कोरोना वायरस महासंकट के दौर में निजी स्कूलों और छात्रों के अभिभावकों के प्रति बाबूलाल मरांडी के हृदय में छलका समान दर्द .

जानकारी को बता दें उक्त संदर्भ में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर इस आर्थिक बोझ के समाधान के लिए कोई बीच का रास्ता अख्तियार करवाने का दिया आग्रहपूर्ण मशवरा..

कोविड-19 वैश्विक कोरोना वायरस महामारी संक्रमण से बचाव को लेकर 22 मार्च से देश में संपूर्ण लॉकडाउन लागू है .आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ी हुई है . इससे विशेष रूप से प्रभावित श्रम पर आधारित आजीविका से जुड़े गरीब व मध्यवर्गीय परिवार , और निजी स्कूलों के प्रबंधन औरअध्ययनरत छात्रों के अभिभावक बने हुए हैं , जिनके बीच संपूर्ण लॉकडाउन अवधि का शुल्क लेने और देने को लेकर भारी असमंजस व उहापोह की स्थिति बरकरार है , राम जाने क्या होगा आगे की चिंता समान रूप से दोनों पक्षों को सता रही है, इस संबंध में सरकार व विभागीय तंत्र द्वारा कोई स्पष्ट दिशा निर्देश अभी तक निर्गत नहीं हो पाया है .

निजी स्कूल व अभिभावकों के लिए समान रूप से दर्द छलका है; कोशिश है सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे..

इस भीषण संकट की घड़ी में भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी के हृदय में निजी स्कूलों के प्रबंधन और इसमें अध्ययनरत विशेष रुप से गरीब व मध्यवर्गीय परिवारों के छात्र के अभिभावकों के प्रति विशेष रूप से दर्द छलका है .श्री मरांडी ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को निजी स्तर से पत्र लिखकर शुल्क उगाही के लिए कोई बीच का रास्ता अख्तियार करवाने की व्यवस्था सुनिश्चित करवाने का अनुरोधपूर्ण सलाह दी है , ताकि सांप भी मर जाए और लाठी भी नहीं टूटे .

निजी स्कूल का प्रबंधन व गरीब मध्यमवर्गीय परिवार की आर्थिक स्थिति दोनों ही परिस्थितियां मुश्किलों का सबब है.. .

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में लिखा है कि संपूर्ण लॉकडाउन में विशेष रुप से मजदूर और मध्यवर्गीय परिवार आर्थिक रूप से प्रभावित हो रहे हैं .चुकि इनके सारे आर्थिक स्रोत बंद हो जाने के कारण इनके समक्ष आर्थिक तंगी सुरसा जैसा मुंह बाए खड़ी है . सूबे के सारे सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूल भी बंद हैं. सरकारी स्कूलों की तो बात इत्तर निजी स्कूलों का आर्थिक स्रोत बच्चों से वसूली जाने वाली फीस व अन्यान्य शुल्क पर ही आश्रित रहता है . ऐसी विषम स्थिति में समर्थ परिवारों के बच्चों के अभिभावकों द्वारा लॉकडाउन अवधि की फीस अदायगी कोई मुश्किल भरा डगर नहीं है , किन्तु गरीब व मध्य वर्गीय परिवार के बच्चों के अभिभावकों द्वारा स्कूल फीस व अन्यान्य शुल्क का भुगतान सुई की नोक से ऊंट को पास करवाने जैसी स्थिति का उत्पन्न होना स्वाभाविक प्रतीत होता है . दूसरी ओर स्कूल बंद होने के कारण आर्थिक समस्या से जूझ रहे निजी स्कूलों के प्रबंधन व स्टाफ को आर्थिक सहयोग करना भी मानवीय दृष्टिकोण से लाजमी प्रतीत होता है, ताकि आर्थिक तंगी के कारण बुनियादी जरूरत व पारिश्रमिक भुगतान प्रभावित न हो सके.

ठोस रास्ता हो जहां गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार से फीस वसूली में मानवीय दृष्टिकोण हो साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित हो निजी स्कूल अपनी प्रबंधन की बुनियादी सुविधाएं जुटा सके..

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में सरकार और निजी स्कूलों के प्रबंधन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए इस समस्या का समाधान के लिए कोई ठोस रास्ता व बीच का रास्ता अख्तियार करने का अनुरोध किया है । समर्थ परिवार के बच्चों के अभिभावकों से इस विषम परिस्थिति में निजी स्कूलों के निर्धारित शुल्क व अन्यान्य फीस का भुगतान करने की अपील की है ,ताकि निजी स्कूलों के प्रबंधन की बुनियादी जरूरतें और स्टाफ का वेतन (मुशहरा ) का भुगतान लाकड़ाउन अवधि का सुनिश्चित हो सके और आर्थिक तंगी से उबर सकें . वहीं दूसरी तरफ निजी स्कूलों के प्रबंधन से अपील किया है कि लॉकडाउन अवधि की शुल्क वसूली में मानवीय हितों व मूल्यों का भी ख्याल रखा जाए , जो मानवीय दृष्टिकोण से भी जरूरी प्रतीत होता है .

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी में अपने पत्र मे सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शिक्षा से जुड़े इस आर्थिक समस्या का समाधान करवाने के लिए अपने अस्तर से कोई ठोस पहल व बीच का रास्ता सुनिश्चित करवाने हेतु आग्रहपूर्ण अनुरोध भी किया है . ताकि निजी स्कूलों का संचालन बरकरार रहे और उसमें कार्य कर रहे स्टाफों के भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पढ़ सके .अब देखना है कि आगे आगे होता है क्या ?..

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here