अपने औचित्य उद्देश्य से अभी भी कितना समीप कितना दूर झारखंड और विधानसभा स्थापना दिवस ? सही मायने में क्या है स्थापना दिवस और क्या है इसका मूल अर्थ और मकसद ? जानिए इस अनसुलझी गुथी को

स्थापना दिवस महज एक जश्न व रश्म अदायगी नहीं संकल्प दिवस है

हासिल उपलब्धियों का अभिनंदन एवं नए सपने को आकार और साकार करने का संकल्प ही इसका मूल औचित्य है

पृथक झारखंड राज्य अपने मकसद में कितना सफल हुआ और आगे उसे क्या करना है का विचार दिवस है

क्यों मनाया जाता है स्थापना दिवस ?

झारखंडी अधिकारों की प्राप्ति के लिए वीर शहीदों और क्रांतिकारियों के बलिदान व उलगुलान के उद्घोष के खून पसीने की खुशबू से सन 2000 में पृथक झारखंड राज्य का गठन हुआ और झारखंड विधानसभा की स्थापना हुई . इसके यादगार स्वरूप व याद को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर को झारखंड राज्य स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की पुण्य जयंती पर 22 नवंबर को विधानसभा स्थापना दिवस समारोह का आयोजन होता रहा है यह परिपाटी देश के सभी राज्यों में अपने-अपने हिसाब व तौर तरीकों से प्रचलित है .

आखिर स्थापना दिवस का क्या है अर्थ ?

किसी भी चीज की स्थापना इसकी नींव ( फाउंडेशन )में अंतर्निहित होता है .शब्दकोश मे नींव को खोज की प्रक्रिया के रूप में व्याख्यापित्त किया गया है . विशेष रुप से भविष्य में साज संभाल के लिए निर्मित प्रतिष्ठान व संस्था के रूप में लेकिन नींव का मुख्य अर्थ उन चीजों से है , जिनकी बदौलत किसी निर्माण को खड़ा किया जाता है ,सहारा दिया जाता है या जिसके आधार पर उसकी आधारशिला रखी जाती है या स्थापना के अंतर्निहित सपनों को साकार रूप दिया जाता है . जब स्थापित कोई राज्य व प्रतिष्ठान के ठीक तरह से काम न करने की स्थिति में यह कहा जाता है कि इसकी नींव ही कमजोर है या कोई व्यक्ति बुरा बर्ताव व कार्य करता है तो लोग कहते हैं कि उसके परिवार की ही नींव कमजोर थी व है . इसलिए मूल रूप से नींव व स्थापना का मतलब ऐसी चीज से है जो व्यक्ति संगठन इमारत और समाज को सहारा देती है , यह धर्म के समतुल्य मानी जाती है .

हर स्थापना में अंतर्निहित होता है औचित्य और उद्देश्य

राज्य व संस्था की स्थापना का औचित्य होता है किसी चीज को धारण करना और व्यक्ति और समाज को एक डोर में बांधे रखना. निस्वार्थ सेवा ,निस्वार्थ प्रेम गरीब तबके के लिए सहानुभूति और सत्यता पर आधारित कार्य व्यवहार सबका कल्याण व सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय किसी भी स्थापना का मूल मंत्र होता है सिर्फ गीता ही नहीं कुरान ,बाइबल ,गुरुग्रंथ साहिब आदि धर्म ग्रंथों में किसी स्थापना व निर्माण का अर्थ समाज के आधार का ही सार माना गया है .

