अब तो गांव कस्बा की युवतियां किशोरिया भी रिया चक्रवर्ती पर कसमे लगी है तंज

वो जो आंखों से ओझल न होती थी एक पल के भी लिए लापता हो गई देखते देखते ,समझते थे बड़ी मासूम है वो क्या से क्या हो गई देखते देखते

रिया चक्रवर्ती के खिलाफ गांव कस्बा में भी फैली नफरत की चिंगारी

सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड / मर्डर मिस्ट्री के लिए अभी तक मुख्य रूप से जिम्मेवार ठहरायी जा रही सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के खिलाफ आक्रोश व नफरत की चिंगारी की आंच नगरों महानगरों से फैलकर अब गांव कस्बा में भी पहुच चुकी है ,जो विशेष रूप से युवा पीढ़ी में तेजी से नफरत में तब्दील हो रही है. युवा युवतियों, किशोर किशोरियों रिया चक्रवर्ती पर तंज कसते हुए यह राग जो ना आंखों से ओझल होती थी एक भी पल के लिए वो लापता हो गई देखते देखते , समझते थे वो बड़ी मासूम है क्या से क्या हो गई देखते देखते अलाप रही है रिया चक्रवर्ती को उसके घीनौने करतूतों के लिए जी भरकर कोस व बददुआएं भी दे रही है, प्रेम जगत व भारतीय नारी के माथे पर कलंक का एक भद्दा, काला टीका का दर्जा दे रही हैं .

रिया चक्रवर्ती के प्रति प्रति युवा पीढ़ी की क्या है सोच समझ व अवधारणा

गांव कस्बा की युवक युवतियां व किशोर किशोरियों की दलील है कि सुशांत सिंह राजपूत के डेथ के लिए मुख्य रूप से जिम्मेवार ठहरायी जा रही रिया चक्रवर्ती के पास इससे जुड़े सीधा सवालों जब वह सुशांत सिंह का सबसे निकटतम गर्लफ्रेंड व लिव इन रिलेशन में थी , तो सुशांत के साथ साए की तरह रह रहीं रिया उसके सबसे मुश्किल भरे दौर में किस इंसानियत व मानवता के तहत सुशांत को गहरे तनहाई के आलम में छोड़ उससे अपना दामन छुड़ा और उसका सब कुछ बटोरकर क्यों अपना घर क्यो चली आई थी , जब सुशांत को एक मजबूत सहारा व हमदम की सख्तजरूरत थी. युवा पीढ़ी का दावा है कि इस सीधे व सरल सवाल का भी कोई माकूल जवाब रिया चक्रवर्ती के पास ना तो है और ना होगा .

बड़ी बेशर्म खुदगर्ज और एहसान फरामोश निकली रिया

युवा पीढ़ी रिया चक्रवर्ती के माथे पर बड़ी बेशर्म खुदगर्ज और एहसान फरामोश प्रेमिका व हमदम होने का भी आरोप मढ लग रही है, इसके पीछे उनकी दलील है कि जिसके पैसे से रिया ने खुद जमकर एशोआराम किया अपने परिवार को भी भरपूर एशोआराम करवायी खुद और आपने परिवार को आलीशान फ्लैट नसीब करवायी विदेश की यात्रा की सुशांत की कंपनी में अपने भाई शोविक को पाटनर बनवाया, सुशांत के पैसे को पानी की तरह बहाया और वही रिया मुश्किल घड़ी में सुशांत को तनहाई का सौगात देकर उसे छोड़ अपना घर लौट आने की हिम्मत व हौसला कैसे जुटा पायी, इसके पीछे उसकी क्या नैतिकता व वजह बनी ? रिया के पास इस सीधे सवाल का भी कोई माकूल व मुक़म्मल जवाब नही जुट रहा हैं ,तो रिया चक्रवर्ती के पास अपनी निर्दोषिता की सफाई व साफगोई के एक भी जवाब उपलब्ध ना है और ना कभी होगा केवल बेतुके अनसुलझे दलीलों को छोड़ यह कड़वा सत्य पूरा देश जान और समझ भी चुका है . इसके बावजूद रिया चक्रवर्ती अपनी बेशर्मी बेहयाई की सारी हदें लांघने में कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रही है . रिया सुशांत के साथ लिव इन रिलेशन में रहने के आधार पर सुशांत के सारे चल अचल संपत्ति पर अपना अधिकार दावा ठोकने में तनिक भी संकोच व परहेज नहीं कर रही है . इससे बड़ी बेशर्मी बेहयाई व खुदगर्जी का मिसाल सृष्टि के सर्वश्रेष्ठ रचना चेतनशील प्राणी मानव जाति के लिए दूसरा और क्या हो सकता है ?

