुप से गरीब जरूरतमंद ,दिहाड़ी मजदूर व कामगार के पेट की आग बुझाने और जान बचाने के लिए जरूरी इलाज के लिए सरकारी अनाज और सरकारी चिकित्सा पर आश्रित परिवारों की हर हाल में हर संभव सहयोग ,मदद करने की लगातार घोषणा व वादा कर रही है । भूख से किसी की मौत ना हो के लिए अतिरिक्त राशन सहित होम डिलीवरी राशन मुहैया कराने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश भी निर्गत कर चुकी है । सरकारी इलाज की व्यवस्था मुहैया होने की बात भी बता रही है मनरेगा से रोजगार उपलब्ध कराने की भी बात बताई जा रही है । किंतु यह कहां तक जमीन पर उतर पा रही है।स्पष्ट बताना मुश्किल बना हुआ है । राशन वितरण में जड़ जमाई अनियमितता और मुनाफाखोरी में अभ्यस्त व्यवसायियों द्वारा कीमत से डेढ़ से दोगुना दाम की वसूली ,माकूल चिकित्सा व्यवस्था के अभाव में हो रही मौत आदि समस्याओं से जुड़ी मिल रही जन शिकायतें सरकार के वादों व व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है ।

रैन बिना चैन कहां, रोजगार बिना जीविका कहां..

केंद्र और राज्य सरकारें संपूर्ण लॉक डाउन में बाहर फंसे छात्र और मजदूरों के जल्द घर वापसी का भरोसा बंधा रही है । जिसकी प्रतिक्षा बेसब्री से बाहर फसे छात्र ,मजदूर और इनके परिजन समान रूप से कर रहे हैं ।दोनो तरफ की मनोदशा रैन बिना चैन कहां की बनी हुई है । केंद्र व राज्य सरकारें इनके घर वापसी की व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित करवाने की लगातार घोषणा व वादा तो कर रही है । दूसरी ओर श्रम पर आधारित आजीविका से जुड़े मजदूर व कामगार के लिए वैकल्पिक रोजगार मुहैया कराने की बात भी दोहरा रही है । यह तबका बेसब्री से बाट भी जोह रहा हैं । परंतु अभी तक कुछ भी ऐसा संभव होता परिलक्षित नहीं हो रहा है ।

झारखंड सरकार के लिए व्यवस्था सुनिश्चित कराने की बड़ी जिम्मेदारी है..

झारखंड राज्य के हजारों छात्र , मजदूर सम्पूर्ण लॉक डाउन में बाहरी प्रांतों में फंसे हुए हैं । जिनके जल्द घर वापसी की व्यवस्था सुनिश्चित करवाने का वादा राज्य व केंद्र सरकार कर रही है ।विश्वास भरोसा भी बंधा रही है । संपूर्ण लॉकडाउन में झारखंड राज्य के आठ लाख मजदूर और हजारों छात्र बाहरी राज्यों में फंसे हुए हैं । सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गृह मंत्री अमित शाह से इसमे मदद भी मांगी थी । सोरेन ने आग्रह किया था कि बिना केंद्र सरकार की मदद व सहयोग से बाहर फसे छात्रों व मजदूरों की घर वापसी संभव नहीं है । मजबूरी व वस्तुस्थिति चाहे जो भी हो बाहर बाहर फ़से छात्रों व मजदूरों की घर वापसी राज्य सरकार की बड़ी जिम्मेवारी ही नही बड़ी चुनौती भी है ।

यह सर्वविदित व दृष्टिगोचर सत्य है कि लॉक डाउन में झारखंड से लाखों की संख्या में बाहर फंसे लोगों में करीब-करीब संख्या मजदूरों व छात्रों की है। ये कैसे और कहां हैं की चिंता इनके परिजनों में व्याप्तना स्वाभाविक ही नहीं लाजमी भी है कबतक होगी इनकी घर वापसी की चिंता बाहर फंसे लोगों और इनके परिजनों में समान रूप से बनी हुई है । सरकारी पहल का बाट जोहा जा रहा हैं ।

महागठबंधन सरकार का भविष्य..

झारखंड सरकार का किसी को भूख व इलाज के अभाव में मरने नहीं देने ,हर संकट व विपत्ति में विशेष रूप से गरीब ,जरूरतमंद लोगों के साथ सरकार के खड़ा रहने आदि किया गया वादा व बंधाया गया विश्वास भरोसा की कसौटी पर हर हाल में खरा उतरना वर्तमान सरकार की बड़ी जिम्मेवारी के साथ साथ अग्निपरीक्षा होगी ।जिस पर महागठबंधन सरकार का भविष्य भी निर्भर करेगा , इसमें किसी प्रकार की भी चूक व देर हो जाने से उत्पन्न विपरीत परिस्थिति सोरेन सरकार के माथे पर कलंक का काला टीका भी लगा सकता है.

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