पृथक झारखंड राज्य अपने स्थापना के मकसद से कितना पास कितना दूर

प्रत्येक साल बड़े उमंग और उल्लास के साथ झारखंड राज्य और विधानसभा स्थापना दिवस समारोह का सरकारी स्तर पर आयोजन होता आ रहा है इस साल भी 22 नवंबर को कोरोना संकट में एहतियात बरतते झारखंड विधानसभा स्थापना दिवस मनाया गया. जहां हर साल की भांति उत्कृष्ट सेवा व कार्य के लिए सम्मानित करने का कार्य और राज्य के महामहिम राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के द्वारा जन संबोधन का कार्य किया जाता है . उपलब्धियां तो गिनाई जाती हैं किंतु खामियों पर कभी विचार मंथन नहीं किया जाता. आज 20 साल के पृथक झारखंड राज्य अपनी स्थापना के औचित्य और उद्देश के दहलीज पर कहां खड़ा है ?व इसमें काफी पीछे पड़ा हुआ है आदि मसलों पर शायद ही विचार किया जाता है और इसके पीछे कारणों को सार्वजनिक किया जाता है . नई-नई घोषणाएं तो की जाती हैं लेकिन इसे साकार करने व जमीनी रूप देने के लिए सच्चा संकल्प नहीं लिया जा रहा है .जो झारखंड राज्य के चतुर्दिक विकास एवं झारखंड वासियों के सर्वांगीण कल्याण के मार्ग में बड़ी विडंबना साबित हो रही है . ऐसा कहना व लिखना अतिशयोक्ति व गलत नहीं होगा कि देश का खनिज संपदा से पटा झारखंड राज्य अपने पृथक अस्तित्व के बावजूद भी अपेक्षित विकास से काफी पीछे पड़ा हुआ है आज भी बेरोजगारी ,भूख ,भय, भ्रष्टाचार अनियमितता सुरसा के मुंह की तरह मुंह बाए खड़ी है . शिक्षा ,स्वास्थ्य ,पानी ,बिजली आदि बुनियादी समस्याएं लगातार विस्तार पकड़ रही हैं .

झारखंड राज्य की स्थापना के औचित्य व उद्देश्य के संपूर्णता के लिए क्या है जरूरी ?

आजाद भारत के प्रथम गणतंत्र दिवस पर प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी एवं भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद ने अपने जन संबोधन में कहा था कि यह दिन केवल खुशियां व जश्न मनाने का नहीं है. आजादी के सपने को साकार करने के लिए हमें नई ऊर्जा उत्साह और सत्य निष्ठा एवं इच्छाशक्ति के साथ देश की उन्नति एवं देशवासियों के हित कल्याण में आगे बढ़ते रहने का संकल्प लेने का दिवस है . इसी तरह झारखंडी अधिकारों की प्राप्ति के लिए वीर शहीदों व क्रांतिकारियों आंदोलनकारियों के बलिदान हुआ खून पसीने से हुए पृथक झारखंड राज्य की स्थापना के पीछे अंतर्निहित औचित्य व उद्देश्यों व सपनों को साकार कराने के लिए लगातार नए पायदान देने की जरूरत है ,न केवल स्थापना दिवस समारोह का आयोजन कर खुशियां मनाने
व औपचारिकता निर्वाह की बल्कि जरूरी है झारखंड राज्य के बदहाल स्थिति में बदलाव की गति और दिशा देने की . तभी भगवान बिरसा मुंडा का झारखंड का सपना साकार हो पाएगा .

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा झारखंड नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगा

झारखंड राज्य की 20वीं स्थापना दिवस पर पर राज्य के युवा एवं ऊर्जावान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन में घोषणा की है कि 20 साल का अपना युवा झारखंड नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ेगा . वीर शहीदों और क्रांतिकारियों के बलिदान और उलगुलान के उद्घोष आंदोलनकारियों के खून पसीने की खुशबू अभी महक रहा है जो हमें गति और दिशा देगा . वर्ष 2000 में गठित अलग झारखंड राज्य कई उतार-चढ़ाव और खट्टी मीठी यादों के साथ यहां तक का सफर पूरा किया है अब यह दुआ झारखंड कई संघर्षों और सफलताओं के साथ साथ आगे बढ़ने की ओर अग्रसर है युवा शब्द वैसे भी संकल्प शक्ति बदलाव व विकास जैसे प्रगति सूचक शब्दों का मालिक माना जाता है. किसी भी समाज एवं देश में बदलाव की इमारत युवा शक्ति द्वारा ही लिखी गई है . युवा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस भावनात्मक व आशावादी और उत्साहवर्धक घोषणा से झारखंड वासियों में आशा की नई किरण जगी है और घोषणा को जमीनी रूप लेने व युवा झारखंड के सपना को साकार होने पर नजर टिकी रहना स्वाभाविक व लाजमी भी ठहरता है .

वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रो0 धीरेंद्र नाथ सिंह

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