भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने भरा नामांकन पर्चा…..

आज झारखंड से भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी दीपक प्रकाश ने अपना नामांकन दाखिल किया.. मौके पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत कई विधायकों की मौजूदगी रही. आजसू विधायक लंबोदर महतो सहित 10 विधायक दीपक प्रकाश के प्रस्तावक बने.

रघुवर दास, बाबूलाल मरांडी, दीपक प्रकाश झारखंड का राजनीतिक समीकरण., किसी के सितारे बुलंदी पर कोई पहुंचा हाशिए पर..

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की राज्यसभा उम्मीदवारी को लेकर भी राजनीतिक गलियारे में खूब चर्चा हुई लेकिन राज्यसभा की दावेदारी उनके हाथ ना लगी झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 के बाद झारखंड के राजनीतिक समीकरण में बहुत तेजी से बदलाव देखने को मिला है बाबूलाल का भाजपा में आना, विधायक दल का नेता बनना, फिर दीपक प्रकाश का प्रदेश अध्यक्ष बनना संकेत था प्रभाव का प्रदेश में धमक का राजनीतिक कद का जो आने वाले समय में झारखंड में भाजपा की राजनीति का नीति निर्धारण करने वाला था बात कर रहे हैं बाबूलाल मरांडी की. दूसरी तरफ हाल में ही सता गवाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जिनके सितारे फिलहाल गर्दिश में है साथ ही झारखंड की सत्ता फिसलने के मुख्य घटक माने जाते हैं.

तस्वीर संकेत थी झारखंड की राजनीति किस करवट बैठने वाली थी ..

3 महीने पहले थे केंद्र बिंदु आज चर्चा भी नहीं….

राजनीति करवट लेते देर नहीं लगाती इसका जीवंत और प्रत्यक्ष उदाहरण हैं पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जो 3 महीने पहले तक झारखंड की राजनीति की दशा दिशा निर्धारित कर रहे थे, चर्चा के केंद्र बिंदु थे.. विधानसभा चुनाव में टिकट के बंटवारे में अहम भूमिका निभा रहे थे.. आज खुद राज्यसभा के उम्मीदवारी से मरहूम रह गए.


दीपक प्रकाश को झारखंड भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाती है और राज्यसभा का टिकट भी.. यह राजनीति के बदलते समीकरण हालिया घटनाक्रम की ओर इशारा करता है.. यह तो तभी समझ में आ गया था की झारखंड की राजनीति की बिसात अब बदलने वाली है, बाबूलाल मरांडी के आते ही संकेत दिखने लगे थे…. झारखंड में किसकी चलने वाली है, भाजपा की राजनीति का केंद्र बिंदु कौन बनने वाला है और हाशिए पर कौन जाने वाला है.


कहां किसको रघुवर दास खटक रहे थे…?

प्राप्त खबरों के हवाले से पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को राज्यसभा दावेदारी मिलने पर भाजपा का एक धड़ा से क्रॉस वोटिंग करने की भी गुंजाइश थी, दूसरी तरफ भाजपा राज्यसभा में अपनी दावेदारी सुनिश्चित करने के लिए सारी नकारात्मक संभावना को विराम देना चाहती थी. सरयू राय और रघुवर दास की अदावत पूरे प्रदेश में किसी से छुपी नहीं.. पुराने सहयोगी आजसू ने भी अपनी मंशा स्पष्ट कर दी थी चुकी गठबंधन टूटने का ठीकरा रघुवर दास पर गया था.. वहीं भाजपा राज्यसभा की दावेदारी को लेकर अपनी जीत सुनिश्चित करना चाहती थी सारे संभावनाओं के साथ चाहे सरयू राय को अपने पक्ष में लाना हो या फिर आजसू को… इसलिए तो कल तक जो रघुवर दास झारखंड की राजनीति में बुलंदी से सर्वमान्य थे, चर्चा में थे.. आज हाशिए पर हैं…

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