बड़ा पाषाण हृदय और घृणित आचरण की भी है रिया चक्रवर्ती

भारतीय परंपरा के अनुसार बेटे पर पहला अधिकार उसके पिता का होता है ,सुशांत के पिता 72 वर्षीय के के सिंह अपने इकलौते बेटे सुशांत से फोन से बात करवाने के लिए रिया चक्रवर्ती से गिड़गिड़ाते रहे हाथ जोड़कर बार-बार विनती करते रहे सुशांत से मिलने के लिए फ्लाइट की टिकट की व्यवस्था कर पटना भेजने के लिए रिया से गुहार पर गुहार लगाते रहे ,फिर भी रिया का पत्थर दिल नहीं पसीजा और उसने अंतिम घड़ी में भी एक बूढ़े लाचार पिता को अपने इकलौते बेटे से ना तो फोन से बात करवाई और ना ही मिलने के लिए फ्लाइट का टिकट ही भेजी जबकि रिया ने इसकी भनक तक भी सुशांत को नहीं होने दी और उसे अपने नागपाश में पूरी तरह जकड़े रही और रिया और उसका परिवार सुशांत के पैसे से गुलछर्रा उड़ाते रहे . गांव कस्बा के युवा पीढ़ी का इसपर गंभीर आरोप है कि रिया चक्रवर्ती दुनिया की सबसे बड़ी अधम खुदगर्ज एहसान फरामोश पत्थरदिल और विचारहीन महिला निकली उसमें रंच मात्र भी नारी व प्रेमिका सुलभ गुण विद्यमान नहीं है रिया सीधे-सीधे नारी जाति के माथे पर केवल काले कलंक का एक टीका मात्र है , उससे जितनी भी नफरत घृणा की जाए बहुत कम है .

कस्बाई युवा पीढ़ी की भी रिया चक्रवर्ती को नसीहत

नगरों महानगरों की बात जुदा गांव कस्बा की युवा पीढ़ी में भी रिया चक्रवर्ती के खिलाफ नफरत आक्रोश और नाराजगी की चिंगारी दावानल का रूप अख्तियार कर लिया है . इनका साफ कहना व मानना है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं इसके गिरफ्त से बचना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होता है , फिर भी अगर समय और भाग्य पीड़ित परिवार को साथ नहीं देता और रिया चक्रवर्ती को सुशांत डेथ केस में क्लीन चिट मिल भी जाता है ,तो ऊपर वाले की लाठी की मार और करोड़ों लोगों की बद्दुआओं की आह उसपर और उसके परिवार पर कहर बनकर बरपेगा, जिससे दुनिया की कोई व बड़ी से बड़ी ताकत भी उसे बचा नहीं पाएगा चैन सुकून से जी पाने की बात तो दूर रही मौत भी उसे और उसके परिवार को नसीब नहीं हो पायेगा .

इतिहास कभी माफ नहीं करेगा , काले पन्ने में दर्ज होगा यह दास्तां

ऐसे भी रोज-रोज होते नए खुलासे ,ईडो जांच का कसता शिकंजा और सीबीआई जांच का भय ने रिया चक्रवर्ती उसके भाई शोविक चक्रवर्ती और पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती को दिमागी रूप से खोखला कर दिया है . रिया लगातार अपना बयान बदल रही है कल तक सुशांत डेथ केस का निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग करने वाली रिया अब इससे घबराकर सीबीआई की जांच नहीं करवाने की गुहार सुप्रीम कोर्ट में लगाई है मुंबई पुलिस से ही मामले की जांच करवाने की दुहाई भी लगाई है, जो उसे गुनाहगार होने की पुष्टि कर रहा है . फिलहाल निर्णय सुप्रीम कोर्ट के हाथ में है लेकिन परिलक्षित होने लगा है कि बॉलीवुड के नेप्टिज्म व ग्रुपिंजम के दबंग शख्सियत व राजनीति के रहनुमा भी बदनामी और करोड़ो देशवासियों की आक्रोश नाराजगी के भय व संदेह संकोच से एक के बाद एक रिया चक्रवर्ती से अपना दामन बचाते नजर लगे लगे हैं . रिया तन्हा होती जा रही है सुशांत डेथ केस की सटीक व पारदर्शी जांच व पीड़ित परिवार को इंसाफ मांगने वालों की कतार लगातार कोसों लम्बी लंबी चौड़ी होती जा रही है , क्योंकि सभी को पता है कि देश का उभरता सितारा और राष्ट्र समाज एवं जनहित व कल्याण की भावना से ओतप्रोत सुशांत सिंह राजपूत का डेथ केस इतिहास का पन्ना बनेगा और इसके निष्पक्ष पारदर्शी जांच और पीड़ित परिवार को वाजिब इंसाफ में रोड़ा बनने व अटकाने वाले शख्सियतों व गुनहगार रिया चक्रवर्ती को साथ निभाने वाले शख्सियतों का नाम इस इतिहास के पन्ने में काले अक्षरों में लिखा जाएगा .रिया चक्रवर्ती के गुनाहों पर पर्दा डालने वालों को इतिहास और जमाना कभी माफ नहीं करेगा समय रहते ऐसे लोगों को होश व सही रास्ते पर आना ही एकमात्र विकल्प होगा साथ ही इस कड़वे प्रसंग का कड़वा सत्य भी है .

न्यूज़: वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो0 धीरेंद्र नाथ सिंह, न्यूज़ रूम दैनिक खबर

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