कंगना रनौत को हरामखोर कह बुरे फंसे संजय राउत

महिलाएं इसे नारी जाति और महिला सशक्तिकरण का ठहराया अपमान

रफ्तार पकड़ता विरोध पर घबराए संजय राउत ने हरामखोर का अर्थ बदला नॉटी गर्ल

क्या कहा था राउत ने

संजय राउत ने एक टीबी चैनल के रिपोर्टर के साथ वार्ता में कंगना रनौत को हरामखोर कह दिया ,साथ ही रिपोर्टर को भी नसीहत दे दी कि तुम भी एक हरामखोर लड़की का क्यों वकीली कर रहे हो ? जिसने क्षत्रपति शिवाजी की धरती महाराष्ट्र का अपमान किया , बाबा साहेब बाल ठाकरे का अपमान किया , महाराष्ट्र सरकार और मुंबई पुलिस का भी अपमान किया .

संजय राउत की जुबान से निकला एक शब्द पूरे भारत के लिए बन गया फसाना

संजय राउत को सम्भवतः सपने में भी अहसास नही होगा कि बॉलीवुड की राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त एक अभिनेत्री और जस्टिस इन सुशांत सिंह राजपूत डेथ मिस्ट्री के लिए शुरू से मुखर और सुशांत के करोड़ो फैंस की आवाज बनी कंगना रनौत को हरामखोर की उपाधि से नवाजना या सीधे कहा जाय एक भद्दी गाली देना इतना महंगा पड़ेगा और ऐसा हुआ भी . आज इसे लेकर प्रायः टीबी चैनल ,सोशल मीडिया से लेकर करोड़ों लोगों में उबाल है . आक्रोश का आलम है कि इसके लिए करोड़ो जुबान इसकी अलग अलग अल्फाज में तीखी भर्त्सना के साथ साथ प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे है . कोई क्या महाराष्ट्र भारत का अंग न होकर संजय राउत के बाप व शिवसेना का जागीर व पीओके कश्मीर है ? अदि अन्य आक्रोशपूर्ण सवालों का बौछार कर रहे है . संजय राउत द्वारा एक नारी के लिए हरामखोर जैसे शब्द का इस्तेमाल को सम्पूर्ण नारी समाज का ही नही क्षत्रपति शिवाजी और बाला साहेब ठाकरे एवं इनकी पवित्र धरती महाराष्ट्र के उसूलों का घोर अपमान की संज्ञा दी जा रही है. संजय राउत की बात का इनके समर्थकों के पास भी कोई सटीक व माकूल जबाब नही जुट रहा है .महाराष्ट्र सरकार के गठबंधन दल एनसीपी और कॉंग्रेस की जुबान पर ताला जड़ गया है. क्या महाराष्ट्र के महानायक बाला साहेब बाल ठाकरे के उत्तराधिकारी और मनसे के सुप्रीमो राज ठाकरे साहब महाराष्ट्र की हो रही भारी बदनामी से व्यथित व नाखुश नही हैं ?इसका केवल और केवल एक ही जबाब परिलक्षित तौर पर बेइंतहां नाखुश व व्यथित हैं. अधिसंख्य महाराष्ट्र वासी भी दुखी हैं आखिर ऐसा क्यों ? यह एक यक्ष प्रश्न सुरसा के मुह की भांति मुह बाए खड़ा है .

नारी समुदाय ने भी फूंका विरोध का बिगूल

एक भारतीय नारी के लिए प्रयुक्त हरामखोर जैसा घिनौना शब्द को देश के महिला समुदाय ने पूरी गम्भीरता से लिया है . इसे नारी समुदाय के लिए भद्दी गाली करार देते हुए इसे नारी समुदाय एवं नारी सशक्तिकरण का अपमान ठहराते हुए इसके खिलाफ सशक्त विरोधी मोर्चा भी खोल दिया है.इसपर बहस ,चर्चाएं थम नही रही है .आलोचनाओं की बौछार हो रहीं है .नारी शक्ति का भान कराते हुए ललकारा जा रहा हैं . संजय राउत को कंगना को मुंबई आने से रोकने व ठेस पहुंचाने पर ईंट से ईंट बजा देने की चुनौती तक पेश की जा रही है. संजय राउत जी जरा ठंढे दिमाग से सोचिए ऐसी भूल करने से आपको क्या बचा व मिला ? केवल और केवल दुविधा में दोनों गए माया मिली न राम की कहावत ही चरितार्थ होकर रह गई.

करोड़ो देशवासी का सवाल राउत बताएं रनौत का गुनाह

संजय रावत जी करोड़ों देशवासी कंगना रनौत के प्रति आपकी , महाराष्ट्र सरकार , बॉलीवुड और मुंबई पुलिस की बबेइंतहा नफरत नाराजगी के पीछे वजह व कंगना रनौत का गुनाह जानना चाहती है . उंगली पर गिनती के लोग को छोड़ सारे देशवासी बखूबी जानते हैं कि कंगना सुशांत डेथ केस मिस्ट्री का पर्दाफाश कर गुनाहगारों को सजा दिलवाने , पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाने की मांग के साथ साथ बॉलीवुड में जड़ जमाए नेपोटिज्म अंडरवर्ल्डएवं ड्रग सिंडिकेट का प्रभाव का पर्दाफाश करवाना चाहती है , ताकि दूसरा कोई सुशांत इसका शिकार नहीं बन सके और भारत की धरती पर रहकर देशद्रोहियों का सुर अलापने का दुस्साहस सपने में भी नहीं कर सके. वह तो भारतीय वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई आदि की किरदार निभा रही है ,फिर इसमें आपकी महाराष्ट्र सरकार व मुंबई पुलिस की नाराजगी व खुन्नस कैसी और क्यों ? देशवासी जान रहे हैं कि इन सवालों का माकूल जवाब आपके पास नहीं है और इसी सामाजिक राष्ट्रीय सुकृत्य की सजा कंगना रनौत को दी जा रही है . क्या आपके पास कोई सबूत व प्रमाण है कि कंगना रनौत ने कभी महाराष्ट्र की धरती भारत माता के महान वीर सपूत शिवाजी महाराज और महाराष्ट्र के युगपुरुष बाला बालासाहेब ठाकरे पर कभी भी आलोचना का एक शब्द का भी इजहार की है . क्या इंसाफ व उसूल की रक्षा की मांग करना गुनाह है? इसे लेकर कंगना रनौत व मीडिया कर्मियों पर आप सबों का इतना उतावलापन और बेवजह चिल्लम चिल्ली वाजिब या मुनासिब है. यदि आप सबों की सोच व ख्याल में मुनासिब है भी तो क्यों और किसके लिए ? कम से कम इसका भी तो खुलासा कीजिए देशवासियों के समक्ष यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है और हमेशा बना रहेगा . अभिव्यक्ति संविधान प्रदत मौलिक अधिकार है ,किंतु इसकी भी अपनी सीमाएं व वर्जनाएं तय हैं इसे आप भी बखूबी समझते जानते हैं .

हरामखोर और नॉटी शब्द का है अलग-अलग अर्थ व सेंस

संजय रावत जी आप एक उच्च शिक्षित एवं देश के जिम्मेवार व्यक्ति हैं आप कभी मीडिया कर्मी भी रह चुके हैं वर्तमान में आप सांसद और शिवसेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. आपकी छवि एक जिम्मेवार एवं दमदार वक्ता के रूप में भी है ना जाने इधर आपको कौन सा सांप सूंघ गया की आप शब्दों का इस्तेमाल व अर्थ भी भूल गए .एक नारी को हरामखोर कहने पर जब पूरा देश उबल गया तो आपने राजनीतिक चतुराई से हरामखोर शब्द का अर्थ व रुप ही बदल दिया और आपने पलटा खाते हुए दलील दी कि महाराष्ट्र में हरामखोर का मतलब नॉटी समझा जाता है, कंगना को हरामखोर कहने के पीछे उसे नॉटी गर्ल कहना ही मेरा असली मकसद व सेंस था भले ही मीडिया कंगना और सोशल मीडिया ने इसे तोड़ मरोड़ कर पेश कर दिया व मामले को तूल पकड़ा दिया वाह क्या राजनीतिक चतुराई व सफाई है , आपको मालूम होना चाहिए कि देशवासी बखूबी जानते हैं कि हरामखोर शब्द का हिंदी शब्दकोश में हराम की कमाई खाने वाला व मुफ्तखोर और अंग्रेजी शब्दकोश में बास्टर्ड होता है ,वही नॉटी अंग्रेजी शब्द का अर्थ हिंदी शब्दकोश में नटखट चुलबुली दुष्ट अश्लील होता है फिर दोनों शब्द के अर्थ में समानता कैसे हो सकती है ? संजय रावत जी आज के 21वीं सदी के भारत में पब्लिक सब कुछ जानती समझती है अब इसे किसी को समझाने बुझाने की जरूरत नहीं रह गई है. आप लाख दलील देते रहें करोड़ों देशवासी कंगना रनौत को हरामखोर कहने के पीछे समाहित आपकी मंशा व भाव को भली-भांति समझ चुके हैं.

बेमानी है कंगना को मुंबई आने से नहीं रोकने संबंधी आपकी दूसरी भी दलील

संजय रावत जी आपने एक मीडिया से साक्षात्कार में कहा है कि कंगना को मुंबई आने से किसी ने नहीं रोका वह खुद कह रही है कि मुंबई में उसे जान का खतरा है इसी बात पर मेरे द्वारा कहा गया है कि अगर कंगना रनौत को मुंबई में जान का खतरा है तो उसे मुंबई आने की जरूरत ही क्या है ? लेकिन आपको मालूम होना चाहिए की देशवासी की नजर मुंबई पर है कंगना रनौत ने 9 सितंबर को मुंबई आने का ऐलान किया है इसके पहले ही उसे खौफजदा करने के लिए प्लानिंग के तहत बीएमसी की पहल आखिर क्या इशारा करता है ?अगर कंगना रनौत ने मुंबई आने पर अपने जान पर खतरे की आशंका जताई है ,तो उसे सुरक्षा प्रदान करना क्या महाराष्ट्र सरकार की जिम्मेवारी नहीं बनती है ? क्या यह केंद्र सरकार की जिम्मेवारी है ?इस पर आपका क्या जवाब होगा देशवासी इसकी प्रतीक्षा करेंगे .

आमजन की संजय राउत से गुजारिश

आमजन की आपसे गुजारिश है कि कानून को अपने हिसाब से चलने व काम करने दें, इसे भटकाने की कोशिश कृपया नहीं करें दूसरे किसी का भी मोहरा नहीं बने अपनी छवि को प्राथमिकता दें अकाट्य सत्य है कि होगा वही , जो कानून सम्मत होगा किसी के चाहने व नहीं चाहने से कानून पर कोई असर नहीं पड़ेगा , क्योंकि यह कोई सामान्य मामला नहीं रह गया है देशव्यापी मुद्दा बन चुका है. इस पर पूरे देशवासियों की नजर टिकी हुई है .फिर व्यर्थ का प्रयास करने से कोई फायदा हासिल होना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है . फिर सत्यमेव जयते का साथ समर्थन क्यों नहीं ? इस पर निर्णय लेना आपके विवेक और संवेदनशीलता पर निर्भर करता है .

वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार धीरेंद्रनाथ सिंह, न्यूज़ रूम दैनिक खबर

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