कल 5 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी प्रस्तावित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की पूरे वैदिक अनुष्ठान एवं शास्त्र सम्मत विधि विधान के साथ भूमि पूजन कर मंदिर निर्माण की आधारशिला रखेंगे

यादगार ऐतिहासिक तारीखों में शुमार होगा 5 अगस्त 2020

चीर प्रतिक्षित अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण का होगा श्री गणेश एवं मार्ग प्रशस्त


दुनिया के नामचीन मंदिरों के मानचित्र में श्री राम मंदिर भी होगा रेखांकित , सैलानियों /पर्यटकों / वास्तुविदों के लिए बनेगा अद्भुत , दिलचस्प , मनोहारी आकर्षण का केंद्र

50 हजार से ऊपर श्रद्धालु एक साथ श्री रामलला का दर्शन और पूजन कर सकेंगे

अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद का पटाक्षेप के साथ श्रीराम मंदिर का निर्माण प्रारंभ

अयोध्या विवाद एक राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक धार्मिक विवाद था ,जो 90 के दशक में सबसे ज्यादा उभान पर था, इस विवाद का मूल मुद्दा अयोध्या में राम जन्मभूमि व बाबरी मस्जिद के अस्तित्व की स्थिति को लेकर था . विवाद इस बात को लेकर था कि क्या हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद बनाया गया था या मंदिर को मस्जिद के रूप में बदल दिया गया था . बाबरी मस्जिद के ढांचे को एक राजनीतिक रैली के दौरान नष्ट कर दिया गया था जो 6 दिसंबर 1992 को एकदम से संप्रदायिक दंगे का रूप अख्तियार कर चुका था . जो संगठन राम मंदिर के निर्माण का समर्थन कर रहे थे उन्होंने 1992 के दिसंबर में एक कार सेवा का आयोजन किया, वे राम मंदिर के निर्माण में श्रमदान के लिए संगठित हुए थे बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भूमि शीर्षक का मामला दर्ज किया गया था , जिसका फैसला 20 दिसंबर 2010 को सुनाया गया था . इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला दिया था कि अयोध्या की 2 .77 एकड़ (1.12 हेक्टेयर )भूमि को तीन भागों में विभाजित किया जाएगा . जिसमें 1/3 रामलला या हिंदू महासभा द्वारा तिनिधित्व किया जाना था 1/3 सुन्नी वक्फ बोर्ड और शेष 1/3 निर्मोही अखाड़ा को दिया जाना था .

सुप्रीम कोर्ट ने किया विवाद का पटाक्षेप

सुप्रीम कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद 9 नवंबर 2019 को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बदल दिया अपने ऐतिहासिक फैसले में राम जन्म भूमि की जमीन राम जन्मभूमि न्यास बोर्ड को सौंप दिया और सरकार को मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया है . दूसरी तरफ पीएम नरेंद्र मोदी ने सरकार द्वारा अधिग्रहित 67 एकड़ जमीन भी ट्रस्ट को सौंपने की घोषणा की है .

राम मंदिर निर्माण को लेकर 28 साल तक नही की अन्न ग्रहण

जब 1992में बाबरी मस्जिद गिरा था और यह दंगा का रूप ले लिया था तो इससे आहत मध्यप्रदेश के जबलपुर की 52 वर्षीया उर्मिला चतुर्वेदी काफी आहत हो गई थी और राम मंदिर के निर्माण होने तक अन्न ग्रहण नहीं करने का संकल्प ले ली थी उन्होंने मन्नत मांगी थी की रामलला का मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने के बाद ही अन्न ग्रहण करेगी 28 सालों से वह फलाहार करती आ रही है. 5 अगस्त को नरेंद्र मोदी श्री राम मंदिर निर्माण का वैदिक अनुष्ठान के साथ भूमि पूजन के साथ इसकी आधारशिला रखेंगे इससे उर्मिला की मन्नत भी पूरी होगी उर्मिला ने अब अयोध्या में बसने की इच्छा जाहिर की है. ऐसे में भारत और विदेशों में प्रवासी भारतीय नजर अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण पर टिकी हुई थी

लंबे इंतजार की घड़ी होगी पूरी , अद्भुत विलक्षण और दर्शनीय बनेगा श्रीराम जन्मभूमि मंदिर

तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन के साथ चीर प्रतिक्षित अयोध्या श्रीराम मंदिर निर्माण की आधारशिला रखेंगे. इसके साथ ही श्री राम मंदिर का निर्माण का श्रीगणेश हो जाएगा . अभी तक के निर्धारित व संशोधित ढांचा के मुताबिक इसमें पांच नहीं बल्कि आसमान छूते 6 शिखर होंगे . भक्तों की भारी भीड़ प्रभु के चरणों में रम सकें इसलिए परकोटा भी करीब 5 एकड़ में फैला रहेगा . इसका क्षेत्रफल 84,600 वर्ग फुट होगा . मंदिर 360 फीट लंबा ,235 फीट चौड़ा और 161 फीट ऊंचा होगा .

पहले अग्र भाग में सिंहद्वार के बाद नृत्य मंडप रंग मंडप के बाद गर्भ गृह निर्माण की योजना थी . जिसमें संशोधन कर गर्भ ग्रह और रंग मंडप के बीच गूढ़ मडप बनेगा और इसके दाएं बाएं अलग अलग कीर्तन व प्रार्थना मंडप रहेगा .गर्भ गृह को छोड़ सभी मंडलों का आकार पहले से काफी बढ़ा दिया गया है .पिंक स्टोन के 12 फीट के बाद गर्भगृह के फ्लोर पर सिर्फ रामलला विराजमान होंगे .उसके ऊपर वाले तल्ले पर राम दरबार बनेगा , जो खाली रहेगा , 50 हजार से ऊपर श्रद्धालु एक साथ श्री रामलला का दर्शन और पूजन कर सकेंगे .

रामलला की अयोध्या जन्मभूमि पर बन रहे इस मंदिर के कारण इसका नाम श्रीराम जन्मभूमि मंदिर होगा मंदिर की भव्यता की संभावनाएं तलाशने के लिए ट्रस्ट ने मंदिर के मुख्य शिल्पी चंद्रकांत सोनपुरा को जिम्मेवारी सौंपा है चंद्रकांत अपने दो वास्तुविद पुत्रों आशीष एवं निखिल सोनपुरा को इस काम में लगाया है .शिल्पी चंद्रकांत सोनपुरा और उनके दोनों वास्तुविद पुत्रों द्वारा 2 माह की कड़ी मेहनत एवं समुचित बुद्धि के साथ प्रस्तावित मंदिर का संशोधित ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है .

अद्वितीय अनूठा एवं विलक्षण होगा मंदिर

कल 5 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी प्रस्तावित श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण की पूरे वैदिक अनुष्ठान एवं शास्त्र सम्मत विधि विधान के साथ भूमि पूजन कर मंदिर निर्माण की आधारशिला रखेंगे इसके साथ ही मंदिर का निर्माण भी जमीनी रूप ले लेगा . ट्रस्ट ने इसकी व्यापक तैयारी भी की है ट्रस्ट एवं मुख्य शिल्पी और इनके वास्तुविद पुत्रों सहित अन्य विशेषज्ञ आश्वस्त हैं कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर अपने आप में अनूठा होगा विश्व के धार्मिक मंदिरों के मानचित्र पर इस मंदिर का नाम भी शुमार होगा, भारत की एक विशेष पहचान बनेगा और सैलानियों पर्यटको के लिए अद्भुत ,मनोहारी , हृदयस्पर्शी दर्शनीय स्थल तो बनेगा ही साथ ही देश विदेश के शिल्प व वास्तुविदों के लिए शोध व उत्सुकता का विषय भी होगा .

प्रतीकात्मक तस्वीरें सौजन्य: सोशल मीडिया

न्यूज़ :वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो0 धीरेंद्र नाथ सिंह, न्यूजरूम दैनिक खबर